कोरोना संक्रमण के आड़ में केवल चुनावी रेल का परिचालन, आम रेल सेवा ठप

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केवल चुनावी रेल का परिचालन

मोदी जी के बुलेट ट्रेन की दौर में आम रेल सेवा जब महज चुनावी रेल के सवाल से जा जुड़े। जिसके अक्स में केवल उन क्षेत्रों में ट्रेन परिचालन का सच उभरे जहां चुनाव हो। जो ट्रेने चले उसे स्पेशल ट्रेन का नाम दिया जाए। असोल परिवर्तन के शंखनाद के बीच ट्रेन ठसाठस भर लोगों को बंगाल पहुंचाए। और वहां सवाल कोरोना संक्रमण का नहीं केवल चुनावी जीता का जुनून बन जाए। तो ऐसे में हर कोई यह पूछ सकता है कि भारतीय रेल का परिचालन देश में रोके जाने का आखिर सच क्या है। क्यों  डूबती आर्थिक नैया के बीच ट्रेन का परिचालन ठ़प है?

झारखंड में बड़ी हो-हुज्जत के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे ट्रेनों के परिचालन के सम्बन्ध में कदम बढ़ा रही है। मार्च के अंत तक दो चरणों में महज 47 नियमित ट्रेनों कही चलने का खाका तैयार हो सका है। पहले चरण में 29 ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव रखा गया है। जबकि दूसरे चरण में शेष 18 ट्रेनें चल सकेगा। पहले चरण में चलने के लिए प्रस्तावित 29 ट्रेनों की बोगियां और इंजन तैयार हैं। हरी झंडी के खातिर रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है।  रेलवे बोर्ड से अनुमति मिलने के इन ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा सकेगा।

पहले चरण में रांची व हटिया से 13 व टाटानगर से 2 ट्रेनें चल सकती है 

दक्षिण पूर्व रेलवे के चीप रोलिंग स्टॉक इंजीनियर का कहना है कि दक्षिण पूर्व रेलवे ट्रेनों का परिचालन सामान्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है। दक्षिण पूर्व जोन से चलने वाली रांची व हटिया की 13 ट्रेनें शामिल है। इनमें 8 ट्रेनें रांची रेलवे स्टेशन से और 5 ट्रेनें हटिया रेलवे स्टेशन से चलेंगी। पहले चरण में हटिया व रांची से पांच-पांच ट्रेनें चलाने की योजना है। जबकि दूसरे चरण में रांची की तीन ट्रेन चलाई जाएगी। जबकि चार ट्रेनें टाटानगर से दौड़ेंगी। टाटानगर से पहले चरण में 2 और दूसरे चरण में 2 ट्रेनों को ही चलाने की योजना है।

मसलन, डूबती अर्थव्यवस्था के बीच केंद्र के लिए यह समझ जरुरी होना चाहिए कि ट्रेन परिचालन को यथावत हो। न कि जीत के मंशे के मद्देनजर ट्रेन केवल चुनावी रेल बन कर रह जाए।

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