क्या भैरव सिंह का स्वागत कर भाजपा एक निम्न दर्जे के गुंडे को बड़ा गुंडा बनाना चाहती है  

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भैरव सिंह

क्या भैरव सिंह का स्वागत कर भाजपा एक निम्न दर्जे के गुंडे को बड़ा गुंडा बनाना चाहती है? क्या भाजपा मानसिकता राज्य के शांति को भंग कर अशांत करना चाहती है?   

भारत एक लोकतांत्रिक व शांतिप्रिय देश है और संवैधानिक मूल्यों को आधार मान कर चलती है. भारत का लोकतांत्रिक देश होना हमारा सौभग्य है. लोकतंत्र हमें, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अपने नेताओं को चुनने का हक, अत्याचार के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करने का हक, शांतिप्रिय तरीके से आंदोलन करने का हक समेत कई आजादी देता है. मौजूदा दौर में संघ की विचारधारा पर आधारित भाजपा सत्ता में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद कमजोर हो चुकी है. वह विचारधारा देश के एक वर्ग का दिमाग ब्रेनवॉश कर गुंडे पैदा कर रहा है. सोशल मीडिया की तानाशाही और दबंग नेताओं की दबंगई का बोलबाला है.

संघ ने कभी किसी ब्रिटिश-विरोधी आंदोलन में हिस्सेदारी नहीं निभाया

संघ संस्थापक हेडगेवार ने असहयोग आंदोलन में व्यक्तिगत हैसियत से भाग लिया था. संघ ने कभी किसी ब्रिटिश-विरोधी आंदोलन में हिस्सेदारी नहीं निभाया. संघ की स्थापना 1925 में हुई थी. साल 1930 में हेडगेवार ने उन लोगों को हतोत्साहित किया, जो ब्रिटिश-विरोधी आंदोलन में भाग लेना चाहते थे. साल 1942 में उनके उत्तराधिकारी गोलवलकर ने संघ के स्वयंसेवकों पर भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया था. उसने कहा था संघ के स्वयंसेवकों का एजेंडा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ना नहीं है.

मनुवादी विचारधारा पर आधारित संघ व उसके अनुषांगी दल ने हमेशा से देश की शांति या शांति के प्रतीकों को क्षति पहुंचाई है. जाति के वर्गीकरण पर आधारित इस विचारधारा ने हमेशा देश को जोड़ने वाली विचारधारा पर हमला किया है. नाथू राम गोडसे इसी विचारधारा की उपज थे जिसने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या की थी. और शर्म की बात है कि आज उस हत्यारे को वह मानसिकता पूजती है.

गांधी की आरएसएस के बारे में सोच 

आरएसएस के बारे में गांधी की सोच का कई प्रामाणिक और विश्ववसनीय स्त्रोत मिलते हैं. ‘हरिजन‘ के 9 अगस्त 1942 के अंक में गांधी लिखते हैं, ‘‘मैंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी गतिविधियों के बारे में सुना है और मुझे यह भी पता है कि वह एक सांप्रदायिक संगठन है”. सांप्रदायिक संगठनों द्वारा किए जा रहे उपद्रवों और गुंडागर्दी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा, ‘‘मैंने आरएसएस के बारे में कई बातें सुनी हैं. मैंने सुना है कि इन गड़बड़ियों की जड़ में आरएसएस है”. 

मॉब लिंचिंग मामले में जेल गये अपराधियों को भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने माला पहना किया था गुंदगर्दी को प्रोत्साहित 

विवादों में फिर प्रदेश बीजेपी नेता

ऐसे कई साक्ष्य हैं जहां आरएसएस विचारधारा का पर्दाफाश होता है. जिसके ताजा उदाहरण झारखंड के दो मामलों में देखा जा सकता है. जहां जुलाई 2018 में मॉब लिंचिंग मामले में जेल गये अपराधियों को, कथित तौर पर भाजपा के हजारीबाग सांसद जयंत सिन्हा ने माला पहना गुंदगर्दी को प्रोत्साहित किया. सांसद के पिता और पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने दुखी हो ट्वीट कर कहा था, ‘पहले मैं लायक बेटा का एक नालायक बाप था. अब यह किरदार उलट गया है.

17 जुलाई को स्वामी अग्निवेश पर भाजपा के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला 

झारखंड में स्वामी अग्निवेश पर भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं द्वारा 17 जुलाई को भीड़ की आड़ में हमला हुआ. मामले में स्वामी अग्निवेश का सीधा कहना था कि उनपर हुआ हमला भाजपा सरकार द्वारा सुनियोजित था. भाजपा के खिलाफ बोलने पर उन्हें सीधा-सीधा डराया जा रहा है. जो सीधे तौर पर भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को कठघरे में खड़ा करती थी.

मुख्यमंत्री सुरक्षा काफिले पर सुनियोजित हमला करने वाला मुख्य आरोपी भैरव सिंह निम्न दर्जे का गुंडा है

ज्ञात हो, चंद महीनों पहले झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के सुरक्षा काफिले पर सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत, भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा हमला कराया गया था. सुनियोजित हमले का मुख्य आरोपी भैरव सिंह, एक निम्न दर्जे का गुंडा है. क़ानून का शिकंजा कसने पर जिसने सिविल कोर्ट राँची में खुद को सरेंडर किया था. जिसका भाजपा से पुराना सम्बन्ध है. पूरे मामले में दिलचस्प बात यह रही कि बाबूलाल मरांडी जैसे तथाकथित सिद्धांतों! वाले भाजपा नेता द्वारा ऐसे सड़क छाप गुंड़े के लिए “जी” शब्द का प्रयोग किया गया था. और उसकी सुरक्षा की मांग की गयी थी. 

अब भैरव सिंह को बेल मिल चुकी है और वह बाहर है. इस बार भी भाजपा विचारधारा द्वारा लोकतंत्र के मूल्यों को तार-तार किया गया. एक तरफ जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में शिक्षा को बढ़ावा दे, युवाओं को बुद्धिजीवी नागरिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं भाजपा मानसिकता एक छोटे गुंडे को प्रोत्साहित कर बड़ा गुंडा बना रहा है. भैरव सिंह के बाहर आने पर राज्य में उस मानसिकता द्वारा खुशियां ऐसे मनाई जा रही है – जैसे वह कोई देश भक्त हो और राजनीतिक जेल काट कर बाहर आया हो. रांची शहर में उसके स्वागत का होर्डिंग-पोस्टर लगाया गया है. आखिर भाजपा-संघ विचारधारा राज्य के युवाओं को क्या सन्देश देना चाहता है? क्या वह गुंडों की फ़ौज पैदा कर राज्य को अशांत करना चाहते हैं.

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