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जांच के बिना ही निगम प्रबंधन क्यों रांची के गरीब दुकानदारों को उजाड़ रही है? 

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जांच के बिना ही निगम प्रबंधन ने सुनाये तुगलकी फ़रमान 

झारखंड राज्य के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के कार्यशैली पर नज़र दौड़ायें तो यह साफ़ हो जाता है कि वह यहाँ की समस्याओं की गहराई में जाने के बजाय ग़रीबों को उजाड़ कर समस्याओं का समाधान करन चाहती है। साथ ही अख़बार, टीवी चैनल, बुद्धिजीवियों और पत्रकार इस मुद्दे पर माथापच्ची का दिखावा तो करते  है लेकिन समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता।

रांची के अटल स्मृति वेंडर मार्केट में दुकानों के संदेहास्पद आवंटन के बाद कचहरी चौक से लेकर सर्जना चौक तक की सड़क को 1 जुलाई से नो वेंडिंग जोन (गैर विक्रय क्षेत्र) घोषित कर दिया गया हैजिसका मतलब साफ़ है कि इस दायरे में अब फुटपाथ पर दुकानें लगाना गैरकानूनी होगा नगर आयुक्त मनोज कुमार ने इससे संबंधित आदेश जारी भी कर चुके हैं इस आदेश के मद्देनजर रांची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम ने रविवार (छुट्टी के दिन) को लाउडस्पीकर के जरिये यह घोषणा भी कर दी। यह चेतावनी भी घोषणा के साथ दी गयी है कि यदि कोई दुकानदार आदेश की अवहेलना करता है, तो उसका सामान ज़ब्त कर उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी 

ज्ञात हो कि नगर निगम द्वारा कचहरी में वेंडर मार्केट बनाया गया है जिसमे 471 दुकानें है और प्रबंधन  दावा करती है कि उन्होंने उसमें से 347 फुटपाथियों को दुकानें आवंटित भी कर दी हैं। साथ ही यह भी दावा करती है कि जिन्हें दुकानें आवंटित की गयी हैं, वे सभी दुकान कचहरी चौक से लेकर सर्जना चौक तक के फूटपाथ पर लगाते थे। लेकिन मार्केट में बनी दुकानों को आवंटन को टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्यों ने फ़र्ज़ी माना था। 16 अप्रैल को हुई टाउन वेडिंग कमिटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि मार्केट में दुकान लेनेवाले फर्जी दुकानदारों का री-वेरिफिकेशन किया जायेगा। जिसकी जांच अब तक अधर में है।

 राँची नगर निगम के इस रोक लगाने को लेकर झारखंड शिक्षित बेरोजगार फुटपाथ दुकानदार महासंघ सड़क पर दुकान लगाने को लेकर अड़ा है। उनका कहना है कि यह एक तुगलकी फरमान है जिससे सड़क किनारे रोज़गार करनेवाले हजारों घरों के चूल्हे बुझ जायेंगेविधि व्यवस्था का हवाला देते हुए नगर निगम ने सदर एसडीओ गरिमा सिंह को पत्र लिख कर सोमवार को अभियान चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट को प्रति नियुक्त करने की मांग की है

मसलन, यहाँ दुकान लगाने वाले लोग भी इस देश के नागरिक हैं, इसलिए उनको रोज़ी-रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा और आवास की सुविधा देना इस सरकार की जि़म्मेदारी है। सरकार शहरों को आधुनिक बनाये, सड़कों को चौड़ा करे, यातायात की व्यवस्था को ठीक करे – इससे जनता को कोई परहेज़ नहीं, लेकिन ऐसा करने की प्रक्रिया में सरकार यदि आम जनता को निष्पक्ष जांच व ठोस समाधान के बिना उजाड़े, तो स्पष्ट हो जाता है कि यह सरकार केवल पूंजीपतियों की है और उनके हितों के लिए ग़रीबों को कुचलती है।

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