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मजदूर दिवस : हेमंत सरकार और झारखंडी देशी व प्रवासी मजदूर – विशेष

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झारखंड में प्रवासी मज़दूरों के हंगामे के बीच मजदूर दिवस का अवसर है। इस दिन का लेख हेमंत सरकार का राज्य के श्रमिकों की स्थिति पर कसौटी पर परखने का एक प्रयास है।

मजदूर दिवस : हेमंत सोरेन का झारखंडी प्रवासी मजदूर पर लाइव

1 मई – मजदूर दिवस।

श्रमिक इस दिन को एक त्यौहार के रूप में मनाते हैं। यह आठ घंटे के काम के लिए श्रमिकों द्वारा शुरू किए गए शानदार आंदोलन का प्रतीक है। क्योंकि, इससे पहले, श्रमिकों को चौदह से अठारह घंटे के बीच काम करना पड़ता था। ज्यादातर देशों में काम के घंटों पर कोई नियम नहीं था। 

श्रमिकों ने “रात से सुबह तक” काम किया है। बच्चों और महिलाओं के लिए 18 घंटे काम करना आम बात थी। उसके जीवन और मृत्यु में वैसे भी कोई अंतर नहीं था, इसलिए उसने लड़ने का फैसला किया! अलग-अलग जगहों पर दुनिया भर में आंदोलन हुए। 

भारत में भी, 1862 में, श्रमिक इस मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए। लेकिन, पहली बार यह संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर शुरू हुआ। 1877 से 1886 तक, मज़दूरों ने आठ घंटे के कार्य दिवस की मांग पर संयुक्त राज्य भर में संगठित होना शुरू कर दिया।  

1 मई को, श्रमिक संगठनों ने शिकागो की सड़कों पर आठ घंटे का कार्य दिवस का नारा बुलंद किया। पूँजीपतियों ने इसे “आपातकाल की स्थिति” घोषित किया। शहर के सभी धन्नासेठों और उद्यमियों का एकत्रीकरण लगातार जारी रहा। फिर उसने पुलिस की मदद से ज़्यादती की। कई श्रमिकों की शहादत के बाद, 8 घंटे का कार्य दिवस प्राप्त हुआ।

मजदूर दिवस: शिबू सोरेन ने श्रमिकों के लिए संघर्ष किया, हेमंत सरकार ने कितना आगे बढ़ाया 

समय ने करवट ली – झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सरकार ने 2019 में पदभार संभाला। तब से अब तक, इसमें कोई संदेह नहीं है, झारखंड में काम करने वाले ग़रीबों के पक्ष में कई दृढ़ निर्णय किए गए। अभी, सभी कर्मचारियों के रुके हुए वेतन का भुगतान करने के आदेश दिए गए थे। गरीब मजदूरों के लिए बीमा की घोषणा की गई। 

लेकिन, कोरोना वायरस के कारण अचानक लॉकडाउन की घोषणा की जाती है। और बजट सत्र को निर्धारित समय से पहले रोकना पड़ा। याद है -इस सरकार के ‘विधायक सुदव्य कुमार सोनू’ ने सत्र के दौरान श्रमिकों के मुद्दे को ज़ोरदार तरीके से उठाया था।

तालाबंदी के दौरान गरीब और प्रवासी मजदूरों की समस्या का निदान

हेमंत सरकार ने पहले संकट में राज्य के गरीब मज़दूरों के लिए अनाज की व्यवस्था की। फिर, दूसरे राज्य में फंसे प्रवासी मज़दूरों का पता लगाकर उन्हें राशन और मार्थिक मदद पहुंचाया। राशन उन मजदूरों को भी दिए गए जिनके राशन कार्ड पिछली सरकार ने रद्द कर दिए थे। भोजन के लिए कई योजनायें चलायी गयी।

श्रमिक घर में काम करके आय अर्जित कर सकते हैं, इस मुद्दे पर एक बैठक भी बुलाई गई है। यह चर्चा आगे बढ़ रही थी कि राज्य में प्रवासी मज़दूरों की अचानक वापसी का मुद्दा गरमाता है।

प्रवासी श्रमिकों की कुशल वापसी में हेमंत सरकार पूरी ताकत लगाते हैं। इस संबंध में, उन्होंने अनुमति के लिए प्रधान मंत्री के साथ लगातार विचार-विमर्श किया। अनुमति मिलने पर उन्होंने रेल मंत्री से संपर्क किया। 

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मजदूर दिवस पर हेमंत सरकार ने मजदूरों की वापसी करवाई

हालाँकि, विपक्ष ने इस मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास किया। लेकिन, एक असाधारण रणनीति के तहत, आज मज़दूर दिवस के अवसर पर प्रवासी मज़दूरों की एक खेप राज्य में लौट आई। और एक और खेप रास्ते में है – यह उम्मीद की जा सकती है कि इसी तरह सभी मजदूर दूसरे राज्य से लौटने में सक्षम होंगे। इसके साथ, “झारखंड की उम्मीदों की ट्रेन” शुरू हो गई है।

इसके अलावा, हेमंत सरकार दूसरी दिशा में भी  काम कर रही थी।

एक तरफ, पहली ट्रेन से आने वाले श्रमिकों के स्वागत और स्वास्थ्य जांच का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री खुद हटिया स्टेशन पहुंचते हैं। तो दूसरी तरफ, हेमंत सोरेन दूसरे ही पल – वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिए सभी विधायक से मिलते हैं। इस बैठक में उन्होंने प्रतिनिधियों को कोरोना से लड़ने की ज़िम्मेदारी सौंपी।

वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिए सभी विधायक से मिलते हेमंत

और, अपने प्रतिनिधियों को यह कहना कि यह लड़ाई केवल एक साथ जीती जा सकती है। राज्य के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है।यही नहीं, वे डिजिटल तकनीक के विकल्प के रूप में लॉकडाउन के दौरान राज्य में गरीब मजदूरों के बच्चों की बाधित शिक्षा शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं।

अंत में, मजदूर दिवस के अवसर पर श्रमिकों के प्रति हेमंत सरकार का रवैया कुछ हद तक सकारात्मक प्रतीत होता है। पिछली सरकार की तुलना में, यह सरकार श्रमिकों के प्रति स्पष्ट रवैया दिखायी है – इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। शुरुआती चरणों में, यह कहना जल्दबाजी होगी कि 100 प्रतिशत पास हो गए हैं। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि यह सरकार अच्छे तरीके से बढ़ रही है।

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