महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक अधिकारों को सशक्त बनाते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

सशक्त

महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में पिछले हफ्ते सीएम ने राज्य में उठाया बड़ा कदम 

ग्रामीण क्षेत्रों के 6 लाख परिवारों की महिलाओं को राहत पहुंचाने के लिए स्वीकृत हुए 75 करोड़ रुपये 

रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक अधिकारों के सशक्तिकरण की राह में दृढ़संकल्पित हो आगे बढ़ते दिखते हैं। पिछले हफ्ते राज्य की महिलाओं के हित में हेमंत सरकार द्वारा कई ठोस कदम उठाये गए हैं। जो साबित करता है कि वर्तमान सरकार महिलाओं के आकांक्षाओं पर खरी उतर रही है। 

महिलाओं के सशक्तिकरण के मद्देनज़र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बीते मंगलवार को दो बड़ी योजनायें लॉन्च हुए। पहला “आजीविका संवर्धन हुनर अभियान” और दूसरा “फुलो झानो आशीर्वाद अभियान”। साथ ही बुधवार को राज्य की छात्राओं के आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में भी बड़ी पहल हुई। सरकार ने 111 महिलाओं के हुनर को सराहते हुए रोज़गार संबंधी नियुक्ति पत्र सौंपा है। 

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान इन महिलाओं के कामों के प्रति समर्पण भाव से अभिभूत हो सीएम ने उन्हें यह अधिकार दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 6 लाख महिला परिवारों को 75 करोड़ रूपये का अनुदान देना सीएम के दूरदर्शी सोच को भी दर्शाता है। 

महिलाओं कोआजीविका से जोड़ मुख्यधारा में लाने के लिए राज्य में तीन अभियान की शुरूआत

झारखंड के सीएम का मानना है कि महिलाओं का हड़िया-दारु बेचना राज्य के लिए अभिशाप है। इसलिए उन तमाम महिलाओं को आजीविका से जोड़कर मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार द्वारा फूलो झानो आशीर्वाद अभियान की शुरूआत की गयी है। साथ ही दो अन्य अभियान की भी शुरुआत हुई है।

  • आजीविका संवर्धन हुनर अभियान (ASHA) के जरिए 17 लाख ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के सशक्त साधनों से जोड़ा जाएगा। कृषि, पशुपालन, वन-उपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण के अलावा कई अन्य साधनों से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं की स्वरोजगार सुनिश्चित की जायेगी। इसके लिए करीब 1200 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है।
  • फूलो झानो आशीर्वाद योजना के तहत हड़िया-दारु निर्माण-बिक्री से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के साधनों से जोड़ा जाएगा।
  • सखी मंडल की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को “पलाश ब्रांड” के तहत बाजार से जोड़ा जाएगा। निर्मित उत्पादों की प्रोफेशनली पैकेजिंग, ब्राण्डिंग एवं मार्केटिंग जैसे कार्य अब राज्य की महिलाओं की जिम्मे होगी। जो इनकी आय में बढ़ोतरी में मील का पत्थर साबित होगा।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अलग पहचान बनाएगी झारखंडी महिलाएं 

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ते हुए हेमंत सोरेन ने बुधवार को एससी-एसटी व अल्पसंख्यक विभाग की SPV प्रेझा फाउंडेशन द्वारा संचालित चान्हो नर्सिंग कौशल कॉलेज की छात्राओं को नियुक्ति सौंपा। झारखण्ड की करीब 111 बेटियों को उन्होंने नियुक्ति पत्र सौंपा। इससे उनका आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रांची के चान्हो के अतिरिक्त चाईबासा, सरायकेला, साहेबगंज में भी बच्चियों को नर्सिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही ये भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएगी। 

75 करोड़ की आर्थिक मदद से आजीविका बनेगी सशक्त

ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी, सशक्त और आजीविका से जोड़ने की दिशा में हेमंत सरकार ने एक बड़ी पहल बीते 15 जून को की। उन्होंने राज्य की 50,000 सखी मंडलों को चक्रीय निधि के रूप में 75 करोड़ रुपये की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की। इसमें हर सखी मंडल को 15,000-15,000 रुपये अनुदान के रूप मिलेंगे। इससे सखी मंडलों से जुड़े करीब 6 लाख ग्रामीण महिला परिवारों को सीधा लाभ होगा। गांव की दीदियों को छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए सखी मंडल से पैसे मिल सकेंगे। उनके बीच लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। इससे उन्हें आजीविका को सशक्त में मदद मिलेगा। 

लॉकडाउन में भी महिलाएं बनी रही आर्थिक स्वावलंबन

लॉकडाउन के दौरान राज्य की महिलाएं काम से वंचित नहीं रही, इसके लिए भी मुख्यमंत्री ने विशेष योजनाओं को संचालित किया। इससे दो फायदे हुए – पहला राज्य में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहा।  और दूसरा, राज्य की महिलाओं को लगातार काम मिलता रहा। मुख्यमंत्री दीदी किचन, मुख्यमंत्री दाल-भात केन्द्र, विशेष दाल-भात केन्द्र में खाना बनाने का सारा ज़िम्मा इन्हीं महिलाओं को दिया गया था। साथ ही कोरोना से लड़ने के लिए मास्क और सैनेटाइजर बनाने का काम भी सखी मंडल की बहनों को दिया गया।जिससे लॉकडाउन जैसी विपदा में भी राज्य की महिलायें आर्थिक स्वावलंबन बनी रही।

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