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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

बीजेपी की तरह राज्य के किसानों को धोखा नहीं देना चाहते किसान हितैषी हेमंत सोरेन

राज्य के स्वाभिमान व अपने वादों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार कर रहे काम

रांची। साल 2016 में केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की थी। सरकार का दावा था कि इस योजना से किसानों के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव आएगा। लेकिन बाद में योजना में कई तरह की खामियां देखी गयी, जिससे किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन किसानों के इस दर्द को अच्छी तरह जानते है। यहीं कारण है कि उनकी पार्टी ने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि किसानों को अधिकार को बनाए रखने में वे हर संभव कदम उठाएंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद हेमंत कमोवेश इसी दिशा में काम कर रहे है। अपने पहले बजट में ही हेमंत सोरेन ने न केवल किसानों के हित में ऋण माफी की पहल की है, बल्कि धान उत्पादन एवं बाजार अभिगम्यता व सुलभता हेतु “सहायता” नामक प्रस्तावित नई योजना, बाजार समिति के प्रस्ताव पर पहल कर दी है। इसके अलावा कोरोना काल के इस दौर में जब राज्य की आर्थिक हालत काफी खऱाब है, तब भी राज्य के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने से पीछे नहीं हट रहे है। 

कृषि ऋण के साथ राहत कोष बनाने की पहल

राज्य के किसानों के हित में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पहले ही बजट में बड़ी पहल की। इस बजट में सरकार ने किसानों को कर्ज के बोझ से निकालने के लिए 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। इस ऋण के लिए हेमंत सरकार काफी आगे बढ़ चूकी है। कृषि मंत्री कह चूके हैं कि राज्य सरकार 7.61 लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ करेगी। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दे दी है। इस योजना के लिए हेमंत सरकार ने राज्य में अल्पकालीन कृषि ऋण राहत योजना की लाने की बात की। 30 रूपये खर्च कर हर जिले में दो-दो कोल्ड स्टोरेज खोलने का निर्णय लिया। इसी तरह प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना के स्वरूप में बदलाव का फैसला किया। हेमंत सरकार ने राज्य के किसानों के लिए झारखंड राज्य किसान राहत कोष बनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने 100 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बजट में किया। दरअसल बजट में हेमंत सरकार ने जितने भी पहल की, उन सभी का उद्देश्य किसानों का हित करना है।

“सहायता” योजना लाकर लाखों किसानों को किसान योजना पोर्टल मे जोड़ने की पहल

राज्य में धान उत्पादन एवं बाजार अभिगम्यता व सुलभता हेतु “सहायता” नामक एक नयी योजना लाने की बात हेमंत सोरेन ने किया। दरअसल इस योजना के द्वारा हेमंत चाहते हैं कि राज्य के किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं झेलनी पडी। इसके लिए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए “धान उत्पादन एवं आर्थिक सहायता हेतु 200 करोड़ का फंड भी जारी कर दिया। इस योजना के तहत सरकार जिन किसानों का धान खऱीदेगी, उसे मुख्यमंत्री किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपये की आर्थिक सहायता के तौर पर देगी। सहायता नाम की इस योजना के तहत मुख्यमंत्री उन 9.15 लाख किसानों को भी प्रधानमंत्री किसान योजना पोर्टल में जोड़ना चाहते है, जो अभी तक नहीं जुड़े है। बता दें कि इस पोर्टल में जुलाई 2020 तक केवल 23 लाख किसान ही रजिस्टर्ड हुए थे। बता दें कि राज्य में अभी 32 लाख किसान रजिस्टर्ड हैं। 

बाजार समिति लाकर हेमंत “एक राज्य एक बाजार” की कर रहे पहल

इसी तरह हेमंत सरकार ने बाजार समिति लाने की पहल भी शुरू कर दी है। इससे मुख्यमंत्री पूरे झारखण्ड में “एक राज्य एक बाजार” की जरूरत पर बल देने की पहल कर रहे है। उनका मंशा है कि किसी भी व्यापारी को उसे एक जिला में ही व्यापार करने की बाध्यता नहीं हो। इसके साथ ही समिति में निजी बाजार की स्थापना, बाजार यार्ड के बाहर कृषक से थोक प्रत्यक्ष खरीद करने, घोषित बाजारों के रूप में गोदामों, कोल्ड स्टोरेज, ई-बाजार, एकल ट्रेडिंग लाइसेंस, एकीकृत बाजार क्षेत्र आदि पर जोर दे रहे हैं। 

कोरोना जैसी संकट में भी एमएसपी देने से पीछे नहीं रहना चाहते हेमंत

कोरोना काल में जब राज्य आर्थिक संकट का दंश झेल रहा है, तो भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मूल्य देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह पहल भी उस समय हुई है, जब केंद्र सरकार ने कृषि संबंधी कानून को लेकर एमएसपी खत्म करने की पहल की। कैबिनेट की बैठक में सरकार ने यह घोषणा कर दी है कि 2020-21 के दौरान धान अधिप्राप्ति के लिए सरकार ने 2070 रुपये देगी।

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