निजी क्षेत्र में 75% आरक्षण

केन्द्र की निजीकरण नीति के दौर में वरदान साबित होगा निजी क्षेत्र में 75% आरक्षण

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निजीकरण के कैनवास में लाखों कामगार व बेरोजगार झारखंडियों के लिए, हेमंत सोरेन का निजी क्षेत्र में 75% आरक्षण न केवल वरदान साबित होगा, केन्द्रीय नीति का सटीक जवाब भी माना जा सकता है। 

  • निजी क्षेत्र में स्थानीय को 75% आरक्षण की घोषणा
  • अवहेलना की स्थिति में कंपनी पर 2 लाख तक का जुर्माना
  • कंपनियों के पंजीकरण व कर्मियों की ऑनलाइन जानकारी के प्रावधान से पुख्ता हुआ कानून

रांची। केन्द्रीय नीतियों के अक्स में जब निजीकरण इस रूप में उभरे। जहाँ कॉर्पोरेट मित्रों को देश का हर सरकारी संस्थान मोदी सत्ता लूटा देने पर आमादा हो। जहाँ दलित, आदिवासी, पिछड़ा समेत तामाम को प्राप्त आरक्षण की लकीर वह सत्ता 6 वर्ष में ही मिटाने लगे। जहाँ किसान आन्दोलन के दिन शतक पार कर ले। बैंककर्मी आंदोलनरत हो। और केन्द्रीय सत्ता तानाशाही के आसरे नीतियों के अमलीकरण में लगातार बढ़े। तो जननेता को जनता के पक्ष में बड़े फैसले लेने पड़ते हैं।       

15 मार्च का दिन, झारखंड विधानसभा ऐसे ही ऐतिहासिक फैसले लेने के लिए जाना जा सकता है। जहाँ राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन का हिम्मती घोषणा केंद्र की उस नीति को जवाब भी हो सकता है। जहाँ घोषणा से झारखंड में अब संचालित निजी क्षेत्र के कल-कारखानों व कंपनियों में स्थानीय कर्मियों के लिए 75% आरक्षण के प्रावधान सुनिश्चित होते जाते हैं। जाहिर है भविष्य में दूसरे गैर भाजपा शासित राज्य भी इस नीति को अपनाएंगे। 

मसलन, मुख्यमंत्री की सोच राज्य की प्रतिभा को बाहर जाने से रोकने की दिशा कारगर कदम है। कानून का पालन सुनिश्चित हो। इसके लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि अवहेलना की स्थिति में संबंधित कंपनियों को जुर्माना के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई के दौर से भी गुजरना पड़ सकता है। 

निजी कंपनियां आरक्षण का पालन सुनिश्चित करें, इसके लिए भी किये गए हैं प्रावधान 

स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना सुनिश्चित हो, इसके लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया है। निजी कंपनियों को पंजीकरण करना होगा। और हर तीन महीने में उसे कर्मियों की सूची ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक करनी होगी। कंपनी उन्ही लोगों को रोजगार दे सकेगी, जिन्होंने पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया हो। 10 या उससे अधिक कर्मियों के साथ काम करने वाली कंपनियों को पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करना अनिवार्य होगा, ताकि सरकार को वहां काम कर रहे कर्मियों की जानकारी मिल सके। 

कानून का पालन नहीं करने पर जुर्माना का है प्रावधान 

हेमंत सरकार के इस अहम फैसले पर झारखंड जैसे गरीब राज्य के लाखों लोगों का भविष्य टिका है। कंपनियां क़ानून को नजरअंदाज न करें इसके लिए सरकार द्वारा जुर्माने व कानूनी कार्यवाई का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ़ तौर पर कहा कि अवहेलना की स्थिति में कंपनियों पर 10,000 से लेकर 2 लाख तक जुर्माना तो लगेगा ही, कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। और दोष सिद्ध होने की स्थिति में कंपनियों पर प्रतिदिन 1,000 रुपये की पेनल्टी का भी प्रावधान है।

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