पूर्व डीजीपी : ‘बेटी के सम्मान में भाजपा मैदान में’ नारे का सच

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पूर्व डीजीपी

भाजपा जैसे हिंदुत्व के ठेकेदार, जो महिलाओं को बच्चा जनने वाली मशीन मानते हैं, और पुरुषों की  नौकरानियां समझते हैं। उनसे यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे? बेटियों की सुरक्षा का नारा सिर्फ वोट बटोरने की नौटंकी है। उनकी राजनीति समाज में प्रभावी पुरुष प्रधान सोच को बढ़ावा देना है। जो उनकी बीमार मानसिकता को दर्शाता है। 

झारखंड राज्य के पूर्व डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) डीके पांडेय के खिलाफ उनकी बहु रेखा मिश्रा ने दहेज़ उत्पीड़न की शिकायत की है। पांडेय जी डीजीपी रहते हुए भी काफी चर्चा में रहे हैं। कभी रघु भजन गाने को लेकर तो कभी भूमि विवाद को लेकर। बता दें कि रिटायरमेंट के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस बार अपनी बहू को लेकर चर्चा में। पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद एफ़आईआर दर्ज कर ली है। 

रेखा मिश्रा का पूर्व डीजीपी पर दहेज के लिए परेशान करने का आरोप

रांची पुलिस का कहना है कि रेखा मिश्रा ने महिला पुलिस स्टेशन को बताया कि पूर्व डीजीपी सहित पूरा परिवार उन्हें दहेज के लिए परेशान करता है। बार-बार उसे मायके से पैसे और सामान लाने को कहा जाता है। डीजीपी के परिवार के सभी सदस्यों ने उन्हें इतना परेशान किया कि उन्हें अपने मायके जाना पड़ा। मायके आने के बाद उसने अपने परिवार को घटना की जानकारी दी। आखिरकार, उन्हें पुलिस स्टेशन में आना पड़ा और मामला दर्ज करना पड़ा। बहू ने डीजीपी डीके पाण्डेय पर गंभीर आरोप भी लगायी है।

मालूम हो कि रेखा और शुभंकान की शादी 3 साल पहले हुई थी। वह धनबाद जिले के निरसा की रहने वाली है। रेखा मिश्रा भाजपा नेता गणेश मिश्रा की बेटी हैं। रेखा मिश्रा के मुताबिक, उसने कई बार अपने पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसका पति कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। बल्कि उसे बार-बार प्रताड़ित करता रहा था। जबकि डीजीपी को शिकायत करने पर उनहोंने आपत्तिजनक मशवरा दिए जाने का भी आरोप लगाती है।

पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में बकोरिया कांड व महिला तस्करी का मामला जोरों पर रहा 

ज्ञात हो कि डीजीपी के कार्यकाल में बकोरिया कांड जैसे झूठे मुकदमे, मोतीलाल बास्की को नक्सली कहकर एनकाउंटर जैसे मामले सामने आ चुके हैं। उनके कार्यकाल के साथ, झारखंड में महिलाओं की तस्करी का मामला जोरो पर था।

नारी उत्पीड़न मामले के संदर्भ में भाजपा नेताओं को कोई यह नया मामला नहीं है। देश से लेकर राज्य के स्तर पर भाजपा नेताओं के दामन में दाग लगते रहे हैं। ज्ञात हो कि भाजपा विधायक ढुल्लू महतों आज भी झारखंड के भगोड़ा विधायक हैं। भाप के ही महिला कार्यकर्ता ने उनपर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। लेकिन, भाजपा ने उन मुद्दों पर कभी कोई कार्यवाही नहीं की!

मसलन, ‘बेटी के सम्मान में भाजपा मैदान में’ इस नारे की वास्तविकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ‘निर्भया फंड’ के लिए आवंटित राशि का एक तिहाई भी सरकार द्वारा खर्च नहीं किया गया। जबकि दिन-रात चौगुनी दर से ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। और शर्म की बात यह है ऐसे कुकर्म में भाजपा नेताओं के नाम ही सामने आते रहे हैं।

कई गंभीर। सवालों में एक यह भी है कि संविधान का शपथ लेकर इतने प्रतिष्ठित पद में रहने वाले आखिर किस विचारधारा के अंतर्गत ऐसे घृणित कार्य करने से नहीं चूकते हैं!

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