मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना- पशु झारखंडियों का असली धन, पशुपालन में अग्रणी होगा झारखण्ड : हेमन्त सोरेन

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना – पशुपालन क्षेत्र में विकास के मद्देनजर हेमंत सरकार ने खींची बड़ी लकीर। योजना के दायरे में आयेंगे 50000 से अधिक झारखंडी लाभुक। 

रांची। देश का ऐसा क्षेत्र, जहाँ गाँव में जंगल नहीं जंगल में गाँव हो। ऐसा प्रदेश जिसका जीवन का अक्स ही पर्यावरण हो। जहाँ धर्म का अर्थ प्राकृतिक समन्वयता हो। जहाँ प्रकृतिक के तमाम रचना के अर्थ के साथ जीवन-यापन उसकी नियति हो। जहाँ मांदर की थाप और प्राकृतिक संगीत ही भैरवी राग हो, जिसकी गूँज में लोग नृत्य करते हों। जहाँ के पेड़ भी महुआ जैसे मदहोशी में तर करने वाले फल बरसाए। वह प्रदेश तो केवल झारखंड ही हो सकता है।      

प्राकृतिक की नीरवता का अनूठा सच लिए प्रदेश, 14 वर्षों तक छले जाने के बावजूद मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बने। तो इनकार नहीं कि इस मिट्टी में कुछ बात ज़रूर हो सकती है। और मौजूदा दौर में सत्ता पर बैठी झारखंडी मानसिकता, मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अक्स में कहे, झारखण्डी पशुपालकों के लिए पशु असली धन है, पशुपालन में झारखण्ड अग्रणी होगा। तो ज़रूर झारखंडी मानसिकता को एहसास हो सकता है कि मौजूदा सत्ता को, प्रदेश की संस्कृति का भान है। और वह इसी मिट्टी में रचा-बसा हो सकता है।    

आदिवासी बहुल झारखण्ड को कृषक राज्य की पहचान के जद्दोजहद के मद्देनजर शुरूआती कदम ही पशुपालन हो। जो राज्य की वर्षों पुरानी परंपरा का अक्स हो, उसे व्यवसायिक रूप देना सत्ता की कावाद बन जाये। तो निश्चित रूप से झारखंडी कैनवास में योजना सफलता के झंडे गाड़ सकती है। जिस प्रदेश की महान परंपरा जिसकी मानसिकता पशुवों को जानवर नहीं बल्कि धन व साथी मानने की प्रेरणा दे। वह प्रदेश में पशुपालन जैसे योजना किस ऊँचाई को छू सकता है। जो विश्व में सन्देश भी हो सकता है कि प्राकृतिक संरक्षण भी रोजी-रोटी मुहैया करा सकती है। 

आत्मनिर्भरता हेतु मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में योजनाओं का हुआ समायोजन

ज्ञात हो, झारखण्ड की विषम भौगोलिक स्थिति, पूर्व सत्ता की लूट के अक्स तले रोज़गार के अभाव के मद्देनज़र पलायन एक बड़ी समस्या बन कर उभरी। जिसका सच कोरोना त्रासदी में लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी के तौर पर सामने आया। जिन्हें रोज़गार देना मौजूदा सरकार ने ज़िम्मेदारी मानते हुए चुनौती के रूप में लिया है।

दरअसल, हेमन्त सरकार की उक्त योजना भाजपा सत्ता की उस सच को उभारती है, जहाँ स्किल्ड इण्डिया के अक्स में स्किल्ड मज़दूरों को अनस्किल्ड बनाने की शाजिस छुपी हो सकती है। जहाँ परंपरागत कार्यों में स्किल्ड मज़दूरों की ज़मीन अधिग्रहण कर अनस्किल्ड बना दिया गया। और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में उन्हें पलायन करना पड़ा।  

मसलन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सराहनीय पहल राज्य में फिर से गंगा को उसी दिशा में बहाएगी। जहाँ अपनी पारंपरिक कार्यों के मातहत जनता फिर से खुद को स्किल्ड पायेंगा। और पूरी रूचि से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगा। सरकार द्वारा योजना में कई तरह की सुविधाओं और अनुदान के प्रावधानों का समावेश किये जाने से पशुपालन के क्षेत्र में झारखण्ड निश्चित रूप से आगे बढ़ सकता है। 

युजना का उद्देश्य :  

  • राज्य में दूध, मांस एवं अंडा के उत्पादन में वृद्धि राज्य को आत्मनिर्भर बननायेगा।  
  • ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन स्वरोजगार तथा आमदनी का सृजन करेगा।
  • लोगों को फिर स्किल्ड करने में लगने वाले राजस्व दुरुपयोग नहीं होगा      

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत लाभ 

  • पशुपालन क्षेत्र में बकरा विकास योजना 
  • शुकर विकास योजना 
  • बैकयार्ड लेयर कुकुट योजना 
  • बॉयलर कुकुट पालन योजना 
  • बत्तख चूजा वितरण योजना
  •  गव्य विकास क्षेत्र में दो दुधारू गाय का वितरण 
  • कामधेनु डेयरी फार्मिंग अंतर्गत मिनी डेयरी के तहत 5 से 10 गाय वितरण की योजना
  • हस्त एवं विद्युत चलित चैफ कटर का वितरण
  • प्रगतिशील डेयरी कृषकों को सहायता में तकनीकी इनपुट सामग्रियों का वितरण 

नोट : विभिन्न विभागों द्वारा पशुधन विकास से संबंधित समान प्रकृति की योजनाओं को एक पटल पर क्रियान्वित करने के लिये पशुपालन प्रभाग, कल्याण विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत पूर्व से संचालित योजनाओं को समायोजित करते हुए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का संचालन शुरू किया गया है। 

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