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आपदा

आपदा को अवसर में बदलने की हेमंत सोरेन की सोच ने झारखंड को संकट से बचाए रखा

रांची। 29 दिसम्बर 2019, राज्य के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने शपथ ली। इस दौरान हेमंत के समक्ष राज्य के खाली खजाने को भरने के साथ ही विकास को धरातल पर लाने की चुनौती थी। मंत्रियों के बीच विभाग बंटवारे के बाद सरकार ने काम करना शुरू ही किया था कि कोरोना संक्रमण ने झारखंड को भी अपने जद में ले लिया। विकास का पहिया पूरी तरह से रूक गया। आपदा भी ऐसी थी जिससे शायद ही कोई सरकार अगले कई वर्षों तक उभर सके। लेकिन युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी आपदा की इस घड़ी को बेहतर अवसर में बदलने का फैसला किया। उनकी सोच यही थी कि संकट की इस घड़ी राज्य में किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं हो। हुआ भी कुछ ऐसा ही। अपने सीमित संसाधनों और साफ-सुंदर छवि के बल पर मुख्यमंत्री ने न केवल लोगों को मदद पहुंचायी। बल्कि जिस उम्मीद से राज्यवासियों ने उन्हें वोट दिया था, उसे भी वे पूरी तरह से निभाए।  

आपदा को अवसर में बदला

संक्रमण और सोशल डिस्टेंसिंग के इस दौर में जहां आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बनी थी, वहीं हेमंत के प्रयासों से महिलाओं ने कई सरकारी कामों में भागीदारी की। दीदी किचन योजना, खूंटी जैसे जिलों में सखी मंडलों द्वारा ‘सखी बॉस्केट’ की पहल की गयी। दीदी किचन लाकर सरकार ने महिलाओं को रोजगार दिया। सरकारी सहायता से सखी बॉस्केट लाकर सखी मंडलों ने ऑनलाइन आर्डर के माध्यम से राशन (रोजमर्रा के घर के सामानों) की होम-डिलीवरी का कार्य उस दौर में शुरू की, जब लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे थे। संकट की घड़ी में इसे कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना।

राहत पहुंचाने के लिए लिया सोशल मीडिया का सहारा

लॉकडाउन के समय जब राज्य के किसी कोने में किसी भी व्यक्ति को कोई समस्या हुई, तो मुख्यमंत्री व उनके टीम के लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा प्रमुखता से लिया। कई बार ऐसे मौके आए, जब कोरोना संक्रमित मरीजों ने सोशल मीडिया के जरिए सीएम से मदद मांगी। सीएम ने ऐसे मामलों को तरजीह दी और संबंधित जिला प्रशासन को राहत पहुंचाने का निर्देश भी दिया। संकट की इस घड़ी को भी सीएम ने अवसर में बदला। 

महामारी में रोजगार की कमी न हो, सृजित किया रोजगार कार्यक्रम 

संकट के इस दौर में जब लाखों लोगों के रोजगार छीने जा रहे थे, लाखों प्रवासी मजदूरों की घर वापसी हो रही थी, तब मुख्यमंत्री ने खुद पहल कर रोजगार सृजन के उपायों पर ध्यान दिय़ा। कई रोजगार सृजन योजनाओं की शुरूआत की। इसमें बिरसा हरित ग्राम योजना, नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, पोटो हो खेल विकास योजना प्रमुखता से शामिल है। इससे राज्य के ग्रामीण, किसान व खेल के प्रति समर्पित युवाओं को काफी लाभ मिला। सरकार का दावा था कि उपरोक्त तीनों योजना से कोरोना काल में 2 करोड़ लोगों के लिए रोजगार सृजन हो  सकेगा। ग्रामीण क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिल सकेगा। इसी तरह मुख्यमंत्री सहायता एप्प के जरिए 2.5 लाख से अधिक लोगों को निबंधित कराकर उपलब्ध रोजगार देने में भी झारखंड काफी आगे रहा। 

प्रवासी झारखंडियों के घर वापसी सहित सीएम राहत कोष में दिलाई मदद

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छवि काफी साफ-सुथरी है, यहां तो राज्य की जनता ने चुनाव जीता कर पुख्ता कर ही दिया था। अपनी इस छवि का उपयोग मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन में दूर-दराज के इलाकों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट कराने में किया। कई नीजि व्यक्तियों के बल पर सीएम ने अपने हजारों श्रमिक भाईयों को घर वापसी करायी। इसी तरह उनके छवि को देख कई लोगों ने सरकार को कोरोना से लड़ाई में आर्थिक मदद भी पहुंचायी। कई संस्थाओं, नीजि फर्म ने हेमंत के कार्यों से प्रभावित हो मुख्यमंत्री राहत कोष में करोड़ो की आर्थिक मदद दी।

कोरोना जांच के लिए कोरोना टेस्ट ड्राइव की शुरुआत

पूरे कोरोना काल में झारखंड को आर्थिक मदद पहुंचाने में केंद्र ने पक्षपात की। लेकिन इससे हेमंत सोरेन विचलित नहीं हुए। उन्होंने अपने सीमित संसाधनों के बल पर राज्य को इस संकट से बचाए रखा। हाल ही में त्योहारों में संक्रमण की रफ्तार का पता लगाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर कोरोना जांच कराने की पहल शुरू की। 28 नवंबर को सरकार ने कोरोना टेस्ट ड्राइव शुरू किया गया है. अभियान के तहत केवल एक ही दिन में झारखंड में करीब 1 लाख लोगों के सैंपल लेने का लक्ष्य रखा गया है।

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