मोदी काल में अर्थवयवस्था चौपट, रघुवर के नाम घोटालों के अम्बार, लेकिन भाजपा की कसौटी पर आदिवासी-बहुजन नेता अयोग्य

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मोदी शासन के कुप्रबंध में देश की अर्थवयवस्था ध्वस्त, उसके मुख्यमंत्री स्वयं ही ख़त्म कर रहे अपने केस, रघुवर दास का दामन पर मैनहर्ट से मोमेंटम घोटाले से लेकर संतोषी के मौत का भार. लेकिन भाजपा की कसौटी पर उसके नेता योग्य केवल आदिवासी-बहुजन नेता अयोग्य  

राँची : देश भर में भाजपा फ़ासी संस्कृति के वाहक के रूप प्रसिद्धि पायी है. चूँकि इस दल की मानसिकता व विचारधारा मनुवाद-पुरुषवाद पर आधारित है, यह दल खुद को स्वयं शंभू मानती है. क्योंकि जातिवाद पर आधारित मनुवाद इन्हें स्वयं को भगवान मानने व बहुजनों को सेवक व दास की पंक्तियों में कतारबद्ध करने की इजाजत देती है. नतीजतन, भाजपा व उसके नेता स्वयं ही बहुजन या उसके लोकतांत्रिक नेताओं को सर्टिफिकेट या प्रमाणपत्र बाटने से उस स्थिति में भी नहीं चुकती, जहाँ वह स्वयं आकंठ गुनाहों के दल-दल में धसे हो.

ज्ञात हो, एक तरफ जो भाजपा देश बर में देशभक्ति के प्रमाणपत्र बाँटने से नहीं चुक रही थी वह आज देश द्रोह का क़ानून ख़त्म करना चाहती है. वही दूसरी तरफ भजपा आदिवासी-बहुजन नेताओं को अयोग्यता का प्रमाणपत्र बांटने पर तुली है. भाजपा का आदिवासी-बहुजन नेता अयोग्य कहने वाल चेहरा वैसे राज्यों सामने आया है जहाँ उसकी चुनावी हार हुई है और जनता उसे नकार चुकी है. और मामले में संघ (RSS) की चुप्पी से साफ़ प्रतीत होता है कि यह साज़िश उसके द्वारा ही रची गई है. ज्ञात हो, झारखण्ड के आदिवासी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पर लगातार भाजपा द्वारा अयोग्य का आरोप लगाया जा रहा है. चलिए भाजपा की ईमानदारी टटोलते हैं.

देश की अर्थव्यवस्था नीतियों के अक्स में वेंटिलेटर पर हो तो कैसे कोई प्रधानमंत्री हो सकता है योग्य

ज्ञात हो, भाजपा के दौर में देश की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर हो तो कैसे कोई प्रधान मंत्री योग्य हो सकता है? गरीब प्रवासी श्रमिक कुप्रबंधन के अक्स में पैदल चलते हुए सड़कों पर शहीद हो जाए, नोट बंदी के दौर में नोट बदलने के दौरान गरीब पंक्ति में शहीद हो जाये, तो प्रधान मंत्री क्कैसे योग्य हो सकता है? देश में महंगाई चरम पर हो, ऑक्सीजन के अभाव में जनता की मौतें हो, किसानों को उसके मंत्री के बेटा रौंद दे तो कोई प्रधानमंत्री कैसे योग्य हो सकता है? नोटबंदी-जीएसटी के अक्स में देश भर में मंदी हो और गृहमंत्री का पुत्र व उसके चहेते पूँजीपति मुनाफे में हो, तो कैसे कोई मनुवादी प्रधानमन्त्री योग्य हो सकता है? गंभीर सवाल?

रघुवर दास के नाम मैनहर्ट से मोमेंटम तक घोटाले -लम्हों की खता किताब तक लिखी गई, लेकिन भाजपा नेता योग्य 

झारखण्ड की पृष्टि भूमि – ज्ञात हो, रघुवर दास का नाम मैनहर्ट घोटाले से जुड़े हैं. इस घोटाले पर भाजपा के ही पूर्व नेता सरयू राय द्वारा ‘लम्हों की खता’ किताब तक लिखी गई है.जो झारखण्ड प्रदेश में योजनाओं की भ्रूण हत्या के उस पन्ने खोलती है. जिसके अक्स में झारखंडी उम्मीदों से खिलवाड़ कर खास बाहरियों को लाभ लाभ पहुंचाने का सच है. मोमेंटम झारखण्ड घोटाला, कम्बल घोटाला, पूल बना 24 घंटे में ढह गया, विधानसभा परिसर अस्तित्व में आते ही अपनी कमजोर बुनियाद की गाथा सुनाये. भूख से गरीबों की मौत -संतोषी जैसे झारखंडी बेटी ने भूख-भूख करते दम तोड़ दिया. अधिकारी को स्वयं ही क्लीन चीट दिए, 

ज्ञात हो, फर्जी डिग्री व कई घोटालों में नाम आने के बावजूद निशिकांत दुबे जैसे भाजपा नेता सुयोग्य कहलाते है. लेकिन, भाजपा के मनुवाद की कसौटी पर केवल बहुजन नेता अयोग्य हैं. आंकड़े तो यही बताते हैं. अयोग्यता का भार बाबूलाल मरांडी जैसे प्रथम मुख्यमंत्री को ढोना पड़ता है. क्योंकि वह आदिवासी नेता है. अयोग्यता का भार लालू यादव, बंधू तिर्की, अमित महतो जैसे बहुजन नेताओं को ढोना पड़ता है. झारखण्ड में करारी हार के अक्स में भाजपा अब यही प्रयास मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जैसे लोकतांत्रिक आदिवासी नेता के संदर्भ में करती दिख रही है. जो झारखण्ड को झारखंडियत के साथ देश से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में देश समेत राज्य के बहुजनों को एक हो भाजपा के इस साज़िश को समझते हुए माकूल जवाब देना ही चाहिए.

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