मरीजों की हर संभव मदद के साथ स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल भी टूटने नहीं दे रहे हेमंत सोरेन

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स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल भी टूटने नहीं दे रहे हेमंत सोरेन

केन्द्रीय द्वेष नीतियों के बावजूद मुख्यमंत्री के अभेद नीतियों के आसरे झारखंडी जनता ने संक्रमण की पहली लहर (अप्रैल-जुलाई 2020) पर पाई थी विजय. स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल न उस दौर में और न ही इस दौर में दिया गया है टूटने

मुख्यमंत्री की पहल पर वीर सेना ने बढाए मानवता के हाथ, नामकुम मिलिट्री हॉस्पिटल में कोविड मरीजों के लिए रिजर्व हुए 50 में से 48 बेड

रांची :  झारखंड के प्रति केंद्र सरकार की द्वेष व असहयोग नीति का सच कोरोना संक्रमण के पहली लहर या पहली दौर से ही खुले तौर पर सामने हो. वही केंद्र सत्ता झारखंड को उसके अधिकारों से वंचित रखे. और डीवीसी जैसे केन्द्रीय उपक्रमों को हथियार बना हेमंत सत्ता को अस्थिर करने के भी प्रयास इसी दौर में हो. जिसके मद्देनजर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में झारखंड प्रभावित हो जाए और तेजी से संक्रमित मरीज सामने आये. लेकिन सीमित संसाधनों के बीच समस्याओं से जूझते झारखंड संक्रमण के समक्ष फिर से उसी तेवर के साथ खड़ा हो जाए. ठीक वैसे ही जैसे पहले चरण, 2020 में लॉकडाउन से लेकर तमाम परिस्थितियों के बीच संक्रमण के समक्ष खड़ा हुआ था. तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहतरीन रणनीति और जनता के जुझारूपन ही मात्र कारण हो सकता है.

संक्रमण में सीएम ने स्वयं आगे बढ़ संभाली है कमान, मेडिकल स्टाफ की कमी के मद्देनजर लगातार दिए जा रहे हैं निर्देश

संक्रमण की दूसरी लहर में भी संक्रमित मरीजों को हर संभव राहत पहुंचाने के मद्देनजर, स्वास्थ्य कर्मियों के प्रोत्साहन से लेकर तमाम समस्याओं के प्रति मुख्यमंत्री संवेदनशील देखे जा रहे हैं. केंद्रीय नोटिफिकेशन के अभाव में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर इतने लोगों के जान से खेलेगा, कोई नहीं जानता था. जबकि देश के भांति झारखंड भी केंद्र सत्ता के दंभ पर भरोसा कर रहा था, जहाँ प्रधान सेवक ने स्वयं देश को भरोसा दिलाया था कि भारत ने कोरोना को हरा दिया है. लेकिन केंद्र के उस झूठे बोल का पर्दाफाश कोरोना की दूसरी लहर ने कर दिया। और यह सच भी उभरा कि वैज्ञानिकों के चेतावनी के बावजूद केंद्र ने न स्वयं तैयारी की और न ही राज्यों को संसाधन मुहैया कराई। 

झारखंड भी इस त्रासदी से अछूता नहीं रहा, लेकिन इस बीच सुकून देने वाली खबर यह जरुर हो सकती है. जहाँ मुख्यमंत्री ने कोरोना से लड़ाई में स्वयं सेनापति बन कमान तत्काल संभाल लिया है. संक्रमण के वेग को पहले ही भाफते हुए मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल को ही अपने आवास पर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. जिसमे स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया कि आवश्यकतानुसार हॉस्पिटलों में मेडिकल स्टाफ की कमी दूर किया जाए. राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पल्स ऑक्सीमीटर रखने के निर्देश दिए गए. युक्ति असरदार रही और राजधानी छोड़कर जिलों में संक्रमण का असर कम हुआ. 

सीएम की पहल पर नामकुम मिलिट्री हॉस्पिटल में रिजर्व हुआ 50 में से 48 बेड

ऐहियातन मुख्यमंत्री ने 22 अप्रैल से राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह मनाने की घोषणा की। जो संक्रमण के प्रसार को थामने के मद्देनजर आंशिक लॉकडाउन का ही पहला चरण है। इसके उपरांत मरीजों को इलाज व बेड मुहैया कराने की दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा सेना से मदद लेने की कवायद शुरू हुआ. 21 अप्रैल को सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक हुई. मुख्यमंत्री ने सैन्य अधिकारियों से सहयोग की अपेक्षा रखते हुए संक्रमित मरीजों के इलाज के मद्देनजर मिलिट्री हॉस्पिटलों के उपयोग पर जोर दिया. वहीं इन हॉस्पिटलों को ऑक्सीजन युक्त बेड, अन्य चिकित्सीय संसाधन उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया. नामकुम मिलिट्री हॉस्पिटल में सिविलियन के इलाज के लिए 50 में से 48 बेड रिजर्व है.

हॉस्पिटलों के निरीक्षण का असर दिखा, अधिकारी हरकत में आये, 5947 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड हुए क्रियाशील 

मुख्यमंत्री का अस्पतालों का मैराथन दौरा शुरू हुआ. 23 अप्रैल, सीएम ने इटकी स्थित टीबी सेनेटोरियम. 26 अप्रैल, रिम्स स्थित मल्टी स्टोरेड पार्किंग बिल्डिंग में तैयार हो रहे 350 बेड. इमरजेंसी 50 बेड वाले ऑक्सीजन युक्त कोविड वार्ड का निरीक्षण. 26 अप्रैल, डोरंडा स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (रिसालदार बाबा हॉस्पिटल) में बने 100 बेड वाले ऑक्सीजन युक्त कोविड वार्ड. 28 अप्रैल, रांची के रातू रोड चौराहा स्थित नगर निगम के 40 ऑक्सीजन युक्त बेड अस्पताल का शुभारम्भ. इसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने हॉस्पिटलों में बेड बढ़ाने, आक्सीजन सहित जरूरी दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. 

इससे दो असर देखने को मिला। प्रशासनिक तबका पूरी तरह से हरकत में आया। और दूसरा कोविड मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य भर में 1824 नए ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड तत्काल ही क्रियाशील हुए। कुल 5947 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड क्रियाशील हुए.

कोविड सर्किट के बनने से सबसे प्रभावित जिलों में संक्रमितों का लोड हुआ कम 

राजधानी में बढ़ते संक्रमित मरीजों के लोड को कम करने व संक्रमित मरीजों के बेहतर उपचार के लिए के लिए मुख्यमंत्री ने 24 अप्रैल को, रांची एवं पूर्वी सिंहभूम जिले में कोविड सर्किट का ऑनलाइन शुभारम्भ किया। इन दोनों सर्किट में किसी एक जिले में ऑक्सीजन बेड कम पड़ने पर मरीजों को समीपवर्ती जिलों में ऑक्सीजन बेड उपलब्ध कराए जाने का लक्ष है. सर्किट के तहत रांची के निकटवर्ती कोविड कॉरिडोर वाले जिले रामगढ़, लोहरदगा, सिमडेगा, लातेहार, खूंटी एवं गुमला तथा पूर्वी सिंहभूम जिला (जमशेदपुर) के निकटवर्ती कोविड कॉरिडोर जिले जमशेदपुर, सरायकेला एवं चाईबासा में संक्रमित मरीजों को तत्काल लाभ मिला.

चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन दे किया प्रोत्साहित

हॉस्पिटलों के निरीक्षण के साथ साथ स्वास्थ्य कर्मी संक्रमितों के इलाज में खुद को थका न पाए, उनके हौसला अफजाई के लिए सीएम ने कर्मियों को बड़ा तोहफा दे दिया। सीएम ने लगातार बिना थके फर्ज निभा रहे चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को, सम्मान के तौर पर एक माह का अतिरिक्त वेतन देने का फैसला लिया है. हालांकि इस कदम से राज्य सरकार को करीब 103 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ने का आकलन है. आर्थिक संकट के दौर में भी मुख्यमंत्री द्वारा ऐसे मानवीय कदम उठाया जाना सराहनीय है। 

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