गरीबी मुक्ति की दिशा में झारखंड हेमंत शासन में चीन की भांति बढ़ चला है आगे

Share on facebook
Share on telegram
Share on twitter
Share on whatsapp
चीनी मामलो के विशेषज्ञ, जे एन यू में प्रोफेसर व लेखिका रितु अग्रवाल की कवर स्टोरी चीन, अब गरीब मुक्त, में निम्न 5 वजहें।

चीनी मामलो के विशेषज्ञ, जे एन यू में प्रोफेसर व लेखिका रितु अग्रवाल की कवर स्टोरी चीन, अब गरीब मुक्त, में निम्न 5 वजहें। 

  • 1. गांव के बुनियादी ढांचे में सुधार किया गया।
  • 2. कृषि को बाजार से लिंक किया गया।
  • 3. ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया गया।
  • 4. शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई ।
  • 5. राजनीतिक कैडर की जवाबदेही तय की गई।

चीन ने यह साबित किया कि राजनीतिक कैडर का इस्तेमाल लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और गरीबी को दूर करने में कितनी कारगर हो सकती है। चीनी नेतृत्व की आइडिया का सफलता का कारण इसलिए भी है, क्योंकि राजनीतिक कार्यकर्ता में गाँव के स्थानीय लोगों की भाषा, उसकी परंपरा, सामाजिक ताने-बाने जैसे तमाम आयामों की समझ होती है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम पहलुओं की मैपिंग करना आसान हो जाता है। यही कारण रहा कि 1990, चीन में गरीबी 66.30% थी, जो आज घट कर महज 0.3% रह गई है।

हालांकि, एक बार बीजेपी नेता, सुशील मोदी ने कहा था कि भारत को चीन से सीखना चाहिए। लेकिन अफ़सोस गरीबी उन्मूलन की दिशा में उनका वक्तव्य केवल राजनीतिक स्टंट बनकर रह गया। नारे लगाए जाते रहे और भाजपा के 6 वर्षों के कार्यकाल में देश की बिक्री ही असल सच के रूप में सामने आया। ऐसा नहीं है भाजपा शासित राज्यों की स्थिति देश से इतर है। भाजपा शासन में झारखंड जैसे गरीब राज्य का सच लूट और कर्ज के रूप में आज हमारे सामने है। लेकिन, झारखंड की मौजूदा हेमंत सत्ता का सच उस राह से जरुर जुड़ाव बनाता दिखता है। जिस रास्तों पर चल चीन ने गरीबी से मुक्ति पायी।

गाँव मजबूत होगा तो शहर मजबूत होगा, और शहर मजबूत होगा तब देश मजबूत होगा : हेमंत सोरेन 

ज्ञात हो,  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कई मंचों से “गाँव मजबूत होगा तो शहर मजबूत होगा, और शहर मजबूत होगा तब देश मजबूत होगा” जैसे वक्तव्य दे इसी समझ को उभारते आये हैं। हेमंत सरकार नीतियां व उनकी तमाम योजना भी इसी मंशे को फलीभूत करते दिखते हैं। जिसके अक्स में गांव के बुनियादी ढांचे में सुधार। कृषि को बाजार से लिंक। ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश। शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणात्मक वृद्धि। झामुमो कैडर की जवाबदेही तय। जैसे तमाम आयाम साफ़ देखने को मिलते हैं।


ग्राम सभा की मजबूती। निजी क्षेत्र में स्थानीयों को 75 प्रतिशत आरक्षण। बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता। झामुमो युवा कार्यकर्ताओं को सामाजिक कार्यों व लोक समस्याओं की मैपिंग जैसे कार्यों का भार देना इस कड़ी का हिस्सा भर है। बंद पड़े उद्योगों में फिर से जान फूंकने की कवायद। उद्योगों को बढ़ावा के लिए स्थानीय संसाधनों को छानना। खनन के अलावे पर्यटन में संभावनाएं तलाशना। हर जिले में एक ऐसा प्रोडक्ट का चयन जिसे निर्यात किया जा सके। फूलो-झानो, बिरसा हरित ग्राम योजन, मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना, रोजगार सृजन योजना, रेल परियोजना  से जिलों का जुड़ाव, नयी शिक्षा नीति 2020, लाह खेती को कृषि का दर्जा, आदि इसी मंशे को उगाजर करती है

Leave a Replay

DON’T MISS OUT ON NEW POSTS

Don’t worry, we don’t spam. Click button for subscribe.