5 बरस युवाओं के भविष्य से खेलने वाली BJP मना रही है “युवा विश्वासघात दिवस”

युवा विश्वासघात दिवस

सीधी नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ी क्या युवा नहीं हैं, कोरोना महामारी व केंद्री नीतियों से आयी आर्थिक संकट के दौर में बेरोजगारी भत्ता युवाओं के लिए ही है

हेमंत सरकार की उपलब्धियों के बयार में बेरोजगार भाजपा के पास केवल भ्रम की राजनीति ही एक मात्र सहारा 

रांची। हेमंत सरकार के उपलब्धियों के बयार में सत्ता खो चुकी भाजपा नेताओं का बेरोजगार होने का सच झारखंड में उभरा है। इस खीज में वह खुद के अस्तित्व को झारखंड राजनीति में जिन्दा रखने के लिए तमाम तरह के हथकंडे अपनाने से नहीं चुक रही। ज़मीनी मुद्दों के आभाव में सब निरर्थक साबित हुए। ऐसे में प्रतीत होता है कि अब भाजपा नेताओं के पास केवल भ्रम मौकापरस्ती की राजनीति के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं शेष नहीं बचा है। ज्ञात हो कोरोना त्रासदी के बाद झारखंड देश भर में पहला राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं को सीधी नियुक्ति कर रोजगार मुहैया किया।

साथ ही, झारखंडी जनता को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध हो। इस दिशा में दृढ़संकल्पित काम कर करने के संकेत उनकी नीतियां देती है। जिसके मेंअक्स में कोरोना काल में, जब केन्द्रीय भाजपा एक्ट ऑफ़ गॉड का विधवा विलाप के सच पर झारखंड में कई युवाओं की नियुक्ति व पारदर्शी पोस्टिंग भारी पड़े। तो ऐसे में युवाओं को नौकरी देने के नाम पर झारखंड मोमेंटम का छल व अनुबंध पर नौकरी दे युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के सच से जुड़ी बीजेपी को “युवा विश्वासघात दिवस” जैसा प्रोपगेंडा राजनीतिक ज़मीन बचाने के लिए राचन ही पड़ता है। लेकिन “युवा विश्वासघात दिवस” का मंच उपर्युक्त मंच भी हो सकता है। जहाँ भाजपा को युवाओं के भविष्य के साथ किये गए खिलवाड़ पर जवाब देना चाहिए।

युवा के मौजूदा सवाल हताश, निराश और कुंठित भर नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से उम्मीद करती सवाल 

मौजूदा दौर में झारखंडी युवाओं का सत्ता से सवाल हताशा, निराशा या कुंठा से भरी नहीं है। बल्कि उसके सवाल मुख्यमंत्री से उम्मीद करने के सच के साथ जुड़ी है। और हेमंत सोरेन भी उनके वाजिब समस्याओं से सवालों का हल निकालने के सच के साथ जुडी है। जिस भाजपा मानसिकता को राजनीतिक बिसात में उम्मीद व नउम्मीद के बीच की महीन रेखा का बोध न हो। उस मानसिकता की राजनीतिक बुनियाद भ्रम या मौकापरस्ती के बैसाखी पर खड़ी हो सकती है। और भाजपा द्वारा “युवा विश्वासघात दिवस” मनाया जाना इसी मानसिकता की एक कड़ी भर हो सकती है। 

नउम्मीद की व्याख्या। जहाँ अधिकार के एवज में युवा को सरकारी पुलिसिया डंडा पीठ पर नसीब हो।  जहाँ रघुवर सत्ता की नीतियां पूरे पांच साल JPSC और JSSC जैसी संस्था को परीक्षा ही न लेने दे। नियुक्ति की पेंच भी उसी सत्ता द्वारा बाहरियों के लाभ पहुंचाने के मद्देनजर फंसा दिए जाए। जिसके अक्स में शिक्षक बने हजारों युवाओं के भविष्य अंधकार में धकेलने का सच उभरे। जहाँ हताश, निराश और कुंठित युवा उस सत्ता को ज़मीनी हकीकत दिखाए। और वह युवा सवाल मुख्यमंत्री से भविष्य को लेकर उम्मीद लगाए। तब उम्मीद व नउम्मीद को समझा जा सकता है। और ऐसे में भाजपा जब “युवा विश्वासघात दिवस” मनाती है। तो भ्रम और मौकापरस्ती की राजनीति को आसानी से समझा जा सकता है।  

सीधी न्युक्ति पाने वाले प्रतिभावान खिलाड़ी युवा है न कि बुर्जुग 

18 मार्च को युवा विश्वासघात दिवस मानने वाली बीजेपी मासिकता को क्यों 17 मार्च को 36 प्रतिभावान खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति से मतलब नहीं है? क्या नौकरी पाने वाले वे तमाम खिलाड़ी युवा नहीं हैं। खिलाड़ियों से प्लेट सर्व कराने के मद्देनजर, भाजपा को इन युवाओं से मतलब इसलिए नहीं है क्योंकि वह युवा बाहरी नहीं बल्कि झारखंडी हैं। और भाजपा को झारखंडी अधिकार, झारखंडी खुशहाल भविष्य से कोई लेना-देना नहीं होता। इसलिए तो उसे मुख्यमंत्री के 5,000 और 7,000 सालाना बेरोजगारी भत्ते की घोषणा से भी कोई लेना देना नहीं है। क्या बेरोजगारी भत्ता बुजुर्गों को मिलेगी। मसलन, भाजपा के इस छलावे को भ्रम व मौकापरस्ती ही का जा सकता है।

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