#Corona2ndWave : केंद्र का झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार नहीं थम रहा, स्वास्थ्य सुविधाएं समेत आर्थिक मदद में भी केंद्र कर रही है निम्न स्तर की राजनीति

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सौतेला व्यवहार नहीं थम रहा

कोरोना से निपटने के लिए झारखंड को मिले मात्र 227 करोड़, जो पर्याप्त नहीं, पहले वैक्सीन और अब सहयोग न करना, जाहिर करती है केंद्र का सौतेला व्यवहार आधारित गन्दी मंशा 

अन्य राज्यों को ऑक्सीजन आपूर्ति में झारखंड आगे, केंद्र के इशारे पर गुजरात हेमंत सोरेन की मांग को कर रहा नजरअंदाज 

रांची। कोरोना वायरस की पहली लहर में ही पस्त हो चुकी देश की अर्थव्यवस्था दूसरी लहर में पूरी तरह से रेंग रही है. जहाँ झारखंड सहित तमाम राज्यों में अर्थव्यवस्था उबरने से पहले ही इस दूसरी लहर ने बुरी तरह नुकसान पहुंचा है. यह महामारी हमारे लोगों की जिंदगीयां लगातार तेज रफ़्तार से छीन रही है. ऐसे में संघीय व्यवस्था के मद्देनजर केंद्र का दायित्व है कि वह तमाम मतभेदों को भूल  राज्यों को हर स्तर पर आर्थिक व स्वास्थ्य सहायता पहुंचाये. लेकिन केन्द्रीय सत्ता अपनी मानसिकता के अनुरूप झारखंड जैसे गरीब राज्य के साथ सौतेला व्यवहार रघुवर सरकार के दरकिनार दौर से निरंतर जारी है. जो महामारी के दौर में भी थमने का नाम नहीं ले रहा.

रघुवर दरकिनार दौर से शुरू हुआ केन्द्र का झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार महामारी के दौर में थमने का नाम नहीं ले रहा 

ज्ञात हो, 29 दिसंबर 2019, हेमंत सरकार के कमान संभालते ही कोरोना महामारी के पहले चरण ने दस्तक दिया. जिसे केंद्र ने सत्ता के चाहत में फैलने दिया था. जिसके अक्स में गैर भाजपा शासित राज्यों को, ख़ास कर झारखंड जैसे चारागाह राज्य को मदद पहुंचाने के बजाय, बदले की राजनीति की भावना के साथ हेमंत सरकार को परेशान करना शुरू किया. रघुवर सरकार की मदद से झारखंडी अस्मिता से समझौता करने में कामयाब केंद्र, हेमंत सत्ता से रघुवर सत्ता के पापों का हिसाब डीवीसी बकाये के नाम पर करोड़ों रुपये की कटौती कर चुकाती रही. और खुले तौर पर जीएसटी क्षतिपूर्ति बकाया के भुगतान करने से मुकर जाना भी इसी मंशे का रूप हो सकता है.

कोल ब्लॉक नीलामी के नाम पर झारखंड के संसाधनों को कॉर्पोरेट मित्रों को लूटाने और राज्य को आर्थिक पंगु बनाने की साजिश इसी दौर में रचा गया. लेकिन तमाम समस्याओं से जूझते हुए मुख्यमंत्री ने झारखंडी जनता को तकलीफों से बचाए रखा. और अब जब हम महामारी के दूसरे चरण को जी रहे हैं, तो आपदा के नाम पर केंद्र द्वारा मात्र 227 करोड़ की आर्थिक मदद झारखंड देना, एक बार फिर उसी गंदे मंशे को दर्शा सकता है. क्योंकि सुरक्षा के मद्देनजर यह राशि काफी कम है। इसी तरह स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर मांगे गए मदद पर भी केंद्र का अबतक झारखंड को कोई मदद नहीं मुहैयान कराना, उसी मंशे को पुख्ता करता है.

सवा तीन करोड़ जनता को मदद देने के लिए 227 करोड़ की राहत पर्याप्त नहीं 

संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देख केंद्र ने झारखंड को 227 करोड़ रुपये की जो आर्थिक मदद दी है, जो सवा तीन करोड़ की जनसंख्या को देखते हुए काफी नहीं है। पहले ही संक्रमण रोकने के लिए लगी पाबंदियों के कारण सरकार के आर्थिक संसाधन पर गहरी चोट पहुंची है. ऐसे में राजस्व की कमी से झारखंड बुरी तरह से जूझ रहा है. स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर भी केंद्र की भेदभाव नीति तमने का नाम नहीं ले रहा है. विशेषकर वैक्सीन के नाम पर तो केंद्र की भेदभाव नीति अपनी चरम पर है। केंद्र की ओछी राजनीति का ही परिणाम है कि 1 मई से 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीन लगने की शुरुआत झारखंड में अबतक नहीं हो सकी है.

न रेमडेसिविर खरीदने में दे रही सहयोग, न मेडिकल इक्विपमेंट को लेकर ही मिल रहा है सहयोग

ओछी राजनीति का रूप तो केंद्र की उस पहल पर ही दिख गया, जिसमें बांग्लादेश से रेमडेसिविर खऱीदने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय मंत्री से विन्रम निवेदन किया था. मुख्यमंत्री ने बताया था कि बांग्लादेश की एक दवा कंपनी से एंटी वायरल इंजेक्शन रेमडेसिविर खऱीदने के लिए केंद्र अनुमति दें. लेकिन केंद्र इस पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आयी। इसी तरह 17,000 मांगे ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद पर केंद्र ने अब तक झारखंड को कोई राहत नहीं दी. और बाबूलाल राज्य में केंद्र की मंशा पर सफाई दे रहे है. 

अन्य राज्यों को झारखंड दे रहा मदद, वहीं केंद्र के इशारे पर गुजरात का झारखंड के प्रति व्यवहार सही नहीं

महामारी के दौर में झारखंड भाजपा शासित राज्य समेत तमाम राज्यों अपनी क्षमता से बढ़ कर मदद पहुंचा रहा है। बोकारो स्टील प्लांट और जमशेदपुर में बने ऑक्सीजन सप्लाई में कई राज्यों यथा दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात, बिहार जैसे राज्यों को मदद पहुंचाई जा रही है। लेकिन, बीजेपी शासित राज्य गुजरात झारखंड को किसी तरह की मेडिकल मदद नहीं दे रही है। जो भाजपा की झारखंड के प्रति मानसिकता को दर्शाता है. 

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पत्र लिख बताया था कि कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए अति आवश्यक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक, सिलिंडर और वेपोराइजर की झारखंड में घोर कमी है। इसके निर्माता गुजरात की कंपनियों के पास झारखंड का कई ऑर्डर अभी तक लंबित है, जिसे जल्द पूर्ति करने में वे मदद करें। लेकिन भाजपा-संघ मानसिकता के इशारे पर चलने वाली गुजरात सरकार, संघीय भावना को भूल अब तक तक खामोश है। जो झारखंड के साथ होने वाली सौतेला व्यवहार का ही रूप हो सकता है.

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