ज़मीन लूट के मामले रोज उजागर हो रहे हैं झारखंड में 

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जंगल की ज़मीन

झारखंड के प्राकृतिक संसाधन पूँजीपतियों को लुटाने की गति तेज़ हुई है। तमाम लोक लुभावन जुमलों और भ्रष्टाचार को किसी भी हालत में बर्दाश्त ना करने के दावा करके सत्ता में आने वाली रघुबर सरकार के शासनकाल में बेशर्मी से भ्रष्टाचार जारी है। अनेक बेशकीमती खनिज पदार्थ, कोयला, नदियाँ, जंगल, पहाड़ जैसे प्राकृतिक संसाधन और ज़मीनें सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर कौड़ियों के भाव लूटा जा रहा हैं। राज्य के पूर्व डीजीपी के पत्नी के नाम फ़र्ज़ी दस्तावेज़ के माध्यम से ज़मीन खरीद-बिक्री का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि फिर से 500 एकड़ से अधिक वन भूमि (ज़मीन) की ख़रीद-बिक्री का मामला सामने आ गाया 

रिपोर्ट – फ़र्ज़ी तरीके से हज़ारीबाग़ जिले के नौ प्रखंडों में लगभग 500 एकड़ से अधिक वन भूमि का की ख़रीद फ़रोख्त किया गया है और इस फर्जीवाड़े में 600 लोग शामिल हैं हालांकि इस जिले के निवर्तमान उपायुक्त ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए तमाम रजिस्ट्री रद्द करने का आदेश देते हुए सम्बंधित मामले से जुड़े 500 से अधिक लोगों को नोटिस भेजा है बताया जा रहा कि उपायुक्त ने जिले में पूरे फर्जीवाड़े की जांच करायी जिसमें पाया गया कि हज़ारीबाग़ जिले के नौ प्रखंडों में लगभग 500 एकड़ से अधिक वन भूमि की ख़रीद-फ़रोख्त हुई है। ज्यादातर खरीद-बिक्री सादा हुक्मनामा के आधार पर वन भूमि का मालिकाना हक दिखा कर की गयी है जमीन बेचने वालों की ओर से सादा हुक्मनामा के सहारे दावा किया है जमींदार ने उनके वंशजों को यह जमीन दी थी दिलचस्प यह है कि इस फर्जी वन भूमि क़ागज़ात पर बैंक ने कर्ज भी दे दिया 

मसलन, सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में डूबे मौजूदा राजनीतिक तंत्र से क्या इस ज़मीन मामले का निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा सकती है? नहीं। तो ऐसी स्थिति में अब देखना यह है कि क्या राज्य की जनता मौजूदा सरकार और उसके व्यवस्था की इस खुलेआम नंगई और भ्रष्टाचार को हाथ पर हाथ धरे बैठे देखते रहेंगे या इस व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए अपनी गति को तेज करेंगे!

 

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