झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की रणनीति कि की थी तारीफ, ई-पास सिस्टम का भी किया सराहना

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24 घंटे में शुरू हुआ ऑक्सीजन का उत्पादन

सीएम के ठोस निर्णय का असर यह है कि आज राजधानी समेत पूरे राज्य में कोरोना संक्रमण की दर में आ रही है तेजी से कमी.  झारखंड हाईकोर्ट ने फिर सरकार के प्रबंधन को सराहा

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में देश भर के हाई कोर्ट ने केंद्र से लेकर राज्यों के सरकारों पर सख्त टिप्पणी की. हालांकि, कई बुद्धिजीवियों ने केंद्र सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मंशे पर सवाल भी उठाया. लेकिन, तमाम परिस्थितियों के बीच पूरे देश भर में पहली बार ऐसा देखा गया. जहाँ झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सरकार के प्रबंधन पर संतुष्टि जाहिर की. साथ ही उसने हेमंत सरकार की प्रबंधन को लेकर एक से अधिक बार सराहना भी की. जो संकट काल में किसी सरकार द्वारा की गयी इमानदार मेहनत का पैमाना हो सकता है. और साथ ही उस सरकार की जनता के प्रति संवेदनशीलता का आकलन भी. 

दिल्ली हाईकोर्ट 

कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा, कि वह दवा व संसाधन के आवंटन में विफल रही है. दिल्ली हाई कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर कोई केंद्र सरकार, राज्य सरकार या फिर स्थानीय प्रशासन के किसी अधिकारी ने ऑक्सीजन सप्लाई में रुकावट डाली तो उसे फांसी पर चढ़ा देंगे.

हाईकोर्ट मद्रास की टिप्पणी

मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि अगर 2 मई तक कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो मतगणना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी. कोर्ट ने यह भी कहा- आपकी संस्था कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है. 

पटना हाईकोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट व गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर करने का निर्देश दिया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इलाज में प्रयोग होने वाले रेमेडिसविर इंजेक्‍शन इतनी अधिक कीमत पर क्यों बेचे जा रहे हैं. जब आप कहते हैं कि मरीजों के लिए पर्याप्त बेड-ऑक्सीजन मौजूद हैं. तो लोग लाइनों में क्यों लगे हुए हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना संक्रमण पर चिंता जाहिर करते हुए योगी सरकार पर सख्त टिप्पणी की. कहा कि यूपी के गांवों, छोटे कस्बों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति ‘राम भरोसे’ है.

कोरोना के बढ़ते मामलों और मरीजों को अस्पतालों में समय पर इलाज नहीं मिल पाने पर पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार पर सख्त रुख दिखाया. कोर्ट ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है. यदि कोई प्राइवेट अस्पताल किसी जरूरतमंद को समय पर ट्रीटमेंट देने में नाकाम रहा, तो वह मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा.

हेमंत सरकार को लेकर झारखंड हाईकोर्ट 

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की शुरुआत में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त टिप्पणी की थी. लेकिन, जब हेमंत सरकार की रणनीति के कारण झारखंड अल्प संसाधन में भी महामारी से तेज रफ़्तार में लड़ने में कामयाब रहा. संक्रमण दर कम हुए. तेज रफ़्तार से अस्पातालों में बेड बढाए गए, ऑक्सीजन की पूर्ति हुई, नजी अस्पातालों के मंशे पर लगाम लगाया गया. तब उसी हाईकोर्ट ने बीजेपी नेताओं के राजनीति से इतर, हेमंत सोरेन सरकार की रणनीति का तारीफ की. जो बताती है कि संकटकाल में हेमंत सरकार ने अच्छा काम किया. ज्ञात हो, संक्रमण दर घटकर आज 150 के करीब रह गया है. 

कोर्ट ने कहा, भीषण संक्रमण काल में राज्य सरकार कर रही अच्छा प्रयास 

6 मई 2021,  स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार के कार्यों की तारीफ की. कोर्ट ने कहा कि कोरोना के इस भीषण संक्रमण काल में राज्य सरकार अच्छा प्रयास कर रही हैं. हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्यवासियों के प्रति स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाते हुए हेमंत सरकार आगे बढ़ रही है, जो सराहनीय है। सरकार आम नागरिकों की मदद करते हुए कोरोना से भी लड़ रही है.

ई-पास को लेकर भी भाजपा ने दिखाया छोटा दिल, लेकिन हाईकोर्ट ने की सराहना 

लॉकडाउन की अवधि में ई-पास सिस्टम को लेकर तीन दिनों की विशेष छूट देने के नाम पर हेमंत सरकार को बीजेपी निशाने पर लेने से नहीं चुकी. कोरोना संक्रमण के दौरान अपने गिरेबान झाँकने के बजाय, भाजपा केवल भ्रम फैलाने की राजनीति करती रही. लेकिन ई-पास सिस्टम को लेकर झारखंड हाईकोर्ट की सराहना ने झारखंड भाजपा की राजनीति को आईना दिखाया है. 

झारखंड हाईकोर्ट ने ई-पास खत्म करने को लेकर दायर याचिका को खारिज करते कहा कि ई-पास जरूरी है. सब्जी और दूध लाने के लिए वाहन का उपयोग करने की जरूरत नहीं है वे पैदल भी जा सकते हैं. कोर्ट ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हेमंत सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को नीतिगत बताया है. आशा है कि हाईकोर्ट के निर्णय से झारखंड भाजपा के नेताओं को सदबुद्धि आयी होगी.

हेमंत सरकार की नीतिगत निर्णयों का ही असर है कि संक्रमण दर में कमी आयी 

झारखंड में हेमंत सरकार के नीतिगत निर्णयों का ही असर है कि राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण दर में तेजी से कमी आयी है. और दर के मामले में झारखंड तीसरे स्थान पर है. रांची जहां संक्रमण की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा संक्रमण का असर दिखा था, वहां आज पॉजिटिव मरीज महज 150 के करीब हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सही समय पर सही प्रबंधन के साथ लिए गए निर्णय, स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति में तेजी से सुधार और लॉकडाउन के पालन में प्रमुखता से ई-पास जैसे उठाये गए कदम का यह परिणाम है.

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