हेमंत सोरेन के ठोस देशहित सोच को केंद्र ने राष्ट्र के अहम निर्णय में दी प्राथमिकता

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देशहित सोच को केंद्र ने राष्ट्र के अहम निर्णय में दी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री सोरेन ने जनता से सुझाव ले केंद्र को पहले ही

  • 12वीं बोर्ड परीक्षा को टालने की दी थी सलाह
  • देशवासियों के लिए निःशुल्क वैक्सीनेशन की केंद्र से की थी मांग –

केंद्र द्वारा हेमंत सोरेन की देशहित सोच को राष्ट्रहित निर्णय में प्राथमिकता देना, दर्शाता है कि उनकी विचारधारा की पैठ जनता के नब्ज तक है

रांची: मानवता को संरक्षण देने वाली विचारधारा, सदियों के लिए पत्थरों में चुनवा दिए जाए, सात पर्दों में छुपा दिए जाए. उसकी रौशनी फिर भी मानवता तक अपनी पैंठ बना लेती है. उदाहरण – झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक आदिवासी होने के कारण, लोकतंत्र में उनकी मजबूत उपस्थिति को, जिस मनुवादी विचारधारा ने तवज्जो देने की कभी हिम्मत न जुटा पाई. उनकी उसी मानवतावादी सोच को मौजूदा दौर में, केंद्रीय सत्ता द्वारा अपने ढलान दौर को थामने की आस में, राष्ट्रहित निर्णयों में शामिल किया जाना, उपरोक्त कहावत की मूल भावना को सटीकता से दर्शाता है. 

देश की राजनीति में झारखंड के उस युवा मुख्यमंत्री के आंदोलनकारी विचारधारा की जीवंत उपस्थिति, राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा रहा है. चूँकि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में केंद्र से इतर कोई अपनी अलग सोच-पहचान नहीं बची है. मसलन, केंद्रीय राजनीति के तानाशाह कैनवास में, राष्ट्र पटल पर गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तुलना में, जनहित मुद्दों की अभिव्यक्ति के मद्देनजर मानवता के पक्ष में श्री सोरेन की आवाज बेबाक गूंजती है. उनकी विचारधारा जनता के उन अधिकारों का वकालत करती है, जिसकी मांग केंद्रीय सत्ता द्वारा 70 बरस को कोसने के बावजूद, अब भी होती आ रही है. 

हेमंत सोरेन की राय ने हमेशा ही जनहित के मर्म को छुआ है 

हालांकि, मोदी युग में कम देखा गया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों में जब कभी हेमंत सोरेन से बतौर मुख्यमंत्री राय मांगी गई. तो हेमंत सोरेन की राय ने हमेशा ही जनहित के मर्म को छुआ. मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा बढ़ाई. जिसे केंद्रीय सत्ता ने प्रत्यक्ष तौर पर तो नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से, खुद की राजनीतिक लाभ के लिए अपने निर्णयों में जरूर उतारा. ज्ञात हो, महज चंद दिनों पहले, केंद्र से CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा को टालने व देशवासियों की निःशुल्क वैक्सीनेशन की मांग मुख्यमंत्री सोरेन ने की थी. और केंद्र सरकार द्वारा दोनों मांगों को सलाह के रूप में स्वीकार किया जाना, मुख्यमंत्री के ठोस देशहित सोच पर मुहर लगाना माना जा सकता है. 

आम जन से सलाह लेकर हेमंत ने दी थी CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा टालने की सलाह 

23 मई 2021, CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा समेत अन्य कई परीक्षाओं के आयोजन को लेकर, चार केंद्रीय मंत्री व कई बड़े नेताओं की उपस्थिति में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक आयोजित हुआ था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जनता के विचारों को बेबाकी से बैठक में रखा गया. उन्होंने कहा कि जनता का मानना है कि तत्काल परीक्षा आयोजन से संक्रमण के फैलाव की आशंका है. ऐसे में परीक्षा आयोजित करना संकट को बुलावा देने जैसा होगा. मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत सोच भी संक्रमण की स्थिति में, मानसिक दबाव से जूझ रहे छात्र-छात्राओं के पीड़ा से मेल खा रहा था. 

हेमंत सोरेन की देश के लिए निःशुल्क वैक्सीनेशन की मांग पर केंद्र ने लगाई मुहर 

31 मई 2021, कोरोना वैक्सीन के सम्बन्ध में सीएम सोरेन द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा गया. सीएम के पत्र में देशहित सोच के मद्देनजर निःशुल्क वैक्सीनेशन की मांग की गयी थी. पत्र में यह भी जिक्र था कि कोरोना वायरस के प्रभाव को खत्म में, टीकाकरण ही एकमात्र कारगर विकल्प है. चूँकि, केंद्र की नीतियों के अक्स में राज्यों पर आर्थिक दबाव अधिक बढ़ा चूका है. ऐसे में राज्यों में तमाम लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित हो. इसके लिए केंद्र आगे बढ़कर निःशुल्क टीकाकरण की दिशा में कदम उठाये.

मसलन, देशहित में मुख्यमंत्री की मार्मिक सलाह पर केंद्र ने मुहर लगा दी है. और प्रधानमंत्री ने देश से कहा है कि वैक्सीन निर्माताओं से कुल उत्पादन का 75% हिस्सा खुद खरीद कर केंद्र राज्यों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराएगा.

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