कोरोना संक्रमण से बेसहारा हुए परिवार को देगी हेमन्त सरकार सामाजिक-आर्थिक मदद

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बेसहारा हुए परिवार को देगी हेमन्त सरकार सामाजिक-आर्थिक मदद

स्वास्थ्य विभाग झारखंड ने सभी डीसी को मृतक परिवारों की सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करने का दिया निर्देश. आंकड़ों का कल्याणकारी योजनाओं के नीति-निर्माण में होगा उपयोग. पहले भी संक्रमण से अनाथ हुए बच्चों सुध ले चुके है सीएम हेमन्त 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर ने कुल 3983 लोग को लील लिया. इन तमाम परिवारों को मिल सकेगा सामाजिक-आर्थिक लाभ 

रांची : देश के कैनवास में, कोरोना संक्रमण ने कई परिवारों को सामाजिक-आर्थिक व मानसिक नुकसान झेलने को मजबूर किया है. कई परिवारों में कमाने वाले एक था, वह भी काल के मुंह समा गया. उनके चले जाने से कई परिवार बेसहार हो चुके हैं. मौजूदा दौर में उन परिवारों के समक्ष घोर अँधेरा के सिवाय कुछ नहीं शेष बचा है. और जहाँ कल तक बच्चों के जीवन में किलकारियां-हंसी थी. अब उनका भविष्य धुल कर कोरा हो गया है. लेकिन, झारखंड से सुकून देने वाली खबर बाहर आयी है. इनकी वेदना फिर एक बार मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने महसूस किया है. जहाँ, उन्होंने ऐसे तमाम परिवारों की सुध लेते हुए सामाजिक-आर्थिक मदद पहुंचाने की मानवीय पहल की हैं.

ज्ञात हो, हेमन्त सरकार ने ऐसे पीड़ित परिवारों के लोगों की सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है. जिसके अक्स में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों के डीसी को, तत्काल पीड़ित परिवारों की सर्वेक्षण कर आंकड़े जुटाने का निर्देश दिया गया है. सर्वेक्षण के उपरान्त सरकार प्राप्त आंकड़ो का प्रयोग राज्य में पीड़ित परिवार के कल्याण के मद्देनजर, कल्याणकारी योजनाओं के नीत-निर्माण में करेगी. सरकारी आंकड़ो के मुताबिक संक्रमण से कुल 3983 लोग मौत हुई है. मसलन, मुख्यमंत्री के विशेष पहल से इन 3989 मृतक के परिवारों के लोगों को मदद मिलेगी. जिससे इनके हताश जीवन में फिर से आशा की किरण दिखेगी. और ये अपने सपनों की ओर फिर से अग्रसर हो पायेंगे.

नोट:  कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य सवारने की दिशा में पहले ही मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने फैसला लिया है. जिसकी मुरीद हो केंद्र समेत कई राज्यों ने भी ऐसे फैसले लिए हैं. 

पीड़ित परिवार की जरूरतों को ध्यान में रख सर्वेक्षण दल एकत्रित करेगा आंकड़ा 

पीड़ित परिवार के लोगों के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक सर्वेक्षण दल का गठन किया जायेगा.  सर्वेक्षण दलों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के जिला स्तरीय सर्विलांस चिकित्सा पदाधिकारी या अन्य डेवलपमेंट पार्टनर का सहयोग मिल सकेगा. गठित दल का सर्वेक्षण पीड़ित परिवार की जरूरतों पर केन्द्रित होगा. जिससे सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत गोल्डन कार्ड, परिवारों की अन्य मूल-भूत समस्याओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी मिल सकेगी. जिससे सरकार उनकी समस्याओं से सम्बंधित योजनाओं का नीति-निर्माण कर सकेगी. 

अनाथ बच्चो के भविष्य सवारने की प्रथम पहल भी कर चुके है मुख्यमंत्री सोरेन 

वैसे तो महामारी से पीड़ित लोगों को मदद पहुंचाने की पहल सीएम हेमंत सोरेन संक्रमण काल से करते आ रहे हैं. ज्ञात हो, महामारी में माता-पिता खो चुके बच्चों की उचित देखभाल सुनिश्चित हो. इस सम्बन्ध में, देश में सर्वप्रथम फैसला लेने वाले भी मुख्यमंत्री है हेमन्त सोरेन. जिससे अभिभूत हो बाद में केंद्र समेत कई राज्यों ने ऐसे कदम उठाये. सीएम के फैसले से अनाथ बच्चे शोषण या बाल तस्करी से बच सकेंगे और अपनी शिक्षा जारी रख राज्य-देश के भविष्य लिखेंगे. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन द्वारा चाइल्ड केयर हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है.

अनाथ बच्चों को देखभाल करने वाले रिश्तेदारों को मिलेगा मासिक प्रोत्साहन सहायता, या फिर चिल्ड्रन केयर होम करगा देखभाल 

सीएम हेमंत सोरेन का फैसला – यदि परिवार में कोई सदस्य अनाथ बच्चे की इमानदारी से देखभाल करने का जिम्मा उठता है, तो देखभाल करने के बदले उन्हें मासिक प्रोत्साहन सहायता मिलेगा. ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति के सदस्य संबंधित घर का दौरा कर सर्वेक्षण करेंगे कि बच्चा उनके साथ सुरक्षित होगा या नहीं. कोई केयरटेकर उपलब्ध न होने की स्थिति में, बच्चों को सरकार द्वारा चलाए जा रहे चिल्ड्रन केयर होम ले जाया जाएगा, जहाँ उनकी देखभाल सुनिश्चित की जाएगी. इसके अलावा यह हेल्पलाइन उन बच्चों को भी अस्थायी सहायता देगी, जिनके माता-पिता अस्पताल में इलाजरत हैं.

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