मनरेगा – हेमंत सरकार की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि

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सबसे बड़ी उपलब्धि

बड़ी उपलब्धि : आठ माह में 890 लाख मानव दिवस का सृजन, जिसमे 41.5 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी 

राँची। कोरोना कालखण्ड में झारखंड के ग्रामीण परिवारों को मनरेगा के तहत स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हेमंत सरकार द्वारा बीते आठ माह में 890 लाख मानव दिवस सृजन किया जाना बतलाता है कि यह सरकार राज्य के गरीबों के प्रति कितनी संवेदनशील है। ज्ञात हो कि इस वर्ष का लक्ष्य 900 लाख मानव दिवस का सृजन करना है। और सरकार 8 माह में ही कोरोना संकट के बावजूद लगभग पहुँच चुकी है। 

हेमंत सरकार ने भारत सरकार से 12.5 लाख मानव दिवस के लक्ष्य हेतु अनुरोध किया है, जिसे मार्च तक में प्राप्त करने पर जोर दिया जा रहा है। आठ लाख से अधिक मानव दिवस का सृजन करने बाद, मानव दिवस सृजन के मामले में देश भर में झारखंड का स्थान 7वां रहा। ज्ञात हो अब तक राज्य के कुल आठ लाख 77 हजार 682 नये परिवारों को जॉबकार्ड दिया गया है। जिसके जद में कुल 11 लाख 95 हजार 639 मज़दूर आए। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में झारखंड के लिए 2,74,184 लाख रूपये  व 800 लाख मानव दिवस श्रम बजट का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 

झारखंड सरकार मज़दूरी भुगतान में भी देश भर में अव्वल

मनरेगा मजदूरों को समय पर पारिश्रमिक प्रदान करने के मामले में झारखंड ने देश भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। समय पर मजदूरी भुगतान के लिये सरकार द्वारा रोज़गार अभियान चलाया गया। पंचायत स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन ने मनरेगा मजदूरों को एक सूत्र में बाँधा। रोज़गार अभियान से न केवल 35 दिनों के अंदर 140 लाख मानव दिवस सृजन हुआ, 82 हजार योजनाओं को समय पर पूरा भी किया गया। 

प्रवासी श्रमिकों के रोज़गार एवं आजीविका के लिए सरकार की यह पहल बना बड़ा सम्बल

कोरोना काल में मनरेगा योजना ने ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवार तथा प्रवासी श्रमिकों के लिए रोज़गार और आजीविका के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिरसा हरित ग्राम योजना, नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना और दीदी बाड़ी योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत करीब 26 हजार एकड़ भूमि पर 30 हजार से अधिक परिवारों के साथ बाग़वानी का कार्य किया जा रहा है। नीलाम्बर-पीताम्बर योजना के जरिये लगभग 80 हजार योजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है जबकि 1,50,210 योजनाओं पर कार्य जारी है। वहीं वीर शहीद पोटो हो खेल योजना के तहत 1805 योजनाओं पर कार्य जारी है।

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