साइबर क्राइम रोकने की दिशा में हेमंत सरकार की बड़ी पहल

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साइबर क्राइम

साइबर क्राइम रोकने की दिशा में हेमंत की पहल, अधिकारियों को निर्देश के साथ बच्चों व महिलाओं को दे रहे साइबर ट्रेनिंग 

रांची। झारखंड के लोगो इन दिनों साइबर अपराधियों के आतंक से खुद को घिरे पा रहे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक राज्य में हर दिन औसतन चार लोग साइबर अपराध के शिकार हो रहे है। 2016-2019 में साइबर क्राइम का मामला काफी बढ़ा है। और झारखंड का जामताड़ा शहर इन दिनों साइबर अपराध का गढ़ बन गया है। साइबर अपराध के बढ़े ग्राफ के कारण इस मुद्दे पर वेब सीरीज भी बन चूकी है। लेकिन अब हेमंत सरकार के कड़े निर्णय व फैसले से राज्य में हो रहे साइबर अपराध को कम करने में मदद मिलेगी। इसे रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने के साथ हेमंत सोरेन बच्चों व महिलाओं को साइबर क्राइम से निपटने के लिए  ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं। 

मजबूत मैकेनिज्म बनाने पर जोर, जिसमें हो साइबर एक्सपर्ट्स की पूरी टीम

हेमंत सरकार ने राज्य में साइबर अपराध को एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया है। यही कारण है कि विभागीय समीक्षा के साथ-साथ हर मौके पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसे रोकने के लिए मजबूत मैकेनिज्म तैयार करने के कड़े निर्देश दिया है। एक ऐसा अभेद मैकेनिज्म तैयार करने को कहा गया है जिससे साइबर क्राइम को कंट्रोल किया जा सके। मुख्यमंत्री चाहते है कि सूचना व प्रौद्योगिक विभाग इसके लिए एक ऐसा स्ट्रांग सेल तैयार करे, जिसमें साइबर एक्सपर्ट्स की पूरी टीम मौजूद हो। मुख्यमंत्री की सक्रियता का ही परिणाम है कि झारखंड पुलिस ने 2020 में साइबर अपराधियों पर नकेल कसने में कामयाब रही है। 

साइबर अपराध रोकने के लिए पदों का सृजन कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश

साइबर अपराध को लेकर बीते ही दिनों मुख्यमंत्री ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग और गृह एवं कारा विभाग की समीक्षा की थी। पहले विभाग की समीक्षा में हेमंत ने कहा था कि आज हर सेक्टर में सूचना प्रौद्योगिकी एप्लीकेशन्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। सरकार हो या आम लोग, सूचना प्रौद्योगिकी के कामकाज से कामों में तेजी, क्षमता विस्तार और पारदर्शिता आई है। साथ ही साइबर अपराधी भी उतने ही तेजी से आज इस अपराध में घूसे है। ऐसे में जरूरी है कि अधिकारी इनपर रोक लगाएं। 

वहीं दूसरी विभागीय समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तेजी से साइबर अपराध बढ़ रहा है। साइबर अपराधियों पर नियंत्रण तथा साइबर अपराध के अनुसंधान के लिए अलग से सिस्टम बनाया जाए। इसके लिए पदों का सृजन कर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू किया जाए ताकि साइबर अपराध को नियंत्रित करने की गति तेज हो सके।

साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रन (CCPWC) योजना का होगा फायदेमंद

गृह एवं कारा विभाग की समीक्षा बैठक में हेमंत ने “साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रन (CCPWC) योजना का प्रमुखता से जिक्र किया। दरअसल यह योजना महिलाओं व बच्चों को साइबर ट्रेनिंग देने के लिए हैं। योजना अंतर्गत हेमंत सोरेन सरकार सूबे की महिलाओं और बच्चों को साइबर अपराध से बचाने के लिए ट्रेनिंग देगी। ट्रेनिंग के बाद बच्चों और महिलाओं को साइबर अपराध से बचाया जा सकेगा। 

हेमंत का मानना है कि राज्य के छात्रों की साइबर सुरक्षा के ट्रेनिग के बाद छात्र पुलिस के साइबर सेल की मदद करेंगे, जिससे राज्य में हुए साइबर अपराधों को हल करने में पुलिस को मदद मिलेगी। सरकार इसके अलावा ऑनलाइन साइबर रजिस्ट्रेशन यूनिट, कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट, अवेररनेस क्रिएशन यूनिट और रिसर्च एंड डेवलोपमेन्ट यूनिट का भी गठन कर रही है।

पांच सालों मे बढ़ा साइबर अपराध, हेमंत सरकार ने कसी नकेल

साल 2016 से साल 2020 यानी पांच साल को देखे, तो इस दौरान 5000 के करीब साइबर क्राइम के मामले पुलिस रिकॉर्ड मे दर्ज हुए है। हालांकि हेमंत सरकार के कड़े फैसले व झारखंड पुलिस की मुस्तैदी का असर यह है कि 2020 में इन अपराधियों पर विशेष लगाम लगा है। पूरे राज्य में सितंबर से इन अपराधियों के धड़-पकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद से करीब 517 साइबर अपराधी पकड़े गये है। पूरे 2020 की बात करें, तो राज्य के अलग- अलग जिलों से 1022 साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया गया हैं।

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