SAVE_20201211_154017

कोरोना संकट के दौर में रांची नगर निगम द्वारा 4 करोड़ की लागत से 4 बायो टॉयलेट बनाना क्या जायज हैं?

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

80 लाख की लागत से बनाये गये मॉड्यूलर टॉयलेट की हालत आज है खास्ता हाल

हेमंत सरकार पर आरोप लगाने वाले भाजपा नेता आज विपक्ष की भूमिका निभाने से भी कर रहे परहेज

हेमंत सरकार राज्य को तंबाकु मुक्त करना चाहती है, तो भाजपा जनप्रतिनिधि तंबाकू को लेकर जारी सरकारी निर्देश का उड़ा रहे धज्जियां

रांची। राज्य की सत्तारूढ़ हेमंत सरकार इन दिनों आर्थिक संकट का सामना कर रही है। हालांकि यह संकट स्वंय के द्वारा उत्पन्न नहीं हुआ है. बल्कि यह केंद्र की मोदी सरकार की देन है। सभी जानते है कि जीएसटी कंपनसेशन सहित राज्य में स्थित केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों पर सरफेस रेंट के रूप में केंद्र के ऊपर करीब 47,000 करोड़ रूपये बकाया है। आर्थिक संकट से खुद को घिरा देखने के बाद भी हेमंत सरकार ने पूरे कोरोना काल में अपने सीमित संसाधनों के बल पर राज्यवासियों को हर संकट से बचाए रखा। दूसरी तरफ भाजपा जनप्रतिनिधि के गढ़ वाला रांची नगर निगम इन दिनों केवल 4 टॉयलेट के निर्माण पर ही करोडो रूपये फूंकने की तैयारी कर चुका है। 

दरअसल, निगम राजधानी के चार चयनित स्थानों पर करीब 4.15 करोड़ रुपए की लागत से 4 एरोबिक बायो टॉयलेट बनाने जा रहा है। इसके लिए बकायदा एक टेंडर निकाल टॉयलेट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर हो गयी है। लेकिन यह सवाल बनता है कि जो भाजपा नेता अपने नेता जो देश के प्रधानमंत्री भी है, उनसे राज्य के हिस्से का बकाया 47,000 करोड़ नहीं मांग रहे है, वहीं आज 4 करोड़ की टॉयलेट बनाकर क्या संदेश देना चाहते है। वह भी तब जब, जब राज्य की आर्थिक हालत काफी संकटमय है. साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत राजधानी में पहले से बने 80 लाख के 80 टॉयलेट या तो जर्जर हालत में है, या अधिकांश समय बंद ही रहते है। 

दुर्गंध रहित बायोटॉयलेट के निर्माण में निगम करेगा 4.15 करोड़ रूपए खर्च

एरोबिक बायो टॉयलेट बनाने के लिए निगम ने कुछ फेज का चयन किया है। पहले फेज में यह टॉयलेट लाइन टैंक रोड,  करम टोली तालाब,  मेडिका हॉस्पिटल और मोरहाबादी मैदान के पास बनाया जाएगा। निगम का दावा है कि टॉयलेट दुर्गंध रहित होगा, क्योंकि इसमें मौजूद बैक्टीरिया मल-मूत्र को कुछ ही क्षण में पानी में तब्दील कर देंगे। इसके लिए करीब 4.15 करोड़ खर्च किये जाएंगे। 

विपक्ष की भूमिका निभाने की जगह गलत तरीके से कर रहे आलोचना

हेमंत सरकार के सत्ता में आये हुए करीब एक साल पूरे होने को है। राज्य की जनता ने भाजपा की नीतियों से तंग आकर ही हेमंत सरकार को सत्ता सौंपी थी, ताकि राज्य का त्वरित गति से विकास हो सके। हालांकि सरकार बनते ही कोरोना संकट ने हेमंत सरकार पर कुछ और ही दायित्व ला दिया। वह दायित्व था, राज्य की जनता को इस महामारी से बचाना। हेमंत सरकार इस पर सफल भी रही। लेकिन विपक्ष में बैठने के बाद भी भाजपा नेता कभी अपने दायित्व को निभा नहीं सके। विपक्ष की भूमिका निभाने की जगह इन नेताओं ने हमेशा हेमंत सरकार की आलोचना ही की। यहां तक की जनता के हित में सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने में भी भाजपा नेता पीछे नहीं रहे। 

निगम का तर्क, बच्चों को तंबाकू के प्रभाव से बचाने के लिए देंगे लाइसेंस, इससे सरकारी निर्देशों का हो रहा उल्लंघन

कोरोना संकट का प्रभाव ज्यादा नहीं फैले, इसलिए हेमंत सरकार ने तंबाकू पदार्थों के बेचने व इसके उपयोग पर रोक लगायी थी। वहीं रांची नगर निगम ही राज्य का पहला संस्थान बना, जो राजधानी के दुकानदारों को तंबाकू उत्पाद बेचने के लिए लाइसेंस जारी करने का निर्देश जारी कर दिया। भाजपा नेता व रांची की मेयर आशा लकड़ा का तर्क हैं कि तंबाकू उत्पाद को बच्चों की पहुंच से दूर करने के लिए निगम तंबाकू उत्पाद बेचने वाले वेंडर कों लाइसेंस जारी करेगा। लेकिन यह तर्क काफी हास्यापद है। क्योंकि ऐसा निर्देश लाकर भाजपा जनप्रतिनिधि केवल सरकारी निर्देशों का उल्लंघन ही कर रहे है और कुछ नहीं।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on telegram
Share on whatsapp

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.