डबल इंजन सरकार ने जनता के साथ डबल विश्वासघात किया है

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नोट : भाजपा प्रवक्ता को हक़ीकत पता होना चाहिए कि डबल इंजन सरकार में, केंद्र सरकार को 31 अक्टूबर, 2019 तक प्रस्ताव भेजने थे । और झारखंड में आचार संहिता 1 नवंबर, 2019 को लागू हुई थी।

भाजपा के पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सिद्ध कर दिया है कि उनसे बड़ा क़ानूनविद देश में और कोई नहीं है। भाजपा ने जब चाहा पूँजीपतियों के लिए क़ानून से लेकर संविधान में खिची लकीरों तक में फेर बदल कर दिया। लेकिन, जब भी आम गरीब, किसान व मज़दूरों की बात आयी, नियमों का हवाला दे कर अपना पल्ला झाड़ लिया। इस बार भी झारखंड में यही हुआ किसानों के हुए नुकसान का ठीकरा भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सरकार पर फोड़ दिया है और खुद की पार्टी को पाक साफ़ बता दिया है। 

दरअसल, सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट से पास करा कर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्र राज्य सरकार के दावे के आधार पर जांच कर केंद्रीय मदद की सिफारिश करती है। लेकिन तब कि रघुवर सरकार ने ना तो प्रस्ताव भेजा और ना ही केंद्र सरकार ने कोई पैकेज मंज़ूर किया। जबकि भाजपा के तमाम नेता कई बार झारखंड आकर चुनावी वादे करते रहे।  

डबल इंजन सरकार के इंजन ने मोदी सरकार ने किसानों की मदद की सिफारिश को ठुकरा दिया है 

राज्य के किसान रघुवर सरकार के गलत नीतियों का ख़ामियाज़ा न भुगते इसलिए, हेमंत सरकार ने राज्य के 7 जिले के 55 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित का प्रस्ताव कैबिनेट में पास करा, आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा। लेकिन, केंद्र की मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। फलस्वरूप केंद्र सरकार के पक्षपात रवैये के कारण राज्य के 7 लाख से ज्यादा किसानों मुआवजा नहीं मिल सकेगा। डबल इंजन सरकार ने जनता के साथ डबल विश्वासघात किया है।

वहीँ दूसरी तरफ झारखंड में प्रधानमंत्री किसान योजना पोर्टल में, निबंधन से तकरीबन नौ लाख किसान महरूम हैं। आवेदन लंबित हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कृषि विभाग को उन तमाम छूटे किसानों और प्रवासी श्रमिकों को योजना से जोड़ने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि लाभुकों के आधार पर ही राज्य सरकार सहायता स्कीम संचालन करेगी। उन्होंने कहा कि छोटे, मंझोले व सीमांत किसान योजना से लाभान्वित हो। 15 अगस्त तक इन सभी छूटे किसानों को आर्थिक सहायता मिलनी है।

श्री सोरेन ने कहा कि किसान बढ़ नहीं रहे, बल्कि अब खेतिहर मज़दूर बनते जा रहे हैं. इसलिए किसानों की मदद के लिए विशेष योजना बनाने की जरूरत है।इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए धान उत्पादन एवं आर्थिक सहायता के लिए 200 करोड़ का बजट रखा गया है।

क्या प्रतुल शाहदेव झारखंडी नहीं हैं? या समस्या से अवगत नहीं हैं?

मसलन, झारखंड की पिछली डबल इंजन सरकार चुनावी ब्रांडिंग में इतनी व्यस्त थी कि राज्य के किसान उनके लिए कोई मायने नहीं रखते थे। सवाल है कि क्या भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव झारखंडी नहीं हैं? क्या वह समस्या से अवगत नहीं हैं? क्या यह झारखंड के हित का मामला नहीं है? फिर सफाई देने के जगह केंद्र को सच्चाई से अवगत कराते हुए क्यों नहीं झारखंडी चेतना का परिचय दिए? 

या फिर यह समझा जाए कि उनके पास जो नियमों की जानकारी है वह केवल अपनी पार्टी को पाक-साफ़ साबित करने के लिए है ना कि झारखंडी जनता के हित के लिए! क्योंकि पूरे मामले में नुकसान केवल राज्य के गरीब किसानों का है।

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