भाजपा शासित रामराज्य यूपी के हाथरस में हुई बर्बर गैंग रेप कांड में पीड़िता की मौत

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रामराज्य

क्या रामराज्य में दोषियों को सजा-ए-मौत मिलेगी -सवाल ? 

भाजपा शासित रामराज्य यूपी की सच्चाई हाथरस में हुई बर्बर गैंग रेप कांड में पीड़िता की मौत से समझी जा सकती है।  इतने दिनों तक मामले को दबाने की कोशिश होती रही। मामले में बर्बरता की इंतेहा – पीड़िता की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी जाती है, जीभ काट ली जाती है, लेकिन मामले को दबाने की कोशिश होती रहती है। बावजूद इसके बहादुर लड़की ने इतने दिनों तक संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुई। दरअसल यह मौत नहीं क़त्ल है। 

यागी पुलिस द्वारा शुरुआत में तो FIR तक नहीं लिखी गयी। पीड़िता की मौत हो जाने के बावजूद पूरे परिवार को अंधेरे में रखकर पीड़िता का अंतिम संस्कार रातो-रात कर दिया गया। बलात्कारियों को बचाने के लिए सबूत जल्दी से जल्दी मिटाए जा रहे हैं। इस बर्बर घटना का प्रतिवाद करने वाले देश के तमाम प्रगतिशील और न्यायप्रिय लोग व संगठन के सड़कों पर उतरने के बावजूद दरकिनार कर दिया गया है।

हाथरस के विधायक, चेयरमैन और सांसद अनुसूसूचित जाति से हैं और तीनों भाजपा से हैं

हाथरस का विधायक हरिशंकर माहौर, चेयरमैन डॉली माहौर अनुसूसूचित जाति से हैं और सांसद वाल्मीकि जाति से। मजे की बात यह है तीनों भाजपा से हैं। फिर भी पूरे प्रकरण में उनकी चुप्पी भाजपा विचारधारा की और गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यूपी, हाथरस के मनीषा गैंग रेप कांड के चारों अपराधी संदीप ठाकुर, लवकुश ठाकुर, राजकुमार उर्फ़ रामू ठाकुर व रवि ठाकुर की तुलना राम राज्य के जिस पात्र से करना है कर लीजिये। लेकिन, सवाल है कि क्या इन्हें सजा-ए-मौत मिलेगी? जबकि, देश ने प्रियंका रेड्डी के बलात्कारियों का एनकाउंटर देखा है। 

राष्ट्रवादी व मीडिया ख़ामोश क्यों रही?

दो हफ्ते तक अकेले जंग लड़ते हुए देश की बेटी शहीद हो गयी। लेकिन कथित राष्ट्रवादी व मीडिया ख़ामोश रही क्योंकि इन जातिवादी और वर्णवादी गोदी मीडिया को शायद लगता रहा कि इसे प्रमुखता देने के बाद निर्भया कांड का कद छोटा हो सकता है। इसलिए झांसी की रानी पर अपनी थोथी ज्ञान बघारती रही। सच्चाई है कि देश की एक बेटी के साथ गैंगरेप हुआ … फिर जीभ काट लिया गया, कान काट दिया गया, नाक काट लिया गया, प्राइवेट पार्ट्स मे डंडे का घांव, आंख फोड़ दिया गया … जैसी भयानक और विभत्स घटना पर मिडिया ने ध्यान क्यों नहीं दिया?

फ़र्ज़ी रामराज्य में योगी आदित्यनाथ पर सवाल 

हिन्दू धर्म की किस प्रथा, किस वेद के तहत आधी रात को शवदाह किया गया? शीहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्म दिन के महज एक दिन बाद, रात के 2 बजे हाथरस पीडिता का शव उसके गांव ले जाया जाता है। परिजन रामराज्य में पुलिस ठाकुर अजय सिंह से गुहार लगाते रह जाते हैं कि उनकी बेटी को एक बार घर ले जाने दें। 

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के शव की भांति इस बेटी के शव को रात के अँधेरे में जलाया गया

लेकिन, जिस प्रकार अंग्रेजों ने चुप-चाप रात के अँधेरे में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के शव को जलाया था ठीक उसी प्रकार योगी प्रशासन ने परिवार को घर में कैद कर पीड़िता के शव का दाह संस्कार रात के 2.30 बजे के अँधेरे में कर दिया। क्या यह इतेफ़ाक है यह घटना महज भगत सिंह के जन्इमदिन के एक दिन बाद घटती है। इस रामराज्य के पदाधिकारियों को इतना भी पता नही कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार की आज्ञा हिदू धर्म और वेद भी नहीं देते! 

हाथरस की घटना पर राष्ट्रीय महिला आयोग (रेखा शर्मा), स्मृति ईरानी, सारे दल और मीडिया मौन। किसी ने हाथरस की बेटी को नहीं मारा, सरकार के अनुसार बलात्कार की पुष्टि हुई ही नहीं है। इस बच्ची का शव ही नहीं जला है सरकार ने अपनी शर्म और न्यूनतम नैतिकता का भी अंतिम संस्कार कर दिया है।

मसलन, भाजपा के रामराज्य में एक वंचित समाज की बच्ची हक जानवरों की तुलना में भी नगण्य है। या अत्यंत दुर्भाग्य है कि भारत में अब भी बैकग्राउंड देखकर समर्थन और सहायता हासिल होती है। भारत में ऐसे बर्बर घटने वाली घटनाओं तक की FIR आसानी से नहीं लिखी जाती है तो अन्य जघन्य अपराधों की फेहरिस्त कितनी लम्बी हो सकती है। फिर भी केंद्र की मोदी सत्ता इन अपराधियों को ख़त्म करने के बजाय एट्रोसिटी एक्ट को ख़त्म करने में लगी है। और संघी विचारधारा हमारे ऐतिहासिक प्रतीकों को धूमिल करने में। —।।बिद्रोही।।

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