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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तीन बड़े निर्णय – सवा तीन करोड़ झारखंडियों को मिली राहत

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बिजली उपभोक्ताओं, झारखंडी छात्रों व श्रमिकों के हित की दिशा में सरकार की बड़ी पहल

राँची। देश भर के तमाम राज्यों के मध्यमवर्गीय जनता के लिए कोरोना काल किसी अभिशाप से कम नहीं रहा है। लेकिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस काल में अन्य राज्यों से अलग हट कर कई ऐतिहासिक फैसले लिए। युवा झारखंडी मुख्यमंत्री ने जनता को परेशानियों से उबारने के लिए हर संभव प्रयासरत दिखे। बीते दिनों उनकी सरकार द्वारा लिए अहम तीन निर्णय भी इसका एक स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। 

एक तरह मोदी सरकार देश के किसान से लेकर गरीब श्रमिकों के अधिकारों पर हमले बोलती रही। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सोरन राज्य के आम जन के अधिकारों के संरक्षण हेतु लगातार प्रयासरत हैं। उदाहरण के तौर पर सरकार का बिजली बिल में बढ़ोतरी न करने का निर्णय, हजारों झारखंडी छात्रों के भविष्य के मद्देनज़र सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना व राज्य के मज़दूरों के आर्थिक पहिए को चलते रहने के लिए उनके दैनिक मजदूरी और महँगाई भत्ता में बढ़ोतरी करना यही दर्शाता है। 

मसलन,  मुख्यमंत्री द्वारा बिजली बिल में बढ़ोतरी न करने के फैसले ने जहाँ राज्य की सवा तीन करोड़ से अधिक जनसंख्या को तत्काल राहत दिया है। वहीं छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना और गरीब मज़दूरों के आय में बढ़ोतरी जैसे फैसले स्पष्ट तौर पर बयान करता है कि यह सरकार पूंजीपति के लाभ से इतर गरीब जनता के भलाई की दिशा में सोच रखती है। जहिर है यही वह राह हो सकता है जो लोकतंत्र के मूल भावनाओं से सरोकार रखती है। 

जनता के हित में बिजली वितरण लिमिटेड की सिफ़ारिशें नकारना पूंजिप्रस्त राजनीति के लिए आईना है 

हेमंत सरकार ने बिजली वितरण लिमिटेड की नई दरों की सिफ़ारिशें नकारते हुए बिजली दर ना बढाने का फैसला किया है। साथ ही उपभोक्ताओं के लिए कई छूट की भी घोषणा की भी है। जो कोरोना काल में देश के लिए उदाहरण हो सकता है और डूबती अर्थव्यवस्था वाले लोकतंत्र के लिए संजीवनी बूटी भी। 

ज्ञात हो कि हेमंत सरकार ने कमर्शियल बिजली की दरों में 4 प्रतिशत तक की कटौती है। उपभोक्ताओं के लगने वाले मीटर किराये पर रोक लगायी गयी है। बिल भुगतान में देरी होने पर अब उपभोक्ताओं को डेढ़ प्रतिशत के बजाय 1 प्रतिशत ही जुर्माना लगेगा। निश्चित रूप से हेमंत का फैसला स्वागत योग्य है और केन्द्रीय पूंजिप्रस्त सत्ता की बेलगाम नीतियों के लिए आईना भी।

झारखंडी जनता के सोच पर फिर खरी उतरी है हेमंत सरकार 

21 सितंबर 2020,  हाईकोर्ट ने राज्य के पिछली भाजपा सरकार द्वारा बनाए नियोजन नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। जिससे अनुसूचित जिलों में होने वाली शिक्षक नियुक्ति पर तलवार लटक गयी थी, वह रद्द हो गयी थी। और कोर्ट ने राज्य सरकार को इन जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया को फिर से संचालित करने का निर्देश दिया था।

झारखंडी छात्र-छात्राओं के भंवर में फंसे भविष्य के ख़ातिर हेमंत सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ज्ञात हो कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही मुख्यमंत्री ने फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान किया था। बहरहाल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंडी जनता के सोच पर फिर खरे उतरते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है।

संकट के दौर में दैनिक मजदूरी और महँगाई भत्ता में बढ़ौतरी श्रमिकों के लिए संजीवनी  

हेमंत सरकार संकट के दौर में दैनिक मजदूरी और महँगाई भत्ता में बढ़ौतरी की पहल लाखों श्रमिकों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो सकता है। ज्ञात हो कि श्रम विभाग ने झारखंडी श्रमिकों के दैनिक मजदूरी और महँगाई भत्ता में बढ़ोतरी का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी सालाना होने वाली बढ़ोतरी की तर्ज पर की गयी है। और नियोक्ताओं को यह बढ़ोतरी की दर बीते अप्रैल 2020 से दय होगा। इस दायरे में मुख्य रूप से बाढ़ निर्माण और सिंचाई कार्यों से लेकर उद्योगों में लगे मजदूर आयेंगे। वृद्धि दर 21.9 रूपये से लेकर 870 रूपये प्रति माह तक है।

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