मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड की बेटी को न्याय दिलाने को आतुर – जांच आयोग का गठन

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जांच आयोग का गठन

पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग को रूपा तिर्की मामले में, छह माह के भीतर सौंपनी है जांच रिपोर्ट – जांच के उपरान्त आएगा सच बाहर 

बीजेपी नेताओं ने कभी पीड़िता के घर जाकर तो कभी राज्यपाल से मिलकर सेंकी राजनीति रोटी  

रांची: आदिवासी समुदाय की बेटी रूपा तिर्की, कड़ी मेहनत कर पुलिस अधिकारी बनी. साहेबगंज में बतौर महिला थाना प्रभारी पदस्थापित भी हुई. लेकिन, 9 मई 2021 को न जाने किस गम में आत्महत्या कर ली. आदिवासी संस्थाओं द्वारा मामले में जांच की मांग हुई. चूँकि, झारखंड उस वक़्त महामारी से जूझ रहा था. मुख्यमंत्री दिन-रात झारखंडी जीवन रक्षा में व्यस्त थे. प्राथमिकता के दृष्टिकोण से शायद महामारी ने थोडा वक़्त ले लिया हो. लेकिन अनुसूचित जाति के बेटी को सरेआम जलाने वाली मानसिकता, भाजपा के पास अपनी बुझती लौ को बचाने के मद्देनजर बिलकुल वक़्त था. बाबूलाल जैसे चेहरे को आगे कर, मामले में पूरी ताक़त से उसके द्वारा राजनीतिक रोटी सेंकने के प्रयास हुए. 

ऐसा कैसे हो सकता है कि एक संवेदनशील मुख्यमंत्री, जिसे अपनी मिट्टी की मानसिक स्थिति का भली-भांति भान हो, उसमे अपनी बहन के लिए कोई वेदना न उमड़ी होगी. कैसे उसका मन शांत बैठता. मसलन, बहन रूपा तिर्की को न्याय दिलाने के मामले में, बतौर मुख्यमंत्री उस भाई ने, झारखंड के पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में, एक सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर ही दिया. यह आयोग अगले छह माह के भीतर रूपा तिर्की आत्महत्या मामले में जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा. जाहिर है, आदिवासी बेटी को न्याय दिलाने के मद्देनजर तत्काल गठित जांच कमेटी झारखंडी मुख्यमंत्री के जिम्मेदार भावना की मजबूत अभिव्यक्ति है. और एक बहन के प्रति एक भाई का फर्ज़ भी.

बीजेपी की राजनीतिक मंशा से इतर हेमंत की विचारधारा झारखंड में न्याय दिलाने का पक्षधर 

ज्ञात हो, कोरोना महामारी में झारखंडी जनता के जीवन रक्षा में फंसे मुख्यमंत्री की कसमसाहट का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता, कि उस दुखद दौर में वह खुद को किस परिस्थिति में फंसा पाए होंगे. जब एक तरफ देश ऑक्सीजन के अभाव में हांफ रहा था. झारखंड की गलियां एम्बुलेंस की चीख से गूँज रहा था. दूसरी तरफ केंद्र की कूटनीति व झारखंडी भाजपा नेताओं की मौकापरस्ती अपनी चरम पर था. मसलन, जनता के जीवन रक्षा की लाचारी में व्यक्तिगत रूप से वह मामले में केवल नजर बनाकर ही रख सकते थे. बतौर मुख्यमंत्री जहाँ हेमंत सोरेन का पूरा कार्यकाल न्याय का पक्षधर दिखता हो, वहां उस आदिवासी व्यक्तित्व के लिए रूपा तिर्की को न्याय दिलाना कितना अहम हो सकता है, समझा जा सकता है. 

झारखंड सहित अन्य राज्यों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके है विनोद कुमार गुप्ता

सब इंस्पेक्टर रूपा तिर्की की मौत के मामले की जांच के लिए, मुख्यमंत्री द्वारा किये गए एक सदस्यीय आयोग का गठन, झारखंड उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश विनोद कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई है. सीएम के आदेश पर जांच अधिनियम आयोग की धारा 3 के तहत इसकी अधिसूचना जारी की गई है. जहाँ यह आयोग आगामी 6 महीने के अंदर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा. न्यायाधीश रहे विनोद कुमार गुप्ता झारखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हों. जो जांच की गंभीरता समझने के लिए काफी हो सकता है.

बीजेपी शासन में केवल झारखंड, उत्तर प्रदेश में ही नहीं, देश भर में हुआ है बेटियों पर अत्याचार 

बहरहाल, जहाँ भाजपा शासन में देश भर में बेटियों के साथ अत्याचार हुए हों. रघुवर शासन में न्याय मांगने वाले बेटी के बाप को, न्याय की जगह बेईज्जती हासिल हुई हो. उत्तर प्रदेश में हुए अनुसूचित जाति के बेटी की लाश तक की बेईज्जती, देश अब तक नहीं भुला पाया होगा. वहां रूपा तिर्की के न्याय के लिए बीजेपी का घड़ियाल रुदन का सच आसानी से समझा जा सकता है. मसलन, बीजेपी के छलावे पर हेमन्त सोरेन का फिर एक बार कमेटी गठित कर किया गया जोर-दार प्रहार. झारखंड के प्रति उनकी स्पष्ट सोच को उजागर करता है.

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