स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री सोरेन की खींची लम्बी लकीर का एक शिरा गरीबी को छूता है तो दूसरा चिकित्सा व्यवस्था की दुरुस्तीकरण को

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चिकित्सा व्यवस्था की दुरुस्तीकरण को

फुटपाथ दुकानदार, अखबार हॉकर, दूध वाले आदि को टीकाकरण में प्राथमिकता, तो वहीं महामारी के तीसरी लहर की तैयारी के मद्देनज़र चिकित्सा अधिकारियों को दिया गया सेवा विस्तार  

मुख्यमंत्री के बेहतर रणनीति, बेहतर प्रबंधन व ईमानदार प्रयास ने दिखाया असर. कोरोना संक्रमण की रफ़्तार शहरी इलाके के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी थमा

रांची: प्रयास जितना नेक व ईमानदार होगा, असर उतना ही जादूगरी व अचंभित भरा हो सकता है. अल्प संसाधन व केंद्र के सौतेले रवैये के अक्स में, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माइक्रो प्रबंधन के आसरे चिकित्सा क्षेत्र समेत तमाम क्षेत्रों में, जिस बेहतर व ईमानदार रणनीति से लड़ा. उसका परिणाम अचंभित करने वाला रहा और आंकड़े के रूप में झारखंड को राहत दे रहा है. 

किसी पहलवान का अखाड़े में जीत का सच, उसके बेहतर तकनीक, तैयारी व जीतोड़ कसरत-मेहनत मे छुपे होते हैं. मसलन, झारखंड में कोरोना संक्रमण को लेकर मिले बेहतर परिणाम, चिकित्सा क्षेत्र में कोई सप्ताह-दो सप्ताह या आनन-फानन में किये गए प्रयास भर का परिणाम नहीं है. बल्कि पिछले डेढ़ माह में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किये गए अथक प्रयास का नतीजा है. 

शहरी क्षेत्रों में तो कोरोना संक्रमण की दर पहले ही कम हो गयी थी और झारखंड रिकवरी रेट के मामले में देश में प्रथम पायदान पर खड़ा भी है. लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण तो यह है कि अब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण को रोकने में कामयाबी पा चुकी है. ज्ञात हो सरकार ने जिस प्रकार ग्रामीण झारखंड में फैले संक्रमण को थामने के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र को झोंक दिया था. वह निश्चित रूप से आम जनता की जीवन रक्षा के प्रति मुख्यमंत्री की गंभीरता को दर्शाता है.

उपलब्धि की ख़ुशी मनाने के बजाय, मुख्यमंत्री ने विकल्प तलाशने को बढ़ाया आगे कदम

मुख्यमंत्री, उपलब्धि की ख़ुशी मनाने के बजाय, ढोल पीटने के बजाय, विकल्प तलाशने की दिशा में आगे कदम बढ़ा दिया है. ज्ञात हो, हेमंत सोरेन ने तीसरी लहर की तैयारी अभी से शुरू कर दी है. एक तरफ जिलों के अस्पतालों को covid-19 से लड़ने के लिए तकनीक से लैस करने जैसी ठोस तैयारी कर रहे हैं. तो दूसरी तरफ. भविष्य में कोरोना की लड़ाई में डॉक्टर की कमी ना हो, इसके लिए उन्होंने चिकित्सकों की सेवा अवधि में 6 माह का विस्तार दिया है. 

चूँकि, मुख्यमंत्री की स्वास्थ्य व्यवस्था की लकीर आम गरीब जन तक पहुँचती है. इसलिए वह किसी प्रकार का रिस्क लेना नहीं चाहते. ज्ञात हो, राज्य सरकार ने आमजन की चिंता करते हुए, फुटपाथ दुकानदारों, अखबार हॉकर, ठेला-रेडी, फल-सब्जी बेचने वाले जैसे गरीब, जो अपनी रोजी के लिए झारखंड के पहिए को विपरीत परिस्थितियों में भी गति देने से पीछे नहीं हटते. उन्हें कोरोना टीकाकरण में प्राथमिकता दे मुख्यमंत्री ने न केवल संवेदनशीलता बल्कि सुक्ष्मदर्शिता का परिचय दिया है.

