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जेल

जेल में मानवता हुई शर्मसार, विषाक्त खाने से मरे 20 कैदी 

झारखंड के जेल में मानवता हुई शर्मशार, विषाक्त युक्त खाना खाने से 20 कैदी मरे 

जेलों में कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव होना अब आम बात हैं। जेल में कैदियों की मौतों की घटनाएँ 54.02 प्रतिशत बढ़ चुकी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सरकारी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार भी जेल में मरने वालों की संख्या इन दिनों काफी बढ़ी है। सरकार द्वारा लायी गयी यातना विरोधी विधेयक केवल कहने की बात हो गयी है। 

हमारे देश में क़ानूनों की कमी नहीं है। कितने मानवाधिकार कानून भी बने होने के बावजूद भी विचाराधीन कैदी के रूप में हजारों बेगुनाह बरसों जेल में सड़ रहे हैं। अमीरों व नेताओं के लिए तो जेलों में तमाम तरह की सुविधाएं होती है, लेकिन वहीं आम जनता के लिए खाने से लेकर तमाम प्रकार के असुविधाए।

कहने को तो जेल अपराधियों को सुधार कर समाज में अपराध को रोकने के लिए होती है, लेकिन जितनी बुरी तरह से आम जनता को जेल में प्रताड़ित किया जाता है वह उन्हें पक्के  अपराधी बनने को निश्चित रूप से मजबूर करता है। क्योंकि वेतनभोगी और अनुभवी घाघ नौकरशाहों की देखरेख में क़ैदियों को समाज से पूरी तरह काटकर उनका अमानवीकरण कर इस व्यवस्था रूपी मशीन का नट-बोल्ट बना दिया जाता है। इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर झारखंड के खूंटी जेल में देखा जा सकता है।  

ख़बर के मुताबिक खूंटी जेल में बंद करीब 20 कैदी की मौत विषाक्त भोजन से हो गयी। बताया जाता है कि विषाक्त युक्त खाना खाने के बाद कैदियों को उल्टी और दस्त होने लगी, तबियत बिगड़ने लगी और वे बीमार हो गए। आनन-फानन में जेल प्रशासन ने उनका इलाज शुरू करवाया और गंभीर हालत वाले बीमार कैदियों को सदर अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ उनकी मृत्यु हो गयी। सूत्रों के मुताबिक़, खाने में छिपकली के गिरने से भोजन विषाक्त हुआ था, लेकिन 24 घंटे मीडिया में रहने वाली सरकार ने और न ही प्रशासन ने  अब तक इसकी पुष्टि की है।

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