कोयला ब्लॉक की नीलामी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती – एतिहासिक कदम

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कोयला ब्लॉक की नीलामी

कोयला ब्लॉक की नीलामी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना – झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एतिहासिक कदम 

चाहे वह कोयला ब्लॉक की नीलामी हो या भूमि अधिग्रहण कानून, या श्रम क़ानूनों में सुधार का सवाल – मोदी सरकार की मंशा बहुत स्पष्ट है – पूँजीपतियों की पूजा करो, आबाद करो; मेहनतकशों को लूटो, बर्बाद करो। जहाँ एक ओर देश की भूमि, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों को पूँजी के निर्बाध दोहन के लिए खुला छोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रम की लूट को और अधिक कानूनी और संस्थागत रूप दिया जा रहा है। यह मोदी सरकार के “अच्छे दिनों” की सच्चाई है। 

देश के मेहनतकश लोगों को जल्द से जल्द इससे परिचित होना होगा और वे इसे समझ भी रहे हैं। साथ ही, आपको अपने असली दोस्तों की पहचान करनी होगी। क्योंकि, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का चरित्र हर गुजरते मिनट के साथ स्पष्ट होता जा रहा है। इसलिए उनके भरोसे बैठे रहना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना होगा। श्रमिकों के आंदोलन को एक क्रांतिकारी शुरुआत की आवश्यकता है जो उस पर हमलों के लिए एक ठोस, प्रभावी और कुशल प्रतिक्रिया प्रदान कर सके।

हेमंत सोरेन मोदी सरकार की मंशा को अच्छी तरह से समझते हैं

झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र की मोदी सरकार की मंशा को अच्छी तरह से समझ रहे हैं। और उन्होंने राज्य की जनता के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा झारखंड में कोयला ब्लॉक की नीलामी को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह केंद्र बनाम राज्य के बीच टकराव का विषय नहीं है, बल्कि राज्य हित से जुड़ा एक सार्वजनिक मुद्दा है। इस लड़ाई में पूरे राज्य को एक केंद्र बिंदु पर खड़ा होना होगा।

विधायक सरयू राय ने इस ऐतिहासिक कदम के लिए मुख्यमंत्री की प्रशंसा की है। श्री राय ने इसे न केवल राज्य के हित में बताया है, बल्कि इस मुद्दे को राजनीतिक जटिलता से दूर रखने की भी सलाह दी है। उन्होंने सरकार के फैसले को जनहित और राज्य का अधिकार भी बताया है। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी गई है।

हालाँकि, वह इस मामले केवल राज्य के ज़मीन अधिग्रहण मामले से जोड़ कर देखते हैं, लेकिन एफडीआई के पक्ष में खड़े भी दीखते हैं। लेकिन, झारखंड सरकार द्वारा उठाये गए कदम के मायने कहीं  अधिक हैं।

दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड से संसाधनों की लूट के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई शुरुआत कर दी है। क्योंकि, कोयला ब्लॉक और निजी खनन का व्यावसायिक आवंटन से आदिवासी, मूल निवासियों सहित सभी झारखंडियों का सबसे बड़ा नुकसान होगा। जो न केवल समाज और पर्यावरण के लिहाज से बल्कि मानवता के लिए भी घातक है।

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