मुख्यमंत्री श्रमिक रोजगार समेत अन्य महत्वाकांक्षी योजनाएं महामारी में अकुशल श्रमिकों को दे रहा है राहत

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सीएम श्रमिक रोजगार

“यह महज संयोग भर ही था कि कोरोना की शुरुआत के येन पहले सीएम के रूप में, युवा हेमंत ने संभाली झारखंड का बागडोर, नतीजा हमारे सामने है, मुख्यमंत्री श्रमिक रोजगार समेत अन्य महत्वाकांक्षी योजनाएं की हुई शुरुआत. न कोई भूख से मारा और न ही कोई रहा बेरोजगार, अपने लोगों की परवाह करते हुए महामारी से झारखंड संजीदगी से लड़ रहा है और केंद्र की षड्यंतत्रों पर भी फिरा चुका पानी

  • सखी मंडलों के लिए 449 करोड़ रुपये की चक्रीय निधि.
  • सामुदायिक निवेश निधि.
  • 546 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिंकेज का बजटीय प्रावधान. 

सहित कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं का कोरोना महामारी में दिख रहा है लाभ.

रांची. कोरोना महामारी जैसे संक्रमण से देश ग्रसित हो कोई नहीं चाहता था. लेकिन यह भी सच है कि संक्रमण ने देश की तमाम सरकारों की कठिन परीक्षा ली है. इस महामारी में विशेषकर डेली कमाने-खाने वाले तबकों के प्रति, सरकारों की संवेदनशीलता के कटु सच उजागर हुए हैं. वह भी तब जब देश की अधिकांश ऐसे श्रमिकों को अकुशल की श्रेणी में रखा जाता है. जहाँ पिछले साल की शुरूआत में फैली कोरोना महामारी इन अकुशल श्रमिकों की त्रासदी का सच लिए है. जहाँ केंद्र इनकी मौतों तक का आंकड़ा भी नहीं जुटा पायी. वहीं हेमंत सत्ता का सच एक स्वर्णिम इतिहास लिए हुए है.

इस महामारी में पलायन कर चुके श्रमिक अपने घर या मूल राज्य, वापस लौटने पर विवश हुए. उनकी घर वापसी हुई. बल्कि झारखंड ने तो आगे बढ़ अपने लोगों का स्वागत किया. अपने खर्चे उन्हें वापस बुलाया. लेकिन उनकी वापसी झारखंड जैसे गरीब राज्यों के लिए रोजगार मुहैया कराने जैसी बड़ी समस्या व चुनौती का भी सच लिए था. यह महज संयोग भर ही था कि महामारी के येन पहले, राज्य का मुख्यमंत्री रघुवर नहीं बल्कि युवा हेमंत सोरेन थे. सीएम ने इन अकुशल श्रमिकों की भूख को प्राथमिकता में रखते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत की. 

झारखंड सरकार की प्रमुख योजनायें 

  • मुख्यमंत्री श्रमिक रोजगार योजना
  • बिरसा हरित ग्राम योजना
  • नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना
  • वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना
  • सखी मंडलों को आर्थिक सहायता देने की पहल प्रमुखता से शामिल.

मुख्यमंत्री ने योजनाओं को शुरू करने के साथ ही बकायदा कहा भी था कि कोविड-19 के कारण लाखों प्रवासी श्रमिक राज्य वापस लौटेंगे. उन सभी को रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार ही ने ऐसी योजनाओं को प्रारंभ किया है.

सीएम श्रमिक रोजगार : सभी नगर निकायों के कुल 1962 श्रमिकों को मिला रोजगार 

सीएम श्रमिक रोजगार
सीएम श्रमिक रोजगार

नगर विकास विभाग मुख्यमंत्री के ही पास थे. 14 अगस्त को मुख्यमंत्री श्रमिक रोजगार योजना की शुरुआत हुई. योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों की तरह ही शहरी क्षेत्र के बेरोजगारों को साल में 100 दिनों की रोजगार गारंटी के प्रावधान शामिल किये गए. 15 दिनों में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया. जॉब कार्ड प्रदान होते ही योजना का असर लाभ के रूप में लगातार दिखने लगे. रोजगार खो चुके अकुशल श्रमिकों को योजना के तहत अपने परिवार पालने में सहूलियत हुई. राज्य में, मुख्यमंत्री श्रमिक योजना (MSY) बीते 19 मई तक, सभी 50 नगर निकायों के कुल 1962 श्रमिकों को कार्य उपलब्ध कराने का सच लिए है.

