फादर स्टेन स्वामी

फादर स्टेन स्वामी की मौत को हत्या मानती है झारखंडी जनता, भाजपा सरकार के खिलाफ जनाक्रोश

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फादर स्टेन स्वामी की मौत को हत्या मानती है झारखंडी जनता व बुद्धिजीवी, केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ है जनाक्रोश 

रांची :  मुंबई के होली फैमिली अस्पताल में इलाजरत फादर स्टेन स्वामी की मौत 6 जुलाई को हो गई. सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को पिछले साल अक्तूबर में एनआइए ने भीमा कोरेगांव केस मामले में, रांची के उनके निवास स्थल से गिरफ्तार किया था. उन पर माओवादियों से संबंध रखने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप था. विडंबना है कि उनकी मौत तब होती है जब मुंबई हाईकोर्ट में उनकी जमानत पर सुनवाई चल रही थी. 

फादर की मौत झारखंड सहित देश भर के सामाजिक, मानवाधिकार संगठनों में उबाल लेकर आयी है. सोशल मीडिया और सड़कों पर लोगों द्वारा फादर स्टेन स्वामी को श्रद्धांजलि दी जा रही हैं. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भी फादर के निधन पर शोक व्यक्त किया गया है. देशभर से भी शोक संदेश आ रहे हैं. जिस तरह से आक्रोश की अभिव्यक्ति हो रही है उससे भाजपा सरकार के खिलाफ एक और जनांदोलन खड़ा होने के संकेत साफ़ मिल रहे हैं. 

क्या भाजपा सरकार 84 साल के एक बुजुर्ग से डर गयी थी?

मानवाधिकार कार्यकर्ता व लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग सहित कई बुद्धिजीवी मानते हैं कि यह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा प्रायोजित हत्या है. लोग यह भी कह रहे हैं कि भाजपा सरकार 84 साल के एक बुजुर्ग से इतनी डर गयी थी कि उन्हें जेल में अमानवीय परिस्थितियों में रखा. पार्किसन और अन्य बीमारियों से ग्रसित फादर को पानी पीने के लिए स्ट्रॉ तक नहीं दिए गए. जेल में ही उन्हें कोरोना हो गया था. 

झारखंड के आदिवासी-वंचितों के अधिकार के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले फादर स्टेन स्वामी अंततः जीवन की लड़ाई हार गये. केंद्र सरकार जेल से निकलने नहीं देगी, उन्हें अहसास था. मौत से कुछ दिन पूर्व उन्होंने कहा था कि मैं अस्पताल जाने की बजाय पीड़ित की तरह जेल में रहना पसंद करुंगा. क्योंकि हो सकता है कुछ दिनों में मेरी मौत हो जाये. और यहीं हुआ. फादर अब हमारे बीच नहीं हैं.

फादर स्टेन स्वामी एक जेसुइट पादरी थे. ईसाइयत में कहा जाता है – “मौत जिंदगी का अंत नहीं बल्कि अनंत जीवन की शुरूआत है”. फादर अपने अनंत जीवन के सफर में निकल पड़े हैं. उनकी मौत के बाद झारखंड में दमनकारी और निरंकुश भाजपा सरकार के खिलाफ नये आंदोलन की शुरूआत हो चुकी है. 

फादर स्टेन स्वामी का संक्षिप्त जीवन परिचय :

  • जन्म : 26 अप्रैल 1937, तमिलनाडु के त्रिची में.
  • 1970 में सोशलॉजी में एमए की पढ़ाई की. 
  • पादरी बनने के लिए आध्यात्मिक पढ़ाई भी की.
  • भारतीय सामाजिक संस्थान बेंगलुरू में निदेशक के रूप में काम किया. 
  • पिछले तीन दशक से झारखंड के आदिवासी और वंचित समुदाय के लिए काम कर रहे थे. 
  • नामकुम में उन्होंने बगईचा नामक संस्थान की नींव रखी.
  • बगईचा के माध्यम से आदिवासी समुदाय को बौद्धिक मार्गदर्शन देते रहे.
  • झारखंड सहित देश भर के जनांदोलनों को बौद्धिक दिशा दी.  
  • मानवाधिकार हनन, खनन की वजह से आदिवासियों की दुर्दशा सहित विभिन जन मुद्दों पर वे लगातार मुखर हो लिखते रहें.
  • मृत्यु 6 जुलाई 2021 को मुंबई स्थित होली फैमिली अस्पताल में हुई.
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