हेमंत सरकार ने दिलाई किसानों को कर्ज से मुक्ति – 2,000 करोड़ कर्ज माफी बजट में से अब तक 980 करोड़ हो चुके हैं ट्रांसफर

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980 करोड़ राशि खर्च
  • हेमंत सरकार ने 980 करोड़ खर्च कर राज्य के किसानों को कर्ज से उबारा
  • भाजपा की किसान विरोधी नीतियों से परेशान 12 से अधिक किसान हुए थे आत्महत्या को मजबूर.
  • पिछले रघुवर राज में इंश्योरेंस कंपनियों ने नहीं दिए थे किसानों को बीमा राशि, परेशान हो किसानों ने ली थी हाईकोर्ट की शरण 

महज छह माह में हेमंत सरकार ने खर्च किये 980 करोड़, जबकि 2019 में भाजपा की रघुवर सरकार 1300 करोड़ नहीं कर पायी थी खर्च

रांची : झारखंड के ज़मीनी सच से कोसों दूर खड़े बाबूलाल मरांडी व तमाम भाजपा नेता, मौजूदा दौर में खुद को किसान हितैषी घोषित करने के प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने किसानों की धान खरीद व राशि भुगतान में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। हालांकि, भाजपा नेता के किसान हितैषी बताए जाने के क्रम में, वह रघुवर दास शासन में किसान विरोधी नीतियों के कडवे सच भूला चुके है। जिसके अक्स में राज्य के 12 से अधिक किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए थे। 

ज्ञात हो, झारखंड दिसम्बर 2014 – दिसम्बर 2019, रघुवर दास सरकार में किसान हित के नाम पर शुरू हुई योजनाओं से राज्य के अन्नदाताओं को केवल धोखा मिला। ज्ञात हो, योजनाओं के फेहरिस्त में इंश्योरेंस कंपनियों की धोखाधड़ी प्रमुखता से शामिल है। इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा किसानों को बीमा राशि भुगतान नहीं किये जाने कारण, परेशान किसानों ने न्याय के लिए कोर्ट की शरण ली थी। लेकिन, हेमंत सरकार के डेढ़ साल के शासन में, ठीक उलट कर्ज माफी के लिए 980 करोड़ रुपये खर्च किये गए। जिससे राज्य के 2 लाख से अधिक किसानों को राहत मिली है। 

रघुवर राज के केवल तीन सालों में 12 से अधिक किसानों ने की आत्महत्या 

ज्ञात हो, केंद्र की मोदी सरकार व झारखंड की पिछली रघुवर सरकार द्वारा प्रायोजित 133 योजनाओं के बावजूद, केवल तीन सालों (2016 से 2019 तक) में, राज्य में 12 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। इसमें अकेले 2017 में 7, 2019 के जुलाई और अगस्त माह में 3 किसानों ने आत्महत्या की। हालांकि, यह आंकड़ा सरकारी नहीं बल्कि निजी संस्थाओं द्वारा एकत्रित किया गया है। क्योंकि रघुवर सरकार ने 2016 के बाद से किसानों की आत्महत्या का डाटा देना बंद कर दिया। जिससे, किसान आत्महत्या की सही संख्या का अनुमान लगाना कठिन हो गया था। 

कोरोना महामारी में भी “झारखंड कृषि ऋण माफी योजना” जैसे योजना शुरू कर हेमंत सरकार ने निभाया वादा 

भाजपा की जन विरोधी नीतियों से इतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन किसान हित में कल्याणकारी नीतियों को गढ़ने के लिए दृढ़संकल्पित दिखते हैं। ज्ञात हो, रघुवर सरकार की किसान विरोधी नीतियों के अक्स में, हेमंत सोरेन द्वारा विधानसभा चुनाव में किसानों की कर्ज माफी को मुख्य मुद्दा बनाया था। हालांकि, श्री सोरेन के सत्ता में आते ही कोरोना महामारी ने राज्य जकड लिया। ऐसे में वादों को पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो गया। इसके बावजूद, किसानों से किये वादों को पूरा करने के मद्देनज़र हेमंत सोरेन दृढ संकल्पित रहे। 