स्टेकहोल्डर्स मीट में ही सखी मंडलों के हुनर की सराहना कर अपनी मंशा जता चुके थे, मुख्यमंत्री सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विशेष जोर राज्य के महिलाओं की आत्मनिर्भरता पर रहा है. सखी मंडल महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक उत्थान पर मुख्यमंत्री द्वारा किये गए विशेष प्रयास इस सत्य पर मुहर भी लगाती है. सरकार द्वारा चलाई गई फूलो-झानो योजना, सखी मंडल के जरिए ब्याज रहित ऋण की सुविधा राज्य की हजारों महिलाओं की दशा-दिशा बदली है. वह आत्मनिर्भर हो अपने परिवार का सामान के साथ पोषण कर पा रही है. सैकड़ों महिलाएं आज हड़िया-दारू जैसे कलंक से बाहर निकलकर खुद का रोजगार चला सम्मानजनक जीवन जी रही हैं.

ज्ञात हो, दिल्ली में आयोजित स्टेक होल्डर्स कार्यक्रम में सीएम ने दुमका जिला में संचालित मयूराक्षी सिल्क द्वारा तैयार बंडी का पहनना, उनकी मेहनत व हुनर का उस मंच पर सराहना करना. राज्य के विकास में महिलाओं की अहम भूमिका, उनका योगदान की समझ को दर्शाता है. साथ ही राज्य के महिलाओं के प्रति एक मुख्यमंत्री का कर्तव्य व प्रयास की ईमानदार अभिव्यक्ति  भर भी हो सकता है.  

बजट में किये गए करोड़ के प्रावधान का आज धरातल पर दिख रहा असर 

ज्ञात हो, हेमंत सरकार ने 2021-22 के बजट में भी सखी मंडलों के लिए 449 करोड़ रुपये की चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि तथा 546 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिंकेज उपलब्ध कराने की घोषणा की थी. जिसका लाभ आज धरातल पर प्रत्यक्ष दिख रहा है. 

केस स्टडी

सीएम हेमंत सोरेन की पहल पर सखी मंडल के मार्फ़त राज्य की महिलाओं को फायदा मिल रहा है. हम नीचे केस स्टडी के रूप में देख सकते हैं.

केस स्टडी -1 :  हजारीबाग के होन्हें गाँव की रीमा सखी मंडल से जुड़कर अपने बंजर पड़े खेतों में आम की बागवानी कर अपनी आजीविका को सशक्त बना चुकी हैं. रीमा बागवानी के साथ-साथ सब्जियों की मिश्रित खेती कर अच्छी-खासी मुनाफा कमा लेती है. जिससे वह स्वाभिमान के साथ परिवार का पोषण कर रही है.

स्टडी – 2 : कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली देवघर, कुशमाहा गाँव की नीतू सखी मंडल से ऋण लेकर आज छोटी सी मनिहारी दुकान एवं सिलाई के काम के साथ ही बत्तख पालन का काम कर रही है. जिससे प्रतिमाह उन्हें करीब 7000 रुपये की आमदनी हो जाती है.

केस स्टडी-3 : कभी पैसे के अभाव में खेती छोड़ने का सोच रही रांची के अनगड़ा प्रखंड के नारायण सोसो गांव की कविता देवी, आज खेती से प्रति फसल 50-60 हज़ार रुपये कमा रही हैं. वर्तमान में कविता ने 25 डिसमिल में खरबूजे के 1000 पौधे लगाए हैं. जिससे उन्हें 1500 किलो खरबूजा होने की आशा है.

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