मनरेगा से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मियों सहित मजदूरों को मिली भाजपा से नाइंसाफी, हेमंत ने दर्द कम करने का उठाया बीड़ा

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मंरेगा से जुड़े पदाधिकारियों के लिए खुशखबरी

वित्तीय वर्ष (2016-17, 2017-18और 2019-20 और 2020-21) में केंद्र ने मनरेगा से जुड़े मजदूरों की मजदूरी दर क्रमशः 1, 1 और 3 और 23 रूपये बढ़ाया 

हेमंत ने 274 से बढ़ाकर 300 करने का कर चूके हैं मांग

अब मनरेगा में अनुबंध में कार्यरत पदाधिकारियों व कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा और ईपीएफ का लाभ देने की घोषणा

रांची। राज्य के प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों से लाने की हेमंत सरकार ने न केवल सराहनीय पहल की. बल्कि उनके रोजगार की दिशा में भी काम किया। इन प्रवासी मजदूरों को काम से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने मनरेगा योजना को अपनी प्राथमिकता में रखा। उन्होंने योजना से 10 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य रखना बताय़ा। इस तरह मुख्यमंत्री ने मनरेगा कर्मियों सहित मजदूरों को इन संक्रमण के दौर में भी बेरोजगार नहीं होने दिया।

दूसरी तरफ पूर्व की प्रदेश भाजपा और केंद्र सरकार ने प्रदेश में योजना से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मियों सहित मजदूरों के साथ न केवल नाइंसाफी की, बल्कि अपने शासनकाल में मनरेगा कर्मियों की मजदूरी दर भी निम्न रखा। इसके अलावा संविदा पर कार्यरत कर्मियों, पदाधिकारियों को कई सुविधाओं से भी वंचित रखा। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब इन मनरेगा कर्मियों के दर्द को कम करने का बीड़ा उठायी है। उन्होंने न केवल सत्ता में आते ही मनरेगा मजदूरी दर में वृद्धि किया, बल्कि अब योजना में संविदा पर कार्यरत पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और ईपीएफ लाभ देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। 

भाजपा ने राज्य के मनरेगा मजदूरों के साथ किया नाइंसाफी

बता दें कि पूर्व के तीन वित्तीय वर्षों में केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य में मनरेगा मजदूरी दर काफी कम बढ़ायी थी। वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में यह दर केवल 1 रुपया के हिसाब से बढ़ी। जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में मात्र 3 रुपये ही बढ़ी थी। वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी दर 171 रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 194 रुपये की गयी। यानी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष मजदूरी दर में 23 रुपये की बढ़ोतरी हुई। इससे उलट राज्य में अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 274 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है, जिसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में कम से कम 300 रूपये करने का आग्रह किया है। श्री सोरेन ने पीएम से यह ही मांग की हैं कि मजदूरी दर बढने के साथ निर्धारित कार्य दिवस की सीमा को बढ़ाया जाए। 

सामाजिक सुरक्षा एवं ईपीएफ की सुविधा देने की हेमंत की घोषणा

अपने एक नये निर्णय में मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने मनरेगा अंतर्गत संविदा पर कार्यरत पदाधिकारियों/कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा एवं कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की सुविधा देने की घोषणा की है। उन्होंने इस बाबत कार्मिक के प्रस्ताव पर हरी झंडी दे दी है। अब योजना सह वित्त विभाग की सहमति मिलते ही यह लाभ इन कर्मियों को मिलने शुरू हो जायेंगे। बता दें कि मनरेगा अंतर्गत राज्य/क्षेत्रीय स्तर पर संविदा पर कार्यरत पदाधिकारियों/कर्मियों को ईपीएफ का लाभ नहीं मिलता है। ज्ञात हो कि संविदा कर्मियों द्वारा सीएम से सामाजिक सुरक्षा एवं ईपीएफ की सुविधा की मांग की जाती रही है। जिस पर हेमंत ने संज्ञान लिया है।

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