टीकाकरण के मामले में हाई रिस्क ग्रुप की पहचान कर सीएम ने दिया सूक्ष्मदर्शी होने सबूत  

लोगों के ज्यादा संपर्क में आने वाले वर्ग को टीकाकरण में प्राथमिकता देना, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सूक्ष्मदर्शी होने का सबूत है. हाई रिस्क ग्रुप की पहचान से साबित होता है कि मुख्यमंत्री का निर्णय राज्य की जरूरत को समर्पित होता है, न कि वोट बैंक की राजनीति. हाट, बाजार, सब्जी मंडी, फुटपाथ में दुकान लगाने वाले, किराना दुकानदार, टैक्सी, ऑटो व रिक्शा चालक, पेट्रोल पंप कर्मचारी, सामानों की होम डिलीवरी करने वाले व अखबार हॉकर आदि की टोह लेना दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सबके हैं. सीएम के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा जिलों के डीसी को निर्देश जारी कर दिया है.

मार्च 2022 सेवानिवृत्त होने वाले 59 चिकित्सकों को मिलेगा सीधा फायदा 

कोरोना वारियर के रूप में, पहली पंक्ति में जंग लड़ रहे चिकित्सकों को लेकर आया महत्वपूर्ण फैसला, कोरोना के तीसरी लहर के प्रति सीएम की चेतना को दर्शाता है. ज्ञात हो, मुख्यमंत्री के महत्वपूर्ण फैसले से झारखंड में मार्च 2022 तक कोई भी डॉक्टर सेवानिवृत्त नहीं होंगे. यानी 2021 से मार्च 2022 के बीच सेवानिवृत्त हो रहे चिकित्सकों को मुख्यमंत्री ने 6 से 10 माह तक का अवधि विस्तार दिया है. संक्रमण की परिस्थितियों की गंभीरता को समझते हुए सीएम ने स्वास्थ्य विभाग के सम्बंधित प्रस्ताव पर हरी झंडी दी है. 

मुख्यमंत्री के निर्णय से झारखंड स्वास्थ्य सेवा के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक संवर्ग वाले चिकित्सकों को सीधा फायदा होगा. ज्ञात हो, राज्य में गैर शैक्षणिक संवर्ग के चिकित्सकों के स्वीकृत पद 2316 है, लेकिन इनके विरुद्ध 1597 चिकित्सक ही उपलब्ध हैं. और शैक्षणिक संवर्ग के स्वीकृत 591 पदों के विरुद्ध 285 चिकित्सक ही कार्यरत हैं. इसमें से अगले एक वर्ष में शैक्षणिक संवर्ग व चिकित्सा से क्रमशः 44 और के 15 चिकित्सक सेवानिवृत्त होने वाले थे. 

ग्रामीण क्षेत्रों में, ‘ग्राम स्तर पर सर्वे एवं रैपिड एंटीजन जांच कार्यक्रम’ के तहत लड़ा जा रहा है संक्रमण से

चिकित्सा के क्षेत्र में हेमंत सरकार की खीची गयी लंबी लकीर, शहरी क्षेत्र के जीत के समतुल्य अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी उसी ताक़त से जोर लगा रही है. सीएम का टारगेट है कि कोरोना संक्रमण ग्रामीण क्षेत्र में विस्तार न पा सके. इस बाबत ग्राम स्तर पर सर्वे एवं रैपिड एंटीजेन जांच कार्यक्रम’ की ऑनलाइन शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा हुई है. इस कार्यक्रम में मुखिया, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, एएनएम, जेएसएलपीएस की दीदियां, सहिया सहित अन्य फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स के सहयोग से ग्रामीण इलाकों में संक्रमण को रोकने का प्रयास किया जा रहा है. 

झारखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र में खींची गयी लंबी लकीर का ही परिणाम है कि आज झारखंड की स्थिति देश भर में बेहतर है 

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, मुख्यमंत्री द्वारा खींची गयी लंबी-मोटी लकीर का ही परिणाम है कि संक्रमण नियंत्रण के मामले में, झारखंड की स्थिति देश के कई समृद्ध और अग्रणी राज्यों की तुलना में बेहतर है. अगर आंकड़ों से तुलना करें, तो बीते 1 मई को राज्य में 31295 सैंपल की जांच में 20.20 प्रतिशत संक्रमण की दर के साथ कुल 6323 मरीज मिले. जबकि, 28 मई तक 56,674 सैंपल की जांच में महज 1.21 प्रतिशत की दर से 687 संक्रमित मरीज ही मिले. यानी राज्य में 1 मई की पॉजिटिविटी रेट, 20.20% 28 मई को घटकर महज 1.21 % ही रह गयी. मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा है कि हर हाल में राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है.

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