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क्या अमित शाह का यह दौरा ‘बाबूलाल-चिट्ठी-प्रकरण’ समझौता दौरा तो नहीं ?

क्या अमित शाह का यह दौरा ‘बाबूलाल-चिट्ठी-प्रकरण’ समझौता दौरा तो नहीं ?

झारखण्ड प्रदेश में झाविमो सुप्रीमो, बाबूलाल मरांडी द्वारा भाजपा के विधायाकों की खरीद-फ़रोख्त को चिट्टी के माध्यम से उजागर करने के बाद विगत दिनों से दलबदलू विधायकों का इसके खिलाफ थाने में आवेदन देने का सिलसिला लगातार जारी है। साथ ही इस प्रकरण में दोनों पार्टियों का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम सीमा पर है। भाजपा ने एक तरफ बयान जारी किया कि बाबूलाल जी का ऐसा करने से उनकी राजनीतिक करियर का काउंट-डाउन शुरू हो गया है, तो दूसरी तरफ झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने बयान दिया कि बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक व कानूनी काउंट-डाउन शुरू करने की क्षमता भाजपा जैसे लोकतंत्र की हत्या करने वाली पार्टी में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि राजनीति को व्यापार समझने वाली भाजपा ने सत्ता व अन्य सक्षम एजेंसियों का दुरुपयोग कर अपने काउंटडाउन को चार वर्षों तक जो रोक रखा था, वह अब प्रारंभ हो चुका है। इनका फाइनल काउंट-डाउन 2019 में होने वाले चुनाव में जनता कर देगी।

खैर स्थिति चाहे जो भी हो मामले ने तूल पकड़ ही लिया और भाजपा इस मामले में परेशान दिख भी रही है। अगर भाजपाइयों में बौखलाहट नहीं है तो फिर ये आरोप-प्रत्यारोप कर शोर मचाने की जगह देश की सबसे बड़ी एजेंसी सीबीआई से ही जांच क्यों नहीं करवाती। जिस प्रकार आनन-फानन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का झारखण्ड आने का कार्यक्रम तय हुआ उसने इस मामले को और अधिक संदिग्ध जरूर बना दिया है। ऐसा लगता है कि अमित शाह जी का यह दौरा शायद इस मामले को मान-मनौअल कर सुलझाने की है और साथ में यह भी लग रहा है इनका इन सभी दलबदलू विधायकों का उधारी रकम चुकता कर किसी प्रकार समजौता करने का प्रयास रहेगा। लेख लिखे जाने तक अमित शाह का आगमन झारखण्ड की धरती पर हो चूका था। भाजपा के दिगज नेता एवं भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने पूरे ताम-झाम के साथ उनका स्वागत भी किया। और यहाँ कि मीडिया ने अपना शीर्षक ‘जोहार शहंशाह’ भी लगा दिया है लेकिन इसका मतलब सबके समझ से परे है।

इस मामले में यहाँ की विपक्षी पार्टियाँ बाबूलाल जी के साथ मजबूती से दिख रही है। इस प्रकरण में झामुमो ने कहा कि भाजपा की यह सब नौटंकी सिर्फ लोगों का ध्यान भटकाने के लिए हो रहा है। इन्होने लोकतंत्र को कलंकित करने काम किया है। यदि इतने दूध के धुले हैं तो फिर रघुवर दास इसकी जाँच का आदेश क्यों नहीं देते? तो वहीं कोंग्रेस ने इस मामले में अलबर्ट एक्का चौक पर सरकार का पुतला दहन भी किया है। झाविमो महिला मोर्चा अध्यक्ष शोभा यादव ने कहा कि जब केंद्र व राज्य दोनों जगह ही भाजपा की सरकार है, तो फिर वह डर क्यों रही है! उस पत्र में किये गये हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं करवाते है, सच्चाई खुद ब खुद बाहर आ जाएगी।

बहरहाल, इस मामले ने वाकई दिलचस्प मोड़ ले लिया है अब देखना यह है कि अमित शाह की मौजूदगी से यह मामला कितना प्रभावित होता है। क्या बाबूलाल जी भाजपा के साथ जाते हैं या अपनी लड़ाई जारी रखते हैं? इस मुद्दे पर बाबूलाल जी का कहना है कि जो पार्टी जनता के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात कर रही हो उसके साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता है। यह पूछे जाने पर कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आपकी दोस्ती थी और उन्होंने भाजपा से हाथ मिला लिया है, आप क्या साथ जाएंगे? मरांडी ने कहा कि जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ नहीं थे तब उनसे तो दोस्ती थी, अब नहीं है। उनसे व्यक्तिगत संबंध हो सकते हैं। जो भाजपा उन्हें समाप्त करने पर तुली है, उसके साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी जब पहली बार संसद गए तो दरवाजे पर प्रणाम कर अंदर घुसे थे। उस समय लगा था कि वे लोकतंत्र की मर्यादाओं की रक्षा करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी अबतक दिखाई नहीं दिया बल्कि भाजपा ने संविधान का उल्लंघन कर उनकी पार्टी के ही छह विधायकों को तोड़ लिया।

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