हरमू नदी

भाजपा राज में केवल एक नदी के संरक्षण पर हुई 85 करोड़ की लुट

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भाजपा राज में केवल एक नदी के संरक्षण नाम पर हुई 85 करोड़ की लुट, जबकि हेमंत सरकार 11 नदियों के संरक्षण पर दे रही है जोर

रांची। राजधानी के बीचों-बीच स्थित हरमू नदीं आज अपनी त्रासदी पर रो रही है। कभी यह नदीं शहर की धड़कन हुआ करती थी। लेकिन पूर्व की भाजपा सरकार में इस जीवनदायनी नदी के संरक्षण के नाम पर 85 करोड़ रूपए की लुट हुई। जो  वह शर्मनाक ही नहीं निंदनीय घटना भी है। हालांकि 2014-19 तक झारखंड की सत्ता में बैठी रघुवर सरकार ने हरमू नदी के संरक्षण को लेकर जो कदम उठायी, वह एक सकारात्मक पहल हो सकती थी। लेकिन, सकारात्मक मानी जानी वाली पहल भ्रष्टाचार की एक कड़ी बन कर रह गयी। 

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चलता है कि रघुवर सरकार ने हरमू नदी के रखरखाव व बचाव के साथ आसपास के हरियाली के लिए 85 करोड़ रूपए खर्च कर दिये थे। तत्कालीन नगर विकास विभाग के अफसरों द्वारा दावा किया गया कि 85 करोड़ को हरमू नदी के संवारने में खर्च किया गया।  लेकिन, वस्तुस्थिति यह है कि नदी कभी नाले में ही बनी रही। अब इस नदी साथ राज्य के 11 अन्य नदियों के आसपास की हरियाली लाने के दिशा हेमंत सोरेन सरकार द्वारा  बेहतर व ठोस पहल शुरू की गयी है।

11 नदियों के आसपास हरियाली बढ़ाने की हेमंत सरकार की पहल

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजधानी स्थित हरमू नदी, स्वर्णरेखा नदी सहित राज्य के कई नदियों के उद्गम स्थल से लेकर उसके तटीय इलाकों में वृहत पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए वे कार्य योजना बनाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश बीते दिनों वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में दिये है। इस दौरान सीएम को बताया गया कि इन दोनों नदियों के साथ करीब 11 नदियों के उद्गम स्थल से लेकर उसके तटीय इलाकों बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना तैयार की गई है। इसमें दामोदर, स्वर्णरेखा, गरगा, जुमार और कोनार जैसी नदियां शामिल हैं। इससे नदियों में प्रदूषण कम करने के साथ-साथ मिट्टी में कटाव को रोका जा सकेगा।

जांच का विषय है हरमू नदी पर सौंदर्यीकरण की योजना

बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हरमू नदी के सौंदर्यीकरण योजना को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था। उनके निर्देश के बाद विभाग की एजेसी जुडको ने इस योजना में अबतक करीब 85 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है। लेकिन आज भी नदी नाला में ही तब्दील है। जाहिर हैं कि जिस तरह हेमंत सरकार में पूर्ववर्ती सरकारों में हुए कई घोटालों पर तेजी से जांच के आदेश दिये जा रहे है, तो यह भी जरूरी हो जाता है कि 85 करोड़ के घोटाले पर भी विभागीय कार्रवाई का निर्देश राज्य सरकार दें।

विभागीय मंत्री व हाईकोर्ट के जज ने भी जतायी थी हरमू नदी की स्थिति पर चिंता

ऐसा नहीं है कि लुट की जानकारी सार्वजनिक नहीं है। तत्कालीन विभागीय मंत्री ने भी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले स्वीकारा था कि 85 करोड़ खर्च करने के बावजूद हरमू नदी कायाकल्प नहीं हो पाया। एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान उन्होंने कहा था कि नदी के सौंदर्यीकरण कार्य की रिपोर्ट उनके पास आयी थी। रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने के कारण उन्होंने थर्ड पार्टी को जांच करने के लिए पत्र लिखा था। 

हालांकि जांच का तथ्य सार्वजनिक नहीं होने के कारण केवल अप्रत्यक्ष तौर पर उन्होंने भ्रष्टाचार की बात स्वीकारी थी। जुलाई 2019 को वनरोपण कार्यक्रम में यहां पहुंचे हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन पाठक ने भी नाले की स्थिति पर चिंता जतायी थी। तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्होंने नदी के संरक्षण पर सवाल उठाये थे। उन्हने कहा था कि पता नहीं सरकार ने इसे बचाने के लिए क्या किया। इसकी हालत दयनीय ही है।

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