Welcome to Jharkhand Khabar   Click to listen highlighted text! Welcome to Jharkhand Khabar
  TRENDING
दीपक प्रकाश बताए, यौन शोषण में संलिप्त भाजयुमो युवा नेता कैसे बनेंगे युवाओं की आवाज़
कोरोना काल से कोविडशिल्ड तक के सफर में हेमन्त ने पेश की जन नेतृत्व की मिसाल
मालिकों को खुश करने के जोश में पत्रकारिता की मूल भावना का तिलांजलि दे चूका एक राष्ट्रीय अखबार!
भाजपा के राजनीतिक षड्यंत्र के बावजूद श्री हेमन्त का संयमित रहना उनके व्यक्तिव का दर्शन
केन्द्रीय भाजपा की षड्यंत्रकारी नीतियाँ लोकतांत्रिक हेमंत सरकार को कर रही है टारगेट!
ओरमांझी हत्याकांड: झारखंड पुलिस की सफलता काबिले तारीफ, भाजपा की गंदी सोच फिर आयी सामने
नीरा यादव का कोरोना काल में शिक्षण व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप हस्यास्पद
सीएम काफिले पर हमले के मुख्य आरोपी के लिए बाबूलाल जी का “जी” शब्द और सुरक्षा की मांग करना, भाजपा की संलिप्तता करती है उजागर
बेलाल की थी करतूत, लेकिन बाबूलाल बिना कारण थे बेहाल
Next
Prev

झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

संविदाकर्मी

कोरोना काल में कोई परिवार सड़क पर न आए, इसलिए विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों को मुख्यमंत्री दे रहे हैं सेवा विस्तार

मुख्यमंत्री जानते हैं कि रोजगार जाने पर व्यक्ति को किन आर्थिक परेशानी व मनोवैज्ञानिक चुनौतियों के दौर से गुजरना पड़ता है, इसलिए विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों को मुख्यमंत्री दे रहे हैं सेवा विस्तार

रांची। कोरोना वायरस के प्रसार का नकारात्मक प्रभाव कमोवेश हर सेक्टर में देखा गया है। इसमें सबसे प्रभावित होने वाला क्षेत्र अगर कोई रही तो वह रोजगार है। हर कोई इसी डर के साये में जी रहा है कि न जाने कब उसकी नौकरी चली जाए। जिन लोगों की नौकरियां अचानक चली गयी है या लॉकडाउन के कारण अचानक व्यापार ठप पड़ गया है, उन्हें आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। 

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस दर्द को अच्छी तरह वाकिफ हैं। यही कारण है कि रोजगार छीने जाने के बाद घर लौटे प्रवासी मजदूरों को न केवल भोजन उपलब्ध कराया बल्कि ग्रामीण व शहरी इलाको में उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया है। इसका एक जीता जागता सबूत यह भी हो सकता है कि सरकारी विभाग में संविदा पर कार्यरत वैसे कर्मी जिनकी कार्य अवधि पूरी हो चुकी है, उन्हें भी इस संकट के घड़ी में हेमंत अकेला नहीं छोड़ा है। ऐसे संविदाकर्मियों के परिवार कोरोना संकट के दौर में सड़क पर ना आ जाए, इसलिए मुख्यमंत्री उनके सेवा अवधि को बढ़ा रहे है।

वन संरक्षक के पद पर 12 संविदाकर्मियों को मिला अवधि विस्तार

बीते दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में संविदा के आधार पर नियुक्त सेवानिवृत्त कर्मी को न हटाने का फैसला लिया है। ऐसे कर्मी सहायक वन संरक्षक के पदों पर कार्यरत है। सरकारी आदेश में बताया है कि सहायक वन संरक्षक की कमी तथा विभागीय कार्य प्रभावित न हो, इसलिए इन्हें सेवा विस्तार मिला है। लेकिन वास्तविक कारण इन कर्मियों को कोरोना काल में बेरोजगार नहीं होने देना  बताया जा रहा है। बता दें कि 31 अक्टूबर 2019 को जारी आदेश के तहत कुल 12 सेवानिवृत्त कर्मियों को एक वर्ष के लिए संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया था। नवंबर-2020 में इन सभी संविदा कर्मियों के कार्य अवधि समाप्त होने वाली है। 

संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को मिला सेवा विस्तार, हेमंत की अनुमति के बाद 31 मार्च तक करेंगे काम

राज्य के सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में संविदा पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की कार्य अवधि बढ़ाने का फैसला भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया है। कोरोना संकट काल में शिक्षकों और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री इनकी सेवा अवधि को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। अब जल्द ही इस पर मंत्रिमंडल की स्वीकृति ली जायेगी। बता दें कि उच्च, तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा उपरोक्त संस्थानों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने और सकल नामांकन अनुपात दर में वृद्धि के लिए तीन साल पहले एक फैसला लिया था। जिसके अनुसार घंटी आधारित शिक्षकों की संविदा पर नियुक्ति की गयी थी। कोविड-19 महामारी के कारण सभी शैक्षणिक संस्थान अभी बंद है। सरकार की मंशा इन बेरोजगार नहीं करने के साथ शिक्षण कार्य को सुचारू रूप से चलाने की है। 

संविदा पर कार्यरत कर्मियों के नियमितीकरण के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति

संविदा पर काम कर रहे कर्मिंयों को सेवा विस्तार देने के साथ मुख्यमंत्री यह भी चाहते है कि ऐसे कर्मियों की सेवा में एकरूपता लाई जाए। इसके लिए 18 अगस्त को मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय समिति गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दिया था। समिति के अध्यक्ष विकास आयुक्त को बनाया गया है। वहीं कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के प्रधान सचिव इसके सदस्य सचिव, योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी को इसका सदस्य बनाया गया है। यह समिति सरकार के विभिन्न विभागों, कार्यालयों में अनुबंध-संविदा पर कार्यरत कर्मियों और उनके कार्यों से संबंधित सेवा शर्तों में सुधार, अवधि और मानदेय की राशि आदि में समानता लाने के साथ इनके नियमितीकरण के लिए सरकार को मंतव्य देगी। 

भाजपा से मिला धोखा, हेमंत ने मांगों को समिति के पास पहुंचाया, दिया आश्वासन

बीते सितंबर को राजधानी में आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों के प्रति सरकार ने नरम रुख अपनाकर इनके भी मांगों को उपरोक्त समिति के विचारार्थ हेतु शामिल किया था। बता दें कि राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में कुल 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में वर्ष 2017 में की गयी थी। इनके लिए हर महीने 10 हजार रुपये का मानदेय तय किया गया था। सहायक पुलिसकर्मी के पद पर बहाल हुए अभ्यर्थियों को तीन साल के बाद स्थायी करने की बात कही गयी थी। लेकिन तत्कालीन पूर्व सरकार द्वारा इन्हें धोखा ही हाथ लगा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts

Click to listen highlighted text!