सर्वदलीय सुझावों को मान हेमन्त सोरेन ने जाता दिया है कि उन्हें समन्वय नीति में है विश्वास

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सर्वदलीय जनप्रतिनिधियों के सुझाव

संघीय प्रणाली का मतलब ही होता है कि केंद्र राज्यों की बात सुने, लेकिन मोदी सरकार में हो ठीक उलट रहा है. जबकि हेमंत सोरेन लगातार सर्वदलीय बैठक बुलाना, दर्शाता है कि उन्हें समन्वय नीति पर हैं विश्वास

अगर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी दूसरों की बात सुनने के बजाय केवल अपनी बात करते हैं. तो इसमें क्या गलत है  

रांची: कोरोना संक्रमण को देश से खत्म करने के मद्देनजर, केंद्र की मोदी सरकार सहयोगात्मक नीति अपनाने का दावा तो करे. लेकिन, धरातल पर उसकी रणनीति या रवैया यदि उस दावे को सिरे से ख़ारिज करे. और 21 मई 2021, दिन गुरुवार, प्रधानमंत्री मोदी उक्त मामले में, 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात भी करे. लेकिन, उस बातचीत में राज्यों को अपना पक्ष रखने का मौका न मिले. और पूरी बातचीत केवल एक पक्षीय होने के सच को उभारे. बैठक में पीएम के सिवाय किसी भी मुख्यमंत्रियों को राज्य की स्थिति बयान करने का मौका न मिले. तो मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा प्रधानमंत्री के उस एकतरफा नीति पर पूर्व में उठाए गए सवाल की गंभीरता को समझा जा सकता है.

ज्ञात हो, पूर्व में जब झारखंड कोरोना महामारी के तांडव को झेल रहा था. उस दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मोदी जी द्वारा फोन पर किये गए मन की बात पर सवाल उठा था. जिसके खीजते में बीजेपी नेताओं व भाजपा आईटी सेल ने श्री सोरेन पर मर्यादा हनन जैसे बेतुके आरोप तक लगाने से नहीं चूके थे. लेकिन, आज जब केंद्र का फिर से तानाशाही रवैया, एक पक्षीय बैठक के तौर पर उजागर हुआ है. तो उन तमाम भाजपा नेताओं ने मुंह में दही जमा लिए. चूँकि पीएम की नीति साफ़ तौर पर संघीय ढ़ांचे का उल्लंघन करती है. तो ऐसे में झारखंडी पत्रवीर को मामले में बयान देना चाहिए. ज्ञात हो, संघीय ढांचे का मतलब केंद्र और राज्य का आपसी समन्यव होता है. जहाँ राज्य अपनी समस्याओं को केंद्र के समक्ष रखता है. 

मुख्यमंत्री हेमन्त ने सर्वदलीय बैठक बुला पेश किया उदाहरण

मौजूदा दौर के बीजेपी शासन में केंद्र की नीति संघीय नियमों से ठीक उलट है. उसकी नीतियां जहाँ संघीय ढांचे का धज्जियाँ उड़ा रही है तो वहीं झारखंड उस ढाँचे को बचाए रखने के लिए मजबूती के साथ खड़ा है. ज्ञात हो, महामारी के शुरुआती दौर में मुख्यमंत्री हेमन्त ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर उदाहरण पेश किया था. जहाँ मुख्यमंत्री ने सत्ता, विपक्ष व तमाम जनप्रतिनिधियों के सुझाव को सुना. और सभी कारगर सहयोग व सुझावों पर विश्वास भी जताया. जो दर्शाता है कि हेमन्त सोरेन का केंद्र नीतियों के विपरीत समन्वय की नीति भरोसा रखते हैं. 

पीएम की नीति पर सवाल उठा हेमन्त सोरेन ने बीजेपी विचारधारा की सच्चाई को किया था उजागर 

ज्ञात हो, कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को फोन आय़ा था. बाद में मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट किया. मुख्यमंत्री ने लिखा,”प्रधानमंत्री ने सिर्फ अपने मन की बात की. बेहतर होता यदि वो काम की बात करते और काम की बात सुनते”. इसके बाद केंद्र, प्रदेश बीजेपी नेताओं व भाजपा आईटी सेल ने एक स्वर में मुख्यमंत्री की आलोचना की. बीजेपी नेताओं ने यहां तक आरोप लगा कि हेमन्त सोरेन ने संवैधानिक पद की गरिमा को धूमिल किया है. लेकिन आज जब प्रधानमंत्री संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, तो अंधभक्त व बीजेपी नेता खामोश है. उनमें इतनी भी नैतिक शक्ति नहीं बची कि कहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सवाल सही था.

सर्वदलीय बैठक कर लगाया गया आंशिक लॉकडाउन साबित हुआ एक बेहतर निर्णय, राज्य में स्थिति हो रही है तेजी से सामान्य

केंद्र की नीति के विपरीत हेमन्त सोरेन ने महामारी से निपटने के लिए शुरुआत में ही, 19 अप्रैल को सर्वदलीय बैठक बुलाई. बैठक में सीएम ने राज्य के तमाम राजनीतिक दलों के साथ मशवरा किए. उन्होंने पक्ष-विपक्ष के सभी नेताओं सुझाव माँगा कि कोरोना से जंग हम कैसे जीतेंगे. सभी के सुझावों को सुनने के बाद सीएम ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक कर, 22 अप्रैल को पहली आंशिक लॉकडाउन, स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह की घोषणा की. इसका असर यह रहा कि राज्य में न ही पैनिक माहौल की स्थिति आयी. और महामारी से लड़ने में राजनीतिक दलों की भागीदारी भी सुनिश्चित हुई. 

कोरोना से निपटने में कारगर, सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव को मुख्यमंत्री हेमंत ने धैर्य के साथ सुना और पालन भी किया 

राज्य में जब कोरोना संक्रमण का प्रसार तेजी से पीक की तरफ जाने लगा. तो ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा बढ़ा. तो कोई भी निर्णय लेने से पहले सीएम ने सत्ता व विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर ही लिया. अपने आवासीय कार्यालय से हेमन्त ने संथाल, कोल्हान, पलामू, दक्षिणी और उत्तरी छोटानागपुर के जनप्रतिनिधियों से बात की. बैठक के बाद सीएम ने यही कहा कि उनके सुझाव को मानकर ही राज्य सरकार कोरोना के दूसरी लहर से जीतेगी.  और राज्य के लिए अच्छी खबर है कि सरकार तीसरे लहर से निपटने के लिए अभी से ही कार्य योजना बनाने में जुट चुकी है.  

पहली के बाद दूसरी और अब तीसरी लहर से जीतने के लिए भी मांग रहे हैं मुख्यमंत्री सभी का सहयोग

संक्रमण की पहली लहर (2020) से ही हेमन्त सोरेन कहते रहे हैं कि यह लड़ाई हमें मिलकर लड़ना है. पहली लहर में हम सभी लोगों ने मिलकर संक्रमण के नियंत्रण और प्रसार को रोकने का काम किया था. पहली लड़ाई तो हम जीते लेकिन केन्द्रीय सामयिक सूचना के अभाव में अचानक संक्रमण की दूसरी लहर फिर से आ गयी. अब तीसरी लहर की भी चर्चा है. ऐसे में यह लड़ाई हम तभी जीत पाएंगे जब सभी का सहयोग मिलेगा. जाहिर है कि हेमन्त सोरेन की यही सोच उन्हें केंद्र की नीतियों से अलग स्थान प्रदान करती है.

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