भाजपा के राजनीतिक षड्यंत्र के बावजूद श्री हेमन्त का संयमित रहना उनके व्यक्तिव का दर्शन

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सौगात

केन्द्रीय भाजपा के राजनीतिक षड्यंत्रकारी नीतियों के बावजूद हेमंत सोरेन का लोकतांत्रिक और संयमित रहते हुए लगातार राज्य के विकास को तरजीह देना क़ाबिले तारीफ 

यदि योगी आदित्यनाथ के सुरक्षा काफिले पर ऐसा हमला होता, भाजपा कार्यकर्ताओं का तांडव स्तर क्या होता? 

राँची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक वर्षीय कार्यकाल राज्य के विकास को समर्पित रहा है। नतीजतन विपक्षी पार्टी की जंग लड़ रही भाजपा के पास, व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री व राज्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचने के अलावा कोई अन्य मार्ग शेष नहीं  बचा। विधानसभा चुनाव से लेकर उप चुनाव के दौर तक, खुली तौर पर भाजपा की षड्यंत्रकारी नीतियाँ दिखी। यही राजनैतिक शैली कोरोना संकट के समय केंद्रीय ताकत का प्रयोग कर राज्य को आर्थिक पंगु बनाने या युवती हत्याकांड के मद्देनज़र मुख्यमंत्री के सुरक्षा काफ़िले पर हमला, इसी सत्य को उजागर करती है। 

लेकिन, इस दौरान मुख्यंमत्री हेमंत सोरेन का व्यवहार न केवल संयमित बल्कि लोकतांत्रिक रहा। साथ ही राज्य में पुलिस बल की व्यवस्था भी व्यवहारिक के साथ क़ानून सम्मत रहा है। इसी का फायदा उठाते हुए भाजपा नेता अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकते हुए, षड्यंत्र से लेकर हर प्रकार के गोरख-धंधे जैसी तमाम हथकड़े अपनाते दिखे। षड्यंत्र की पराकाष्ठा का अंदाजा संयमित मुख्यमंत्री के सुरक्षा काफिले पर हुए हमले की घटना से समझा जा सकता है। आम जनता हेमंत सरकार की सयमित होने का अर्थ इससे भी समझ सकते है कि यदि यह हमला योगी आदित्यनाथ के सुरक्षा काफ़िले हुआ होता, तो उनकी कार्यप्रणाली के मातहत तांडव का स्तर क्या होता!  

भाजपा नेता द्वारा एक मुख्यमंत्री को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर किया गया अपमानित, मुख्यमंत्री ने नहीं किया पलटवार 

विधानसभा से लेकर उप चुनाव तक भाजपाइयों ने गंदी राजनीति का परिचय दिया है। भाजपा के कई बड़े नेता विशेष कर दो पूर्व मुख्यमंत्री, बाबूलाल मरांडी व रघुवर दास ने अपनी नैतिकता का पतन करते हुए, व्यक्तिगत रूप से सोरेन परिवार हमला बोला, जो न केवल लोकतांत्रिक बल्कि राज्य की अखंडता पर हमला हो सकता है। जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमेशा तमाम ऐसे मामलों को राज्य के विकास में अवरोध मानते हुए, गंभीरता पूर्वक, अपनी बड़ी सोच का परिचय देते हुए कभी तरजीह नहीं दिया। जो युवा भारत के दृष्टिकोण से देश के महापुरुषों के विचारधारा के मातहत नयी शुरुआत हो सकती है। 

ज्ञात हो कि 2019 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संघीय विचारधारा के अनुरूप, हेमंत सोरेन पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर मानसिक प्रताड़ना के मद्देनजर हमला किया। लेकिन हेमंत सोरेन ने अपमान का घूंट पी कर भी कभी ऐसे घृणित मानसिकता के साथ पलटवार नहीं किया, बल्कि वह राज्य की जनता को भाजपा शासन की गलत नीतियों के मातहत होने वाली लूट विचारधारा की व्याख्या कर, सत्य से जनता को अवगत कराते रहे। 

शायद जनता ने उनकी इस मानसिकता को समझा और सराहना के तौर पर इन्हें राज्य की बाग़-डोर सौपी। हां, हेमंत सोरेन ने कभी अन्याय के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि हर मामले में जनता के समक्ष कानून का सहारा लेकर, उन्होंने आम नागरिक की तरह, अधिकारों का प्रयोग कर स्पष्ट उदाहरण पेश किया। 

जनता के दिलों में हेमंत ने मेहनत से बनायी है जगह, बौखलाए भाजपा नेता आकाओं की मदद से कर रहे हैं मुख्यमंत्री को परेशान

कोरोना संकट के चरम दौर में अडिग हो जब हेमंत सोरेन अपने कामों से जनता के दिलों तक पहुंचने लगे, तो भाजपाइयों के आंखो में उतनी ही तेजी से खटकने भी लगे। बौखलाहट में भाजपा नेता केंद्र में बैठे आकाओं की ताकत के मदद से मुख्यमंत्री को परेशान करने के मुहिम में जुट गए। कोरोना संकट में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा डीवीसी बकाया कटौती, जनता की भलाई के मातहत किसी प्रकार का आर्थिक मदद न पहुंचाना, इसी मुहीम का हिस्सा है। राज्य की जनता के लिए यह गर्व घड़ी हो सकती है कि उनका मुख्यमंत्री राज्य विकास के मातहत विचलित न होते हुए हर मुश्किल का सामना डट कर किया और कर रहे हैं। 

ओरमांझी घटना के बावजूद साहसी मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह संयमित हो आम लोगों की सुनी समस्याएं 

झारखंड के साहसिक मुख्यमंत्री का राज्य के जनता के प्रति प्रतिबद्धता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि, ओरमांझी हत्याकांड के आड़ में उनके सुरक्षा काफ़िले पर हुए हमले के बावजूद न केवल वे सयमित रहे रहे, बल्कि रोज की भांति जनता की समस्या सुन कर अदम्य साहस का परिचय दिया। ज्ञात हो जब पश्चिम बंगाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के काफिले पर कुछ लोगों ने हमला किया, तो भाजपा नेताओं के हंगामें का स्तर क्या रहा। लेकिन इस संवेदनशील मसले में हेमंत सोरेन द्वारा किसी तरह की बयानबाजी या राजनीतिक लाभ न उठाना उनके व्यक्तित्व का दर्शन है।

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