Welcome to Jharkhand Khabar   Click to listen highlighted text! Welcome to Jharkhand Khabar
  TRENDING
मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने का वादा करने वाली भाजपा अपने नेता को ही नहीं बचा सकी
जेलों में बंद कैदियों को सम्मान देने के साथ उनके कुशलता का उपयोग भी करना चाहते हैं मुख्यमंत्री
कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड -किसानों के राहत के नाम पर आवंटन 1 लाख करोड़ से होगा कॉपोरेट घरानों को फायदा !
समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में क्या हुआ, 15 दिन में रिपोर्ट दें
पत्थलगढ़ी के दर्ज मामलों को वापस लेकर मुख्यमंत्री ने राज्य को बिखरने से बचाया
दबे-कुचले, वंचितों के आवाज बनते हेमंत के प्रस्ताव को यदि केंद्र ने माना तो नौकरियों में मिलेगा आरक्षण का लाभ
टीआरपी घोटाला : लोकतंत्र का चौथे खम्भे मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता खोयी
सर्वधर्म समभाव नीति पर चल राज्य के मुखिया पेश कर रहे सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल
खाद्य सुरक्षा: आरोप लगा रहे बीजेपी नेता भूल चुके हैं – जरूरतमंदों को 6 माह तक खाद्यान्न देने की सबसे पहली मांग हेमंत ने ही की थी
Next
Prev

झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं

आदिवासी बेटियों से स्कूल छीन लिए बीमारी ने

बेटियों से बीमारी स्कूल छीन रही है और सरकार जीत का ब्लूप्रिंट बनाने में व्यस्त 

बीमारी ने आदिवासी बेटियों से उनके स्कूल छीन लिए!

झारखण्ड के गुमला जिले की एक आदिवासी परिवार की कहानी सरेआम सरकार की आयुष्मान योजनाशिक्षा के प्रति उनकी संजीदगी की पोल खोल दी है। वैसे भी हर रोज की सुर्खियाँ सरकर के स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई वयक्त करती रहती है। पिछले दिनों की खबर है कि मौजूदा सरकार की राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लचर है, एक मरीज को ट्रोली तक उपलब्ध नहीं करवा पाती और ढिंढोरा तो ऐसे पीटती है जैसे इनसे बेहतर कोई सरकार है ही नहीं! ख़ैर यह रिपोर्ट तो ऐसे आदिवासी परिवार की है जिसको सरकार की कुव्यवस्था स्वास्थ्य छोडिये शिक्षा तक उपलब्ध कराने में नाकाम है।

गुमला जिले के आदिवासी परिवार के तीन बच्चियों को आर्थिक तंगी व पिता की बीमारी की वजह से पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी है गरीबी के कारण टीबी की बीमारी से इलाज न करा पाने की स्थिति में पहले ही इन बेटियों के सर से मां का साया उठ गया अब पिता भी तीन वर्षों से टीबी से ही ग्रसित होने के कारण काम करने में असमर्थ हैं यह मार्मिक कहानी सिसई प्रखंड के बोंडो पंचायत की मादा गांव की है माँ जिन्दा थी तो गरीबी में भी अपनी बेटियों को पढ़ा रहा थी, लेकिन तीन वर्षो के इलाज में भी सरकारी अस्पताल ने उनके पिता की बिमारी ठीक नहीं कर पायी है। अब स्थिति यह है कि आर्थिक तंगी के कारण उनके पास स्कूल की जरूरत की जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसे नहीं है, मजबूरन इन तीन बेटियों को पढ़ाई छोडनी पड़ी है। 

तीनों बेटियों के स्कूल न जा पाने की सूचना पर रिश्तेदारों ने उन्हें पढ़ाने की पहल जरूर की, पर वे भी गरीबी में जी रहे हैं प्रियंका के मामा ने सरकार से किसी हॉस्टल में तीनों बेटियों का नामांकन कराने की गुहार सरकार से लगाई है. इसके लिए उन्होंने सीडब्ल्यूसी से तीनों बहनों का हॉस्टल में नामांकन करने की गुहार लगाया है रिश्तेदारों का कहना है कि उसके खाने-पीने की व्यवस्था वे कर लेंगे। उन्होंने चिंता जताई है अगर उनकी पढाई जारी नहीं रखी गयी, तो वे बहकावे में आकर मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं हालांकि शिक्षा विभाग व कल्याण विभाग की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि इन बच्चों का हॉस्टल में नामांकन को लेकर पढ़ाने में मदद करे, लेकिन सरकार है कि वह चुनावी मोड में है और संथाल में जीत का ब्लूप्रिंट बनाने में व्यस्त है।भारत माता की जय 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts

Click to listen highlighted text!