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भाजपा राज में भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुकी CMO -हेमंत राज में लोगों में जगाई है उम्मीद

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सीएमओ (CMO)को भ्रष्टाचार का अड्डा बताने वाले रघुवर दास  बताये कि क्या उन्होंने हेमंत की तरह एक रिक्शा चालक तक को दी है इज्जत

भ्रष्टाचार के ऐतिहासिक संरक्षक रघुवर दास को क्या मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठाने का नैतिक हक है!

राँची। बीजेपी के पूर्व डबल इंजन सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास अनर्गल बयानबाज़ी कर चर्चा में बनने का प्रयास करते देखे जा सकते हैं। झारखंडी जनता को धोखा देने और भ्रष्टाचार के ऐतिहासिक संरक्षक, रघुवर दास जनता के बीच भ्रम फैलाने वाली राजनीत एजेंडे के मद्देनजर शिगूफा छोड़ रहे हैं कि सीएमओ (CMO) में भ्रष्टाचार है। इस प्रवासी पूर्व मिख्य्मंत्री द्वारा बताया जाना कि गठबंधन सरकार के 9 माह के शासन में भ्रष्टाचार का खेल हुआ है, सुर्खियाँ बटोरने भर का हिस्सा हो सकता है। 

क्योंकि राज्य की जनता के आत्मा तक में यह अंकित हो चुका है कि भाजपा द्वारा झारखंड को थोपे गए प्रवासी मुख्यमंत्री के शासन काल में भ्रष्टाचार का खेल किस कदर सर चढ़ कर बोला था। बालू का अवैध कारोबार, शराब माफियों को संरक्षण, सड़क से लेकर विभागीय भ्रष्टाचार तक की ऐतिहासिक गाथा उस प्रवासी मुख्यमंत्री की उपलब्धि रही थी। 

मोमेंटम झारखंड घोटाला, कंबल घोटला, हरमू नदी और बड़ा तालाब सौंदर्यीकरण जैसे अध्याय राज्य के आस्तीन में उस प्रवासी मुख्यमंत्री के शासन में हुए करोड़ो के घोटाला ऐसे दाग हैं जिसे किसी डिटर्जेंट से नहीं धोया जा सकता। घनबाद सड़क निर्माण में 200 करोड़ रूपये के घोटाला, उस वक़्त के सीएमओ (CMO) में व्याप्त घोटाला के प्रस्तावना भर है। व्याख्या तो अनुमान से परे हो सकता है…।

जबकि ठीक एक प्रवासी मुख्यमंत्री के नियति से अलग झारखंडी हेमंत शासन में जिस प्रकार एक रिक्शा चालक तक को सीएम हाउस में इज्जत व सम्मान दिया गया। एक लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र के मूल भावना के अमिट पर्याय से कम नहीं हो सकता है।

हेमंत सरकार में झारखंडी जनता के बीच सीएमओ (CMO) से लेकर प्रोजेक्ट भवन तक फिर जगी है उम्मीद

विधानसभा चुनाव-2019 परिणाम आने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने बाक़ायदा मुख्यमंत्री आवास में अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि अब राज्य में किसी की उम्मीद नहीं टूटेगी, सबका ख्याल रखा जाएगा। आम जनता में एक प्रवासी मुख्यमंत्री को हटाने की इतनी बेचैन थी कि रघुवर दास, एक मुख्यमंत्री को जनता ने भाजपा के तमाम पैंतरे के बावजूद हरा कर ही दम लिया।

वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राज्य को साफ़ सन्देश है कि झारखंड राज्य जिस उद्देश्य से बना था, उसे मूर्त रूप देने का वक्त आ गया है। झारखंडी स्मिता को बचाने के लिए पूरी मज़बूती से पांच साल तक सरकार चलाएंगे। जिसके लिए हेमंत सोरेन लगातार प्रयासरत भी देखे जा रहे हैं। यह अलग बात है कि भाजपा द्वारा बिना किसी प्लानिंग के थोपे गए देशव्यापी लॉकडाउन व सौतेला व्यवहार के कारण गति थोड़ी धीमी जरूर हो गयी है।

लेकिन, मुख्यमंत्री श्री सोरेन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए एक तरफ बिना घबराए कोरोना की लड़ाई के लिए विशेष तैयारी की। और दूसरी तरफ बिना कर्ज लिए केंद्र की साजिशों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए, राज्य को संचालित कर सीएमओ (CMO) से लेकर प्रोजेक्ट भवन की राज्य में नयी परिभाषा लिखी। जो भाजपाइयों के अतिरिक्त तमाम जनता के लिए गौरव की बात हो सकती है।

ज्ञात हो, मौजूदा सीएम जिस प्रकार झारखंडी फरियादियों की अपील सुन उसका तत्काल निदान करते दीखते हैं। निश्चित रूप से जनता के बीच एक प्रवासी व झारखंडी मुख्यमंत्री के बीच के अंतर का प्रत्यक्ष उदाहरण हो सकता है। शायद यही वह वजहें हो सकती है कि देश भर में उन्हें जनता के सीएम के रूप में जाना जाने लगा हैं।

कोरोना पॉजिटिव मिलने पर भी CMO में चलता रहा काम

ज्ञात हो कि जब राज्य में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर थी, जब तमाम भाजपाई अपने गुहाओं में घुस चुके थे। कुछ भाजपाई दिल्ली से प्रवासी मजदूरों को अधर में छोड़ कर झारखंड पलायन कर रहे थे।  उसके प्रभाव से मुख्यमंत्री आवास भी अछूता नहीं रहा था। देखते-देखते सीएमओ में कार्यरत कर्मी भी कोरोना पॉजिटिव होने लगे थे। सीएम हाउस को बंद करना पड़ा। बावजूद  इसके भी सीएमओ (CMO) में काम नहीं रूका। धीमा ही सही लेकिन झारखंडी जनता के काम होते रहे। हर जरुरी काम को सीम ने अंजाम दिया। 

छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में संशोधन और जंगलों पर अपने अधिकारों की मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलनरत टाना भगतों को सीएम हाउस बुलाकर मान देना एक स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। मसलन, जहाँ केंद्र की भाजपा खुद के फ़रेब को भगवान के माथे मढ नपुंसकों की भांति देश के तमाम अर्जित संस्थान बेचने पर अमादा है। जहाँ भाजपा द्वारा कोरोना काल में वेंटीलेटर घोटाला, PM केयर जैसे फरेब से लेकर राज्यों के साथ वादा खिलाफी हुई। वहां हेमंत साकार जनता के बीच अपनी विश्वास की डोर मजबूत बनाने में सफल हुई है।  

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