श्रमिक

भाजपा ने छिनी रोज़गार – हेमंत स्वास्थ्य, सुरक्षा, राशन भत्ता, बीमा को सुरक्षित करते हुए दे रहे हैं मजदूरों को रोज़गार

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तीन श्रम सुधार विधेयकों से देश भर के मजदूरों का छिनेगा रोज़गार : विपक्ष 

मुख्यमंत्री सोरेन कई योजनाएं समेत संस्थाओं से एग्रीमेंट कर राज्य में रोज़गार कर रहे हैं सुरक्षित

रांची। केंद्र की मोदी सत्ता द्वारा पिछले दिनों बैक डोर से तीन श्रम सुधार विधेयकों को संसद में अनुमति दे दी गयी है। देश की तमाम विपक्षी पार्टियों सहित भाजपा की पैतृक संस्था राष्ट्रीय स्वसयंसेवक संघ के राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत मजदूर संगठन ‘भारतीय मजदूर संघ’ (आरएमएस) तक ने खुले तौर पर नए श्रम कानून का विरोध किया है। आरोप है कि इन कानूनों के मद्देनज़र मोदी सरकार की देश के श्रमिकों की रोज़गार छिनने की तैयारी है। 

वहीं दूसरी तरफ करीब 9 माह के शासन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के मजदूरों के रोज़गार सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाये हैं। राज्य सरकार की मंशा है कि झारखंड के श्रमिकों की रोज़गार सुनिश्चित होने के साथ साथ उनके परिवारों को भी बुनियादी सुविधा मिले। इसके लिए उन्होंने न केवल योजनाओं की शुरुआत की बल्कि कई संस्थाओं के साथ मजदूरों की सुरक्षा को लेकर करार भी किये। 

केंद्र की नई नीति से केवल कॉन्ट्रैक्ट पर ही श्रमिकों को जॉब्स मिलेगा वह भी हायरिंग-फायरिंग जैसे लटकी तलवार के साथ 

मोदी सरकार के श्रम सुधार विधेयक उनके चहेते पूँजीपतियों के लिए उपलब्धि हो सकती है। इस सरकार ने पूँजीपतियों के हित में श्रमिक सुरक्षा संबंधी तमाम बाधाएं खत्म दी है। नए प्रावधानों के तहत, अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियां बिना सरकारी इजाज़त के अब कर्मचारियों मन मुताबिक़ निकाल सकेगी । इस नए कानूनों के पास हो जाने कारण कंपनियों के लिए हायरिंग और फायरिंग करना आसान हो गया है।

इसके अलावा अब कर्मचारी यूनियनों के लिए श्रमिकों के हित में हड़ताल जैसे किसी प्रकार का आन्दोलन करना मुश्किल होगा। यही नहीं नए कानून के तहत पक्की नौकरी के बजाए कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स को बढ़ावा दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि ‘भाजपा सरकार अब ऐसा कानून लाई है जिससे मालिकों के लिए कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो गया है।

रोज़गार सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है हेमंत सरकार 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मोदी सरकार की नीतियों से इतर मज़दूरों के हित में अपनी नयी राह बनाते दीखते हैं। श्रमिकों के रोज़गार को सुरक्षित करने की दिशा में वह लगातार प्रयासरत देखे जा सकते हैं। उनके द्वाराइस दिशा में किये जाने वाली एक के बाद एक प्रयास साफ़ तौर पर इसकी पुष्टि करती है। लॉकडाउन के दौरान घर लौटे प्रवासी मज़दूरों के हित में मुख्यमंत्री के प्रयासों को भी झारखंड के मज़दूर वर्ग नहीं भूल सकते हैं।

झारखंड में एमओयू कर सेहत, राशन भत्ता और चिकित्सा बीमा कर मज़दूरों की सुरक्षा किया जा रहा है सुनिश्चित

मज़दूरों के हित में मुख्यमंत्री ने अंतरराज्यीय प्रवासी कानून को मज़बूती दी जिससे राज्य के बाहर काम की तलाश में जाने वालों झारखंडी मजदूरों को मिल सकेगी सुरक्षा। मुख्यमंत्री हेमंत सरकार ने इसी के तहत सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ जून 2020 को मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) किया है। एमओयू के तहत बीआरओ राज्य से 11815 श्रमिकों की भर्ती करेगा। इसकी अनुमति मज़दूरों की सुरक्षा और सेहत के शर्तों पर दी गयी है। साथ ही कम्पनी को यह भी सुनिश्चित करना पड़ा कि वह मजदूरों को तमाम लाभों के साथ राशन भत्ता, चिकित्सा बीमा भी मुहैया कराएगी। पूरे प्रकरण में दिचास्प बिंदु यह है कि मुख्यमंत्री सोरेन के यह कदम पूरे खेल से बिचौलियों का खात्मा करेगा। हालांकि, चीन सीमा पर बढ़े तनाव के कारण विधिवत तौर पर 1 दस्ता ही रवाना हो सकी है।

हेमंत की कोशिश है कि श्रमिकों को उनके घर के पास ही रोज़गार मिले 

जून माह में सीएम सोरेन द्वारा सभी जिले के डीसी को निर्देश दिया गया कि वे ग्रामीणों को रोज़गार उपलब्ध कराने हेतु तेजी से काम करें। साथ ही सभी डीसी को श्रमिकों की कुशलता पहचानने और क्षेत्र के उद्योगों की मानव संसाधन की जरूरत की मैपिंग तैयार करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के इस प्रयास से श्रमिकों को उनके घर के पास के उद्योगों में रोज़गार मिल सकेंगा। और  उद्योगों को उनकी जरूरत के आधार पर श्रमिक उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

मनरेगा के तर्ज पर शहरी श्रमिकों को रोज़गार देने की योजना की शुरूआत

हेमंत सरकार देश की पहली ऐसी सरकार बन गयी है, जिन्होंने शहरी क्षेत्र के मजदूरों को मनरेगा की तर्ज पर रोज़गार की गारंटी हेतु योजना लाँच की है। योजना का नाम है, “मुख्यमंत्री श्रमिक (शहरी रोजगार मंजूरी फॉर कामगार) योजना”। यह योजना मनरेगा की ही तरह शहरी कामगारों को कम से कम 100 दिन के रोज़गार की गारंटी देगी। रोज़गार मुहैया नहीं होने पर योजना में बेरोज़गारी भत्ता के भी प्रावधान हैं। 

लेबरनेट सर्विसेज रोज़गार के साथ चिकित्सा, स्वास्थ्य कराएगी मुहैया

बीते दिनों राज्य के मज़दूरों को रोज़गार मुहैया कराने की दिशा में नयी पहल करते हुए हेमंत सरकार के श्रम विभाग ने लेबरनेट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच एम.ओ.यू. किया। इसके तहत सरकार मज़दूरों को झारखंड में ही नहीं अपितु देश के किसी भी राज्य में रोज़गार उपलब्ध कराएगी। लेबरनेट सर्विसेज द्वारा मजदूरों की भर्ती श्रम कानून के अनुसार वेतन, चिकित्सा, स्वास्थ्य देखभाल और आवास मुहैया कराते हुए करेगी।

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