पारा शिक्षकों के मौत पर 5 लाख तक की मदद व बच्चों की पढाई-शादी पर ऋण सुविधा

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बच्चों की पढाई-शादी पर ऋण सुविधा

पारा शिक्षकों के सेवा अवधि में मौत होने पर परिजनों को 5 लाख तक कीआर्थिक मदद व उनके बच्चों की पढ़ाई व बेटी-शादी पर मिल सकेगी ऋण सुविधा 

झारखंड में 65000 पारा शिक्षक एक ऐसा सच है जिसकी राह नीतियों की उलझनों के अक्स में उलझा सच लिए है। पूर्व की सरकारों के कैनवास में पारा शिक्षक पारा तो हैं, लेकिन शिक्षक के मायने ही बदल गए। अधिकारों के मातहत जिसमे सामाजिक सुरक्षा तक मुहैया न होने का सच भी न दिखे। परिवार का मुफलिसी से जुड़ाव ही आखिरी सच बन जाए। तो इन शिक्षण कर्मियों की सेवा अवधि मौत होने पर, आश्रित परवारों के अन्धकार का सच समझा जा सकता है। ऐसे में यह सच भी उभर सकता है कि एक उलझा दिमाग कैसे शिक्षा के माध्यम से स्वस्थ समाज को रच सकता है। 

ऐसे तमाम परिस्थितियों में झारखंड के मुखिया हेमंत सरकार का फैसला, सेवा अवधि में परिजनों को 5 लाख तक की आर्थिक मदद मुहैया कराने की वकालत करे। उनके बच्चों को पढ़ाई व बेटी के शादी पर होने वाले खर्च को समझते हुए ऋण सुविधा मुहैया कराने की भी वकालत करे। तो यह फैसला उन तमाम गरीबी से जूझ रहे पारा शिक्षकों के आश्रितों के भविष्य को सुरक्षित ज़रूर कर सकती है। और किसी सरकार की मानवीय पहलू की छाप भी इन शिक्षकों के हृदय में अंकित कर सकती है। जिसकी छाया निश्चित रूप से हमें भविष्य में बच्चों की गुणात्मक शिक्षा के रूप में देखने को मिल सकती है। 

परिजनों को आर्थिक मदद के साथ पारा शिक्षकों के बच्चों को पढ़ाई व बेटी-शादी पर मिल सकेगी ऋण सुविधा 

हेमंत सरकार का साहसिक सामाजिक सुरक्षा का फैसला, शिक्षकों की सेवा अवधि में मौत के बाद आर्थिक मदद तक ही नहीं थमता। इससे आगे बच्चों के पढाये, बेटी की शादी जैसी जटिल समस्याओं को भी सुलझा सकती है। ज्ञात हो कि हेमंत सरकार पारा शिक्षकों, प्रखंड साधन सेवी, संकुल साधन सेवी और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक व अन्य कर्मियों के अचानक मौत होने की परिस्थिति में बड़ा फैसला ले सकती है। सूत्रों की माने तो, सरकार इसके लिए एक कल्याण कोष बना सकती है। जिसमे कर्मी इस कोष की सदस्यता लेते हुए भविष्य निधि के तौर पर प्रतिमाह 200 रुपए जमा कर सकेंगे। 

जहाँ सरकार सेवा के दौरान मौत होने पर परिजनों को 5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद करेगी ही। वहीं इस कोष के मद्देनज़र असाध्य रोगों के इलाज के लिए 1 लाख रुपए, सेवा अवधि के दौरान दिव्यांग होने पर 2 लाख, अद्दर्ध दिव्यांगता होने पर डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे। यह कोष इन तमाम कर्मियों को ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराएगी। जिससे पारा शिक्षक 2 लाख तक के राशि से अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के सपने को पूरा कर पायेंगे। और डेढ़ लाख की भी सुविधा से बच्चियों की शादी कर सामाजिक दाईत्व भी निर्वाह कर सकेंगे।

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