रिलायंस और अडाणी ग्रुप के तमाम सेवा का भारतीय किसानों द्वारा बहिष्कार करना मोदी सरकार और कॉपोरेट के बीच के नापाक संबंधों को उजागर करता है!

भारतीय किसानों

रांची। केंद्र सरकार द्वारा कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए बजबरन लाये गए तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन अब चरम पर पहुंच चुका है। इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान जीने मरने के साथ किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। चूंकि मोदी सरकार अपने कॉर्पोरेट साथियों के हक में एक इंच हटने को तैयार नहीं है, इसलिए तमाम आश्वासनों के बावजूद भारतीय किसान भी पीछे हटने को तैयार नही है। स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि आंदोलनरत किसान अब कॉर्पोरेट्स घरानों के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। ऐसे कॉर्पोरेट्स घरानों में रिलायंस और अडाणी ग्रुप का नाम किसानों ने प्रमुखता से लिया है। 

आंदोलनरत किसानों ने रिलायंस जियो के सिम इस्तेमाल नहीं करने का ऐलान कर दिया है. किसानों का कहना है कि आंदोलनरत किसानों में किसी के पास अगर जियो का सिम है तो उसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर में पोर्ट कराया जाएगा। इसके साथ ही सभी किसानों ने रिलायंस और अडाणी ग्रुप के हर स्टोर, मॉल व सेवा का बहिष्कार करने का भी फैसला किया है। दरअसल ऐसा कर इन किसानों ने बता दिया है कि केंद्र की मोदी सरकार का इन कॉर्पोरेट्स घरानों से काफी घनिष्ठता का संबंध है। वहीं इनके प्रोडक्टों का बहिष्कार कर किसानों ने नरेंद्र मोदी सरकार के कॉर्पोरेट घरानों पर दिये सहुलियत को भी बेनकाब करने का प्रयास किया है।

मोदी सरकार पर लगता रहा है कॉर्पोरेट घरानों को मदद पहुंचाने का आरोप

किसानों ने कॉर्पोरेट घरानों के वस्तुओं का बहिष्कार कर मोदी सरकार पर लगते आरोपों को और भी पुख्ता कर दिया है। वैसे तो पहले से ही भाजपा को देश के कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट्स परिवारों के समर्थक होने का आरोप लगता रहा है। लेकिन 2014 में केंद्र की सत्ता में मोदी सरकार के आने के बाद यह आरोप तेजी से बढ़ा है।

राजनीतिक दलों के साथ कई बड़े सामाजिक संगठनों का आरोप है कि मोदी सरकार चंद कॉरपोरेट घरानों (अडानी और अंबानी प्रमुख हैं) के हितों के अनुकूल ही नीतियों और कानूनों को बना रही है। दरअसल आंदोलनरत किसानों की यह सोच है कि कृषि से जुड़े तीनों कानूनों में जितने भी नये प्रावधान किये गये है, चाहे वह कॉट्रैक्ट फॉर्मिंग हो या एमएसपी हटाने की पहल, सभी इन्हीं घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए है। 

पुतले-सिम जलाने के साथ पेट्रोल नहीं लेने का कर चुके है फरियाद

किसानों ने इन घरानों के बहिष्कार की शुरूआत तो दिसम्बर माह के शुरू में ही कर दी थी। दरअसल अपने मांगों को लेकर आंदोलनरत किसानों ने अमृतसर में जो प्रदर्शन किया था, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ  अंबानी ग्रुप के मुकेश अंबानी, अडाणी ग्रुप के गौतम अडाणी के पुतले जलाये गये थे। इससे पहले बीते नवंबर माह को इन किसानों ने जियो सिम कार्ड भी जलाए थे। यहां तक की सोशल मीडिया पर भी जियो के खिलाफ कैंपेन चला। कुछ पंजाबी गायकों के सिम जलाने के वीडियो वायरल किये, तो कई किसान संगठनों ने रिलायंस के पेट्रोल पंपों से तेल न भराने की अपील तक कर दी। 

जियो कृषि ऐप का आना किसानों के विरोध को पुख्ता करने के लिए काफी है।

भले ही किसानों के इस बहिष्कार को कई लोगों ने गलत साबित करें, लेकिन सच यह भी है कि मुकेश अंबानी और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ आज कृषि क्षेत्र में काफी अंदर तक आ चुकी है। दोनों की नजरें भारत के कृषि क्षेत्र पर हैं। कृषि के क्षेत्र में इंट्री के लिए 2017 में रिलायंस का जियो प्लेटफॉर्म का फेसबुक के साथ पार्टनरशिप, जियोकृषि नाम का एक ऐप का लाना किसानों के विरोध को पुख्ता करने के लिए काफी है।

विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि नए कानून इस तरह से बनाए गए हैं कि उससे ऐसे बड़े कारोबारियों को फायदा होगा। वहीं किसान संगठन का तो यह भी कहना है कि अडाणी ग्रुप ऐसी फैसिलिटीज तैयार कर रहा है जहां अनाज स्टोर करके रखा जाएगा और बाद में उन्होंने ऊंची कीमत पर बेचा जाएगा।

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