बाबूलाल मरांडी का सफेद झूठ बनी अखबारों की सुर्खियां

बाबूलाल को अब कैसे बताएं, “जिस नाव पर सवार हो रहा भाजपाइयों का बेड़ा पार, वहीं बन रहा आज भ्रष्टाचार का शिकार”

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  • अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर निर्माण में खरीदे जमीन पर लग रहे कथित तौर पर बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप।
  • लगे आरोप को बाबूलाल बता रहे कतिपय लोगों का स्वार्थ, पर जेएमएम के सवालों का उनके पास कोई जवाब नहीं। 

राम मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच अयोध्या में तैयार होगा भव्य राम मंदिर,साफ है कि 2024 का लोकसभा चुनाव भी भाजपा मंदिर मुद्दे पर ही लड़ेगी

रांची। भाजपा नेताओं के लिए इसके शर्म की बात और क्या हो सकती है कि जिस मुद्दे को लेकर उनका हमेशा चुनावी बेड़ा पार होता रहा है, वहीं आज भ्रष्टाचार का शिकार बन रहा है। दरअसल अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य राममंदिर निर्माण के लिए ज़मीन ख़रीद में कथित तौर पर बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोप तो समाजवादी पार्टी के नेता सह पूर्व विधायक तेजनारायण पांडेय उर्फ़ पवन पांडेय और आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लगाया है, पर बचाव में उतर गये हैं दलबदलू और बिना सिंद्धात वाले नेता बाबूलाल मरांडी। हालांकि सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूछे सवाल पर उनके पास कोई जवाब भी नहीं है। बता दें कि सपा और आप नेता के मुताबिक ‘2 करोड़ रुपये में ख़रीदी गई ज़मीन महज़ कुछ मिनटों बाद 18.5 करोड़ रुपये में ख़रीदी गई है।’ यानी खरीदी गई भूमि मामले में कथित तौर पर 16.5 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। 

बाबूलाल यह जवाब नहीं दे पाये, आखिर 5.79 लाख की सर्किल रेट वाली ज़मीन 5 मिनट पहले 2 करोड़ में कैसे बिकी? फिर 18.5 करोड़ की कैसे हो गयी

जैसे ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में ट्रस्ट के अधिकारियों द्वारा घोटाले और भ्रष्टाचार की बात सामने आयी, वैसे ही बाबूलाल मरांडी अपने नेताओं के बचाव में उतर गये। उन्होंने लिखा कि “अयोध्या में बन रहे प्रभु श्री राम का मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ी है। मंदिर निर्माण में जुटी श्री रामतीर्थ के समस्त कार्यकारिणी अत्यंत विश्वसनीय हैं। मंदिर के बगल की जमीन से जुड़े निरर्थक चर्चाओं को स्वार्थवश और फर्जी दस्तावेजों के साथ कुछ लोगों के द्वारा कुप्रचारित किया जा रहा है।“ हालांकि बाबूलाल बचाव की मुद्रा में तो आ गये हैं, लेकिन कथित तौर पर लगे घोटाले पर जेएमएम के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे। जेएमएम ने कहा कि अब भगवान श्री राम मंदिर निर्माण में हुई चोरी और चोरों को बचाने में लग गए, बाबूलाल। और कितना गिरेंगे आप? एक राजस्व कर्मचारी भी यह गड़बड़ी बता सकता है कि 5.79 लाख की सर्किल रेट वाली ज़मीन 5 मिनट पहले 2 करोड़ में कैसे बिकी? और पांच मिनट बाद 18.5 करोड़ की कैसे हो गयी। 

*सपा, आप सहित कांग्रेसी नेताओं ने इसे करोड़ो हिंदुओं की भावना के साथ खेलवाड़ बताया।*

आप पार्टी के सांसद ने रविवार को मीडिया को बताया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये की जमीन को राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा 16.5 करोड़ रुपये की अधिक राशि देकर 18.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई। संजय सिंह की मानें, तो यह राम भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने पूरे मामले में राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही प्रधानमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। इससे पहले सपा नेता कमोवेश इसी तरह का आरोप लगाक सीधे-सीधे इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बताया था। साथ ही मामले की सीबीआई जांच तक की मांग कर दी थी। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी इसे देश के करोड़ हिंदुओं के भावना से खेलवाड़ करने की बात कहीं। कांग्रेसी नेताओं ने ट्वीट कर बताया कि “हे राम,ये कैसे दिन… आपके नाम पर चंदे लेकर घोटाले हो रहे है। बेशर्म लुटेरे अब आस्था बेच ‘रावण’ से अहंकार में मदमस्त हैं। सवाल है कि 2 करोड़ में ख़रीदी ज़मीन 10 मिनट बाद ‘राम जन्मभूमि’ को ₹18.50 करोड़ में कैसे बेची? अब तो लगता है…कंसो का ही राज है, रावण हैं चहुं ओर!”

2024 का चुनाव भी राममंदिर के नाम पर पार करना चाहती हैं मोदी सरकार

बता दें कि जिस राममंदिर निर्माण काम में जमीन घोटाले को लेकर आरोप लग रहे हैं, भाजपा नेता पिछले सात दशक से तो इसी मंदिर के नाम पर राजनीति कर रही हैं। बात चाहे 1992 के बाद से लेकर 1998 के लोकसभा चुनाव की करें, या 2014 और 2019 की, सभी में भाजपाइयों ने राममंदिर के नाम पर ही हिंदुओं से वोट मांगा है। अब 2024 के लोकसभा चुनाव के जीत की सोच भी भाजपा नेता इस मंदिर से कर रहे हैं। बीते दिनों ही राममंदिर निर्माण ट्रस्ट ने कहा है कि मंदिर निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। भव्य राम मंदिर के निर्माण में 36 महीने का वक्त लगेगा। ऐसे में दिसंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच भव्य राम मंदिर अयोध्या में बनकर तैयार हो जाएगा। वहीं इसी अवधि में (मार्च-मई 2024) में लोकसभा चुनाव होना है। साफ है कि 2024 में ही भाजपा राममंदिर को चुनावी मुद्दा बनाएगी। लेकिन इससे पहले ही मंदिर निर्माण काम में भ्रष्टाचार का आरोप लगना इनकी नीति को भी स्पष्ट करता हैं।

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