कोरोना त्रासदी से जूझ रही झारखंड की अर्थव्यवस्था को कृषि से मिलेगा सहारा

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झारखंड की अर्थव्यवस्था

रांची : कोरोना की दूसरी लहर से सफलतापूर्वक लड़ने के बाद अब झारखंड सरकार का ध्यान अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाने पर है. यह जरूरी भी है क्योंकि संक्रमण की वजह से, पिछले 13-14 महीने से उद्योग-धंधे बंद रहे हैं. व्यवसायी, कारोबारी, उद्योग जगत, नौकरीपेशा वर्ग, कृषक, श्रमिक सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं. 

हालांकि, इस बार हेमन्त सरकार ने लॉकडाउन में, राज्य में जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था. राशन, दवाएं जैसी जरूरी चीजों की दुकानें दोपहर दो बजे तक खुली रही. निर्माण व कृषि से संबंधित कामों के लिए भी छूट दी गई थी. इसके बाद जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई तो छूट का दायरा और बढ़ाया गया. नतीजतन, झारखंड में आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से बंद नहीं रही. अब ज्यादातर गतिविधियां शुरू हो गई है. मॉल खोले जाने लगे हैं. और आम आदमी के साथ सरकार भी यहीं चाहती है कि आर्थिक गतिविधियां और तेज हो.

बाजार खुलने से आर्थिक गतिविधियां तेज हुई है और मांग में वृद्धि होने से उत्पादन में तेजी आयी है 

ज्ञात हो, स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह की अवधि के दौरान भी सरकार ने कृषि संबंधी गतिविधियों पर छूट दी थी. किसानों को वक्त पर बीज उपलब्ध करा दिये गये. जून महीने में अच्छी बारिश भी हुई, जिससे किसानों ने खेतों को कृषि के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था. इस बार मानसून की शुरूआत में ही खेतों में काफी पानी जमा हो गया है. किसान समय पर रोपनी कर पायेंगे. झारखंड की अधिसंख्य आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषि या इससे जुड़े कार्यों पर उनकी आजीविका निर्भर करती है. मसलन, अर्थव्यवस्था पर कोरोना संक्रमण से पड़े झटके से ऊबरने में कृषि का बड़ा योगदान रह सकता है.

ग़ौरतलब है कि झारखंड के ग्रामीण, मानसून के तीन माह में ही साल भर की जरूरत का धान पैदा करते हैं. इसके अलावा अतिरिक्त धान को बेचने से उन्हें आमदनी भी होती है. सरकार ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर बजट के दौरान ही बड़े निर्णय लिए थे. जिसका फायदा किसानों और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा. किसानों की कृषि ऋण माफ किए गए. किसान समृद्धि योजना, चैंबर ऑफ फॉर्मर्स जैसी योजनाओं के जरिये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती दी जा रही है. मनरेगा और गांवों में चलने वाली योजनाओं से भी किसान और श्रमिकों वर्ग को रोज़गार और आय स्रोतों से जोड़ा जा रहा है. 

सरकार मानती है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत सुधरेगी तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. मुख्यमन्त्री हेमन्त सोरेन के कुशल नेतृत्व में राज्य ने सफलतापूर्वक कोरोना की दूसरी लहर का सामना किया है. और अब राज्य के आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार उसी तरह से आगे बढ़ने की तैयारी में है.

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