दोना-पत्तल कामों से जुड़े कामगारों को फिर से मिलेगा पुर्नजीवन

हेमंत सोरेन की पहल पर खपड़े और दोना-पत्तल कामों से जुड़े कामगारों को फिर से मिलेगा पुर्नजीवन

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लुप्तप्राय होने की कगार पर पहुंच चुके हैं कुम्हार व दोना-पत्तल वाले, हेमंत सोरेन ने इनके लिए बनाया रास्ता

खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता, उद्योग और ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में हुआ फैसला

रांची। झारखंड एक ऐसा राज्य हैं जहां के लोग अपनी जीविका के लिए कई तरह के छोटे-छोटे कामों पर निर्भर है। ऐसे कामों पर उनकी कई पीढ़ी काम कर चुकी है। लेकिन आधुनिकता की रफ्तार ने इन कामों पर ग्रहण लगा दिया है। इन कामों से जुड़े कारीगर आज लुप्तप्राय होने लगे है। इसमें ग्रामीणों इलाकों में मिट्टी का सामान बनाने वाले कुम्हार व दोना-पत्तल बनाने वाले कारीगर शामिल हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहते है कि ऐसे लोगों को फिर से पुर्नजीवित किया जाए। इस दिशा में उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को काम करने का निर्देश दिया है। सीएम का यह निर्देश बीते दिनों तीन विभागों की समीक्षा बैठक में निकल कर आया है। इसमें खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता, उद्योग और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं। 

घरों में खपड़े के इस्तेमाल से कुम्हारों को मिलेगा रोजगार

ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की समीक्षा की। योजना अंतर्गत बनने वाले घरों की संरचना में बदलाव लाने की दिशा में हेमंत ने कदम उठाने का निर्देश अधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि गाँवों में बनने वाले आवासों में एकरुपता लाने के लिए इन मकानों में खपड़े का इस्तेमाल किया जाए। इससे आवास निर्माण की लागत में कमी आएगी और कुम्हारों को रोजगार के साथ राज्य में बैंबू फार्मिंग को भी बढ़ावा मिल सकेगा। 

मिट्टी के बर्तनों की उपयोगिता सुनिश्चित करने से भी कुम्हारों को मिलेगी राहत

उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने माटी कला बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुम्हार एवं शिल्पकारों के द्वारा बनाए गए उत्पादों को एक बाजार मिले, इसे बोर्ड सुनिश्चित करें। हेमंत का मानना है कि वर्तमान में मिट्टी के बर्तनों का प्रचलन काफी बढ़ गया है. जरूरी है कि इसे और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा तो है ही, साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी बेहतर है।

दाल भात केंद्रों पर दोना-पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का निर्देश

खाद्य आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक में हेमंत ने विभागीय अधिकारियों को कहा कि लॉकडाउन के समय सरकार द्वारा चलाये जा रहे दाल-भात योजना से लाखों लोगों को निःशुल्क भोजन कराया गया है। सरकार इन केंद्रों को और सुदृढ़ करने के दिशा में कार्यरत है। इन केंद्रों में प्लास्टिक के उपयोग को खत्म कर दोना-पत्तल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का कार्य किया जाए। ऐसा होने से ग्रामीणों इलाकों में इस काम से जुड़े कारीगर विशेषकर घरेलू महिलाओं को काफी आर्थिक मदद मिल सकेगी।

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