पेगासस जैसे ख़ुफ़िया आँखों के दौर में पत्रकारों के जीवन को लेकर मुख्यमंत्री संवेदनशील, बीमा योजना को लेकर सरकार कृत संकल्पित

पत्रकारों के जीवन को लेकर मुख्यमंत्री संवेदनशील

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पेगासस जैसे ख़ुफ़िया आँखों के दौर में पत्रकारों के जीवन को लेकर संवेदनशील. पत्रकारों की बीमा योजना को लेकर राज्य सरकार कृत संकल्पित

  • सरकार पत्रकारों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने को कृत संकल्पितः शशि प्रकाश सिंह
  • स्वास्थ्य बीमा को लेकर पत्रकारों ने दिये अहम सुझाव
  • सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय में तमाम पत्रकारों संग बैठक

रांची. पहले अंडरवर्ल्ड के कठघरे में या उग्रवाद के कठघरे में पत्रकार मारा जाता था. वह दौर पीछे छूट गया. अंडरवर्ल्ड की जड़ों को नापते-जोखते पत्रकार कब सरकार के निशाने पर चढ़ गए उसे पता ही नहीं चला. चूँकि अधिकांश मीडिया संस्थान उस सरकार की गोद में जा बैठी और पत्रकारिता संस्थान के प्रोपेगेंडा का परिक्रमा करने को विवश हो गया. ऐसे में झटके में ज़मीनी  पत्रकार पत्रकारिता से पृथक हो गए.  

तमाम परिस्थितियों के बीच पत्रकार पेगासस जैसे न जाने कितने सरकारी ख़ुफ़िया आँखों के निशाने पर आ चुके हों. और पत्रकारों के जीवन कठिन हो चला हो. ऐसे में झारखण्ड जैसे राज्य के मुख्यमंत्री पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा की बात करे तो मौजूदा दौर में किसी संजीवनी से कम नहीं.

सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के निदेशक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मीडिया कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना चाहते हैं. इसके लिए सरकार सभी मीडिया कर्मियों से उनका मंतव्य लेना चाहती है. और इसे लेकर सरकार कृत संकल्पित है. स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रारूप के संबंध में आयोजित मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहे तो उस मुख्यमंत्री की राज्य के पत्रकारों के प्रति संवेदनशीलता समझी जा सकती है.

बीमा राशि 10 लाख रुपये तक करने के सुझाव व आंचलिक क्षेत्रों के पत्रकारों को जोड़ने पर बल 

इसे लेकर बैठक में दो बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था, जो निकटवर्ती राज्यों में मीडिया कर्मियों के स्वास्थ्य बीमा का कार्य कर रहे हैं. उन्होंने मीडिया कर्मियों को बीमा कंपनी अथवा बीमा की शर्तो से संबंधित सुझाव निदेशालय के साथ साझा करने को आमंत्रित किया गया था. राज्य सरकार के तरफ से कहा गया कि जल्द ही स्वास्थ्य बीमा की नियमावली तैयार कर ली जाएगी. उसके बाद एक बार फिर पत्रकारों से इसपर मंतव्य लिया जाएगा  तत्पश्चात इसे लागू कर दिया जायेगा.

बैठक में पत्रकारों ने अपने सुझाव दिये. सुझावों में मुख्यता बीमा प्रीमियम नहीं लेने या कुल प्रीमियम का 10% राशि तय करने को कहा गया. वहीं बीमा योजना से शहर सहित आंचलिक क्षेत्रों के पत्रकारों को भी जोड़ने पर बल दिया गया. साथ ही बीमा की राशि 10 लाख रुपये तक करने का भी सुझाव दिया गया.

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