जनहित के मुद्दों से भटकाने के लिए बीजेपी

जनहित के मुद्दों से भटकाने के लिए बीजेपी हमेशा गलत आंकड़े पेश कर देश को गुमराह करने में रही है आगे

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देश रोज़गार व विकास की बात कर रहा है. महामारी से लड़ने में केंद्र की गलत रणनीति का विरोध कर रहा है, तो बीजेपी उन्हें जनहित के मुद्दों से भटकाने के लिए देश को दो बच्चों की नीति समझा रही है 

महामारी से बेसहारा हुए बच्चों की गलत जानकारी व वैक्सीन पर गलत आंकड़े पेश कर मोदी सरकार की हो चुकी है किरकिरी 

रांची: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार की गलत नीतियों से आज देश की जो स्थिति है, वह शायद पिछले 70 साल में नहीं रही है. मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण देश की आर्थिक व्यवस्था पहले ही चरमरा गयी थी. लाखों रोजगार छिन चुका था. महामारी ने अर्थव्यवस्था में आखिरी कील ठोंक दी है. नतीजतन, देश अब केंद्र से रोजगार और विकास को लेकर सवाल पूछ रहा है. महामारी से लड़ने में केंद्र की गलत नीतियों का विरोध भी होने लगा है. 

मसलन, ऐसे में बीजेपी का परेशान होना स्वाभाविक है. लेकिन, वह परिस्थितियों को ठीक करने के बजाय अपने चिर-परिचित अंदाज में, देश को जनहित के मुद्दों से भटकाने की तैयारी कर रही है. वह दो बच्चों की नीति को ऐसे वक़्त में जरुरी बता रही है, जब देश की प्राथमिकता में स्वास्थ्य व बेरोजगारी है. बता दें कि महामारी काल में मोदी सरकार गलत आंकड़े पेश कर देशवासियों को गुमराह करती रही है. 

असम और यूपी जैसे राज्यों द्वारा महामारी के दौर में लाई गयी दो बच्चों की नीति युक्तिसंगत नहीं 

कोरोना महामारी की दूसरी लहर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. तीसरी लहर की संभावना भी तेज हो चली है. ऐसे में केंद्र के लिए जरूरी तो यह होना चाहिए कि महामारी को रोकने में हर संभव कोशिश करे. लेकिन, केंद्र अपने खिलाफ उठ रहे विरोध के मद्देनजर जनता को जनहित के मुद्दों से भटकाने के लिए, राज्यों को दो बच्चों की नीति का पालन करने का निर्देश दे रहा है. असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने तैयारी शुरू भी कर दी गयी है. दोनों ही राज्यों के सरकारों का कहना है कि अब सरकारी नौकरी उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिनके दो बच्चें है. 

गैर-बीजेपी शासित राज्यों को बदनाम करने का पहले ही प्रयास कर चुकी है मोदी सरकार. 

ज्ञात हो, देश को जनहित के मुद्दों से भटकाने के लिए, महामारी के दौरान गैर-बीजेपी शासित राज्यों को बदनाम करने का असफल प्रयास मोदी सरकार करती रही है. गलत आंकड़ों के माध्यम से वैक्सीन बर्बादी को मुद्दा बना केंद्र, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों पर बड़ा आरोप लगा चुकी है. झारखंड पर तो सबसे अधिक वैक्सीन बर्बाद करने का आरोप केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लगाया गया. झारखंड को सबसे अधिक बर्बादी वाले राज्यों में दिखाने का प्रयास हुआ.

बताया गया कि राज्य में टीकों की कुल 33.95 प्रतिशत खुराक बर्बाद हुई है. हालांकि, हेमन्त सरकार ने आंकड़ों के ही माध्यम से झूठ का जोरदार खंडन किया. अंततः मोदी सरकार को भी अपनी गलती सुधारनी पड़ी. केंद्र द्वारा कहा गया कि तकनीकी खराबी के कारण आंकड़ों में बढ़ोत्तरी हुई थी. इसी तरह राजस्थान में भी करीब 11 लाख वैक्सीन बर्बाद करने की बात केंद्र द्वारा की गयी. लेकिन, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी खंडन किया. उन्होंने तो यहां तक कहा कि राजस्थान में 11 लाख वैक्सीन बर्बाद हुआ है। जबकि, दूसरे राज्यों के केवल प्रतिशत में आंकड़े दिए. राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह से साजिश हैं. 

मोदी सरकार ने महामारी से बेसहारा हुए बच्चों के भी गलत आंकड़े पेश कर देश को किया गुमराह

देश को गुमराह करने में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट तक का सहारा लिया. दरअसल बीते 2 जून को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया कि कोरोना के कारण मार्च 2020 से लेकर अब तक देश में कुल 9346 बच्चों ने माता-पिता या अभिभावक को खोया है. इसमें 7464 बच्चे तो ऐसे हैं, जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खोया है. लेकिन राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि अभिभावक खोने वाले 9497 बच्चें तो केवल पांच राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, यूपी, गुजरात और राजस्थान में ही मिल चुके हैं.

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