नतीजतन, महामारी में भी सरकार द्वारा “झारखंड कृषि ऋण माफी योजना” की शुरूआत हुई। जिससे राज्य के 2 लाख से अधिक किसानों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री कहते है कि यह योजना राज्य के उन किसानों के चेहरे पर खुशियां बिखेरेगी, जो पिछली सरकार के गलत नीतियों के अक्स में कर्ज तले दबे थे। और सरकार निरंतर योजना को आगे बढ़ाने पर काम कर रही हैं।

2,46,012 किसानों के कर्ज माफी में खर्च हुए 980.06 करोड़, यानी बजट का 50% हिस्सा 

कृषि ऋण माफी योजना के तहत सरकार द्वारा 2000 करोड़ का बजटीय प्रावधान 2020-21 में किया गया। हालांकि, कोरोना संक्रमण के पहले लहर के प्रभाव में योजना को ज़मीनी रूप देने में जरुर देर हुई। लेकिन संक्रमण कम होते ही, साल 2019 के दिसम्बर में, करीब 9 लाख (9,02,603) किसानों के 50000 रुपये तक की कर्ज राशि माफ करने की तैयारी शुरू हो गयी थी। छह माह में ही 9,02,603 कर्जदार किसानों में से कुल 5,61,333 किसानों का डाटा बैंकों में अपलोड हो चूका है। और अब तक 2,46,012 (2.46 लाख) किसानों के कर्ज माफ होने का सच सामने हैं। मसलन, 980.06 करोड़ (बजटीय प्रावधान का करीब 50 प्रतिशत) राशि किसानों के कर्ज माफी में सरकार द्वारा खर्च की जा चुकी है। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा राहत योजना के तहत किसानों को नहीं मिला क्लेम, परेशान हो पहुंचे कोर्ट 

रघुवर सरकार में “प्रधानमंत्री फसल बीमा राहत योजना” के तहत किसानों को कैसे छला गया, चतरा के किसानों की दुर्दशा से समझी जा सकती है। ज्ञात हो, झारखंड के चतरा जिले के किसानों ने, वर्ष 2016 में लगभग 207 करोड़ रूपये और वर्ष 2017 में करीब 176 करोड़ रूपये का फसल बीमा करवाया। किसानों का दुर्भाग्य रहा कि इन दोनों वर्षों में फसल की पैदावार अच्छी नहीं हुई. मसलन, बीमा कंपनियों को प्रीमियम भर रहे किसानों ने बीमा राशि के लिए क्लेम की। लेकिन, योजना से संबंधित दो इंशोयरेंस कंपनियां “इफ्को टोक्यो जेनरल इंशोयरेंस” और “ओरिएंटल इंश्योरेंस” ने आश्वासन तो दिए, लेकिन बीमा राशि का भुगतान नहीं किया। हार कर किसानों ने जनवरी 2021 में हाईकोर्ट की शरण की ली। 

पांच माह के पूर्ण कार्यकाल में पिछली रघुवर सरकार 1300 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं कर पायी 

ज्ञात हो, झारखंड विधानससभा चुनाव से महज छह माह पहले (जून-2019) में भाजपा के तत्कालीन सीएम रघुवर दास द्वारा “मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना” की शुरुआत हुई। योजना के तहत हर 1 एकड़ ज़मीन पर 5,000 रुपये किसानों को देने का वादा किया गया। योजना के उदघाटन के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू रांची पधारे थे। नवंबर, आचार संहिता लागू होने तक, पांच महीने में इस योजना के लिए सरकार की तरफ से 1300 करोड़ जमा किया जाता रहा। लेकिन, गलत नीतियों के अक्स में रघुवर सरकार कभी यह राशि खर्च किसानों के हित में खर्च न कर सकी।

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