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पत्थलगड़ी आंदोलनकारियो पर दर्ज मामलों की वापसी की अडचने जल्द होगी दूर

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कोरोना त्रासदी के बाद पत्थलगड़ी संबंधित दर्ज मामलों की वापसी की प्रक्रिया जल्द हो सकती है

राँची। ‘अनुसूचित जनजाति’ संरक्षण का ज़िम्मा संविधान सरकार को सौंपे। और पिछली सरकार की नीतियों के संरक्षण का सच उस आदिवासी के ख़ात्मे से जा जुड़े। जिसकी पहचान झारखंड में आदिवासी मूल निवासी के तौर पर हो। और आबादी के लिहाज से जिसकी संख्या 27 प्रतिशत हो। प्रकृतिक ही जिनकी रोजी-रोटी, पर्व-त्यौहार व जीवन शैली हो। जिनका दर्द हार्वर्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर, मुख्यमंत्री के शब्दों में भी महसूस हो। तो तमाम परिस्थितियां अस्तित्व की लड़ाई मद्देनज़र, पत्थलगड़ी के तौर पर विरोध का माहौल बनाए तो आश्चर्य क्यों? 

ज्ञात हो, रघुवर सरकार में पत्थलगड़ी आंदोलनकारियो पर दर्ज मामलों को हेमंत सरकार के पहले कैबिनेट बैठक में वापस लेने का फैसला, 29 दिसंबर 2019 को लिया गया था। कोरोना त्रासदी में प्रक्रिया में कुछ विलम्ब तो हुए, लेकिन संबंधित मामलों की वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। हेमंत सरकार के आदेश पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति के राय के बाद गृह विभाग ने विधि विभाग से मंतव्य मांगा गया था। विधि विभाग ने तमाम कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए फाइल को मुख्यमंत्री कार्यालय में अग्रेसित कर दी गयी है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सकती है।

मुकदमा वापसी की यह है प्रक्रिया

  • प्रत्येक जिलों की स्क्रीनिंग समिति ने दस्तावेज़ के आधार पर सभी कांडों की समीक्षा की गयी और वांछित दस्तावेज़ जैसे प्राथमिकी, केस डायरी, आरोप पत्र (चार्जशीट), स्वीकृत्यादेश, जब्ती सूची आदि के साथ मुकदमा वापसी के बिंदु पर पर्याप्त आधार दर्शाते हुए अनुशंसा एवं प्रस्ताव गृह कारा एवं आपदा प्रबंध विभाग को उपलब्ध कराया था।
  • जिलों से प्राप्त अनुशंसा, प्रस्ताव पर गृह विभाग ने विधि विभाग से आवश्यक परामर्श प्राप्त किया। इसके बाद फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी गई है।
  • विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में मंत्रिपरिषद् से अनुमोदन प्राप्ति के बाद संबंधित जिलों के उपायुक्त को विधि सम्मत कार्रवाई के लिए संसूचित किया जाएगा।
  • इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से लोक अभियोजक को कांड वापसी के लिए विधि सम्मत कार्रवाई के लिए संसूचित किया जाएगा।
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