प्राकृतिक व आकस्मिक घटनाओं में मौत होने पर परिजनों को मिलेगा जल्द आर्थिक मदद

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जल्द आर्थिक मदद

पारा शिक्षक सहित अन्य संस्थानों में कार्यरत शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों की सेवा अवधि में मौत होने पर हेमंत सरकार देगी 5 लाख की आर्थिक मदद 

वज्रपात, सांप काटने और हाथियों के शिकार होने पर भी मिलेगा मुआवजा, आपदा प्रबंधन प्राधिकार के गठन मार्ग प्रसस्त

रांची। आर्थिक रूप से पिछड़े झारखंड का सच यह भी है, जहाँ परिवार के तमाम सदस्यों के  पालन-पोषण का सच एक कमाऊ व्यक्ति जा जुड़ता है। उस कमाऊ व्यक्ति की अचानक मौत के परिस्थिति में परिवार के भविष्य की घोर अंधकार को समझा जा सकता है। झारखंड बाढ़-सुखाड़, आकाशीय बिजली गिरने जैसे प्राकृतिक आपदाओं से गुजरने वाला राज्य है। सांप, हाथी व अन्य जंगली जानवरों के शिकार भी सैकड़ों होते है। और प्रदेश में तमाम अस्वाभाविक घटनाओं के अक्स में मुआवजा की राह भी आसान न है। ऐसे में आपदाओं के मद्देनज़र, मौजूदा हेमंत सरकार की आपदा प्रबंधन प्राधिकार के गठन के कवायद की महत्ता समझी जा सकती है। 

झारखंड में पारा शिक्षक एक ऐसा सच है जिसकी राह नीतियों की उलझनों के अक्स में समस्याओं का सच लिए है। पूर्व की सरकारों के कैनवास में पारा शिक्षक पारा तो रहे, लेकिन शिक्षक के मायने ही बदल गए। अधिकारों के मातहत जिसमे सामाजिक सुरक्षा तक मुहैया न होने का सच भी दिखे। तो इन शिक्षण कर्मियों की सेवा अवधि मौत होने पर, इनके परिवार की भविष्य का सच समझा जा सकता है। ऐसे में उक्त परिस्थितियों में हेमंत सरकार का 5 लाख तक की आर्थिक मदद का फैसला इनके आश्रितों के भविष्य को सुरक्षित ज़रूर कर सकती है। और किसी सरकार की मानवीय पहलू की छाप भी इन शिक्षको के हृदय में अंकित कर सकती है। 

जल्द गठन होगा आपदा प्रबंधन प्राधिकार, त्वरित गति से मिला पाएगा मुआवजा  

ज्ञात हो, हेमंत सरकार में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की गठन की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। आशा है कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से आपदा प्रबंधन प्राधिकार का गठन जल्द हो पायेगा। जिससे आपदा से नुकसान की स्थितियों में भरपाई जल्द हो सकेगी। प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए राज्य के लोगों को जागरूक किया जा सकेगा। ज्ञात हो कि पिछली सरकारों में राज्य के घने जगंल व पहाड़ों के दोहन होने की परिस्थिति में वज्रपात राज्य में एक अनूठे सच के तौर पर उभरा है। कई लोग शिकार हुए हैं औरआर्थिक मदद भी मुआहेया न हो सकी।

घने जंगलों की खनन दोहन के अक्स में जंगली जानवरों के इलाके भी सिकुड़े हैं। जिससे राज्य में सांप काटने, हाथियों के पैरों के नीचे कई झोपडियां आती रहती है। जंगली पशुओं के गुस्से का सामना भी आम जनता को करना पड़ता है। नदियों में बाढ़ आना अब सिलसिला बन चूका है। जिसके अक्स में जान-माल का नुकसान अब राज्य का मौजूदा सच है। नदी के तटीय इलाके, जो अतिक्रमण का सच भी लिए हुए है, बाढ़ की स्थिति में कहर ढाती है। ऐसे में आपदा प्रबंधन प्राधिकार जरूरी राहत का सच बनकर स्समने आ सकता है।

आपदा मित्र व अन्य माध्यमों से युवाओं को मिलेंगे रोज़गार 

मुख्यमंत्री के आपदा प्राधिकरण गठन की सोच बेरोज़गार युवाओं के उस आशा से भी जा जुड़ते हैं। जिसके अक्स में स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर मुहैया हो सकते है। क्इयोंकि, सके तहत सरकार के प्रस्ताव में आपदा मित्र की नियुक्ति व दूसरे माध्यमों से लोगों को रोज़गार से जोड़ने का भी जिक्र है। जहाँ स्थानीय स्तर पर वॉलंटियर्स की बड़ी टीम को भी रोज़गार मिल सकेगा। जिन्हें वक्त पड़ने पर सहयोगात्मक कार्य पर लगाया जा सकेगा।